वेटर ने बचाई दो महिलाओं की जान

Image caption रेस्तरां कर्मी सेफर ने दो महिलाओं की मदद की

शुक्रवार रात को जिस वक्त फायरिंग शुरू हुई, सेफर रेस्तरां कासा नॉस्ट्रा की बार के पीछे खड़े थे. ये उन 6 जगहों में से एक है जहां चरमपंथियों ने हमला किया था.

इमेज कॉपीरइट Getty
Image caption कासा नॉस्ट्रा रेस्तरां

सेफर बताते हैं, "मैं काउंटर पर खड़ा था. हमने धमाकों की आवाज़ सुनी, बहुत तेज़ आवाज़. सभी चीखने लगे, कांच का ग्लास टूटकर हमारे ऊपर गिरने लगा. ये बहुत डरावना मंज़र था. चारों तरफ़ कांच बिखरा था, कई हमारे चेहरे पर भी आकर लगे. मैंने देखा टेरेस पर खड़ी दो महिलाओं को चोटें आईं. एक महिला की कलाई और एक के कंधे पर चोट लगी थी. दोनों के शरीर से काफी खून बह रहा था. "

ख़तरे के बावजूद सेफर को लगा कि उन्हें महिलाओं की मदद करनी चाहिए. फायरिंग की आवाज़ रुकी तो सेफर दौड़कर बाहर महिलाओं के पास पहुंचे.

सेफर कहते हैं, "मैं दोनों महिलाओं को उठाकर बेसमेंट में ले गया. उनके शरीर से निकल रहे खून को रोकने की कोशिश की. ऊपर से लगातार गोलियों की आवाज़ सुनाई दे रही थी. ये भयावह था."

लेकिन बड़ी बात थी कि ये लोग किसी बड़ी अनहोनी से बच गए थे. वो कहते हैं, "हम जब बाहर आए तो हमने देखा सड़क पर लाशें इधर-उधर पड़ी हुई थीं. कई लोग घायल पड़े हुए थे."

Image caption जीन पॉल लूगॉन

घटनास्थल के पास ही रहने वाले 54 साल के जीन पॉल लूगॉन घटनास्थल पर हमलावरों के जाने के कुछ ही मिनट बाद पहुंचे. जिस वक्त गोलीबारी हो रही थी वो अपने घर की रसोई में थे.

वो कहते हैं, "दो से तीन मिनट तक लगातार गोलीबारी होती रही, मानो गोलीबारी सदियों से हो रही हो. मैं दौड़कर नीचे उतरा तो देखा तीन लोग मरे पड़े थे. "

उनके अनुसार, "मैं बहुत नज़दीक नहीं जाना चाहता था जिससे ये तस्वीरें मेरे ज़हन में ना बसे. मैं जानता था कि मैं चैन से सो नहीं पाउंगा. मेरी एक 11 साल की बेटी है. वो इतनी डर गई है कि अब घर से बाहर नहीं निकलेगी. ये ख़ौफ़नाक़ है. "

अचानक लूगॉन कहते हैं, "मुझे गुस्सा आ रहा है, बहुत ज्यादा गुस्सा. मरने वाले आम नागरिक हैं. उनकी क्या गलती थी? हां, मैं एक चीज़ के लिए शुक्रगुज़ार हूं. पिछली रात मुझे इसी रेस्तरां में कुछ लोगों से मिलने जाना था, लेकिन ये मुलाकात टल गई."

कासा नॉस्ट्रा रेस्तरां शहर के पूर्वी हिस्से में स्थित है. ये मुस्लिम और अरब बहुल इलाका है. लूगॉन आश्चर्यचकित हैं कि आखिर उनके पड़ोस में ये हमले क्यों हुए.

वो पूछते हैं, "हमलावर उन इलाकों में क्यों नहीं गए जहां अमीर लोग रहते हैं, जहां बड़ी आसानी से अप्रवासियों की शिनाख़्त की जा सकती है. यहां क्यों?"

उत्तरी पेरिस के मुस्लिम आबादी वाले इलाके में गुस्सा स्पष्ट है.

Image caption जमाल, "फ्रांस हमें स्वीकार नहीं करते"

हमलावरों पर टिप्पणी करते हुए 44 साल के जमाल कहते हैं, "हम उनकी तरह नहीं हैं. उनसे हमें कोई लेना देना नहीं है. हम इस घटना से गुस्से में हैं."

जमाल इस बात से चिंतित है कि ऐसे हमलों का सीधा असर मुस्लिम समुदाय के बेकसूर लोगों पर पड़ेगा.

जमाल कहते हैं, "फ्रांस के लोग हमें नहीं अपनाते हैं. इस्लाम को लेकर फ्रांस के लोगों में काफी विरोध है."

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption चार्ली हेब्दो

इससे पहले हुए चार्ली हेब्दो हमलों में फ्रांसीसी नागरिकों के शामिल होने से देश में मुस्लिम युवाओं के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है.

सेफर के पास इन सवालों का कोई जवाब नहीं है. वो अलजीरीयाई मूल के मुस्लिम हैं जो फ्रांस में रहते हैं.

इमेज कॉपीरइट EPA
Image caption कोशर सुपरमार्केट

सेफर की कहानी कुछ हद तक माली से आए लासाना बेथली से मिलती जुलती है. उन्होंने जनवरी में पेरिस के कोशर सुपरमार्केट में हुए चरमपंथी हमले के दौरान कई लोगों को पनाह दी थी.

दोनों ही मुसलमान हैं और दोनों ने ही दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की.

ये दोनों घटनाएँ फ्रांस के जटिल समाज को दर्शाती हैं और साथ ही यहां रह रहे मुस्लिमों की उल्झन को भी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार