भारतीयों को ब्रितानी वर्क वीज़ा का प्रस्ताव

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लंदन के मेयर बोरिस जॉनसन ने भारतीय छात्रों के लिए नए कॉमनवेल्थ वीज़ा का प्रस्ताव दिया है जिसके तहत छात्र ब्रितानी विश्वविद्यालय में शिक्षा पूरी करने के बाद ब्रिटेन में दो साल तक काम कर सकेंगे.

मेयर को उम्मीद है कि इससे ब्रितानी विश्वविद्यालयों में कम हो रही विदेशी छात्रों की संख्या में सुधार आ सकेगा.

'फ़ाइनेंशियल टाइम्स' के मुताबिक़ मेयर ने जो प्रस्ताव ब्रितानी सरकार को भेजा है, उसके मुताबिक़ दो वर्षीय कॉमनवेल्थ वीज़ा की शुरुआत भारतीय छात्रों के साथ की जाए और ये कोशिश सफल रही तो इसे अन्य देशों पर लागू किया जाए.

अपने बयान में जॉनसन ने कहा कि इसमें कोई शक़ नहीं है कि लंदन दुनिया की शैक्षिक राजधानी है लेकिन विदेशी छात्रों पर मौजूदा प्रतिबंधों के कारण भारत के मेधावी छात्र ब्रिटेन नहीं आ पा रहे हैं.

लंदन में चीन और अमरीका के बाद सबसे ज़्यादा विदेशी छात्र भारत के हैं लेकिन भारतीय छात्रों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की जा रही है.

पिछले पाँच सालों के दौरान ब्रिटेन में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या आधी ही रह गई है.

अधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक़ 2010-11 में 39090 भारतीय छात्र पढ़ाई के लिए ब्रिटेन गए जबकि 2013-2014 में संख्या सिर्फ़ 19750 ही रह गई.

लंदन के मेयर बोरिस जॉनसन और लंदन के प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षाविदों ने मंगलवार को ब्रिटेन में विदेशी छात्रों की घट रही संख्या पर लंदन के सिटी हॉल में चर्चा की.

लंदन मेयर के दफ़्तर के मुताबिक़ हर साल लगभग एक लाख विदेशी छात्र पढ़ाई करने के लिए लंदन आते हैं. ये संख्या दुनिया के किसी भी शहर के मुक़ाबले अधिक है.

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