#पेरिस: सोशल मीडिया ने मदद की और डराया भी

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पेरिस के चरमपंथी हमले कितने भयावह थे, इसकी तस्वीर अब लगभग साफ़ हो गई है, लेकिन इस घटना से एक बार फिर साबित हो गया है कि इंटरनेट ख़ासकर सोशल मीडिया ऐसे हादसों में लोगों के लिए कितना मददगार है.

सोचने में तो ये लगता है कि ऐसी मुश्किल घड़ी में किसको सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखने की पड़ी रहती होगी, कौन ट्वीट करता होगा.

लेकिन हक़ीक़त ये है कि संकट की इस घड़ी में सोशल मीडिया अपना दुख दर्द बयां करने, ख़बरें भेजने और आधिकारिक बयान जारी करने का सशक्त माध्यम बन गया है.

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हालाँकि इसका नकारात्मक पहलू ये भी है कि यही सोशल मीडिया दुष्प्रचार, भ्रामक जानकारियां और झूठी ख़बरें फैलाने का मंच भी बना है जिससे समाज में डर फैलता है.

पेरिस में हमलों की ख़बर जैसे ही फैली, फ़ेसबुक ने पेरिस के लोगों के लिए सेफ्टी चेक फीचर शुरू कर दिया ताकि लोग अपने दोस्तों और क़रीबियों को बता सकें कि वे सुरक्षित हैं.

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इससे पहले फ़ेसबुक ने ये फ़ीचर नेपाल में भूकंप त्रासदी के दौरान पहली बार शुरू किया था.

फ़ेसबुक कहता है, “इन नाजुक क्षणों में उस जगह मौजूद लोगों और उनके मित्रों और परिवारजनों के लिए संदेश देना बहुत ज़रूरी होता है, क्योंकि वे समाचार के लिए चिंतित रहते हैं.”

फ़ेसबुक ने कहा, “लोग अपने प्रियजनों की सलामती जानने के लिए फ़ेसबुक पर आते हैं, यही वजह है कि हमने पेरिस के लोगों के लिए सेफ्टी चेक फीचर शुरू किया.”

इस तरह से फ़ेसबुक यूजर एक बार में ही अपने सैकड़ों दोस्तों को सूचना दे सकता है. चरमपंथी घटनाओं में, अक्सर मोबाइल फ़ोन नेटवर्क चरमरा जाता है, क्योंकि हर कोई अपने प्रियजनों से बात करना चाहता है.

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ये तो रहा फ़ायदा, लेकिन सोशल मीडिया का नुक़सान भी कुछ कम नहीं है.

हालाँकि इस बार सोशल मीडिया पर साझा की जा रही जानकारियों पर मीडिया का संयमित रुख़ रहा है. इससे पहले शार्ली एब्डो हमले के दौरान कुछ मीडिया कंपनियों पर बंधकों की जानकारी प्रसारित करने का आरोप लगा था. एक कंपनी पर तो बाकायता मुक़दमा भी चला.

पेरिस हमले के दौरान, इंस्टाग्राम पर बेटाकलां कॉन्सर्ट हॉल की एक तस्वीर डाली गई थी. ये वही जगह थी जहाँ 100 से भी अधिक लोग मारे गए थे. इंस्टाग्राम का ये अकाउंट तब से अपडेट नहीं हुआ है.

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फ़ेसबुक पर एक व्यक्ति ने कथित तौर पर कॉन्सर्ट हॉल के अंदर से बताया कि किस तरह हमलावर एक के बाद एक लोगों को मार रहे हैं- इस विवरण के एक और चश्मदीद के बयान से मिलने के बाद ही मीडिया ने इसे दिखाया.

ऐसे लोगों की भी कमी नहीं होती जो इन मौकों पर जमकर झूठ फैलाते हैं.

अमरीकी राष्ट्रपति उम्मीदवारी की दौड़ में शामिल डोनाल्ड ट्रंप में पेरिस के हमले के बाद ट्वीट किया, “मेरी प्रार्थना पेरिस हमले में मारे गए और बंधकों के साथ है. ईश्वर आप सभी का साथ दे.”

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लेकिन ये वो ट्वीट नहीं था, जिसे लोगों ने शेयर किया. बल्कि उनका वो ट्वीट था जो उन्होंने जनवरी में किया था, जो उन्होंने शार्ली एब्डो के वक्त किया था.

हालाँकि ट्वीट मे साफ़तौर पर तारीख़ देखी जा सकती थी, इसके बावजूद लोग इसे रिट्वीट करन से बाज नहीं आए. नतीजा ये रहा कि लोगों ने इस मौके का राजनीतिक लाभ उठाने के लिए ट्रंप पर जमकर अपनी भड़ास उतारी.

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