दुनिया एंटीबायोटिक युग के अंंत की ओर

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वैज्ञानिकों ने पाया है कि बैक्टीरिया ने सबसे असरदार एंटीवायोटिक के ख़िलाफ भी प्रतिरोध क्षमता विकसित कर ली है.

विज्ञान के जगत में इसे ख़तरे की घंटी माना जा रहा है क्योंकि इसके व्यापक और दीर्घकालिक अंजाम होंगे. बैक्टीरिया में ये प्रतिरोध क्षमता के पूरी दुनिया में फैलने का ख़तरा है जिससे आधुनिक चिकित्सा जगत अंधकार में पहुँच जाएगा.

इसके बाद वैज्ञानिकों ने दुनिया के 'पोस्ट एंटीबायोटिक युग' के मुहाने पर होने की चेतावनी है.

चीन में मरीज़ों और मवेशियों पर जांच करने के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि इस बैक्टीरिया पर एंटीबायोटिक कोलिस्टिन भी बेअसर है.

कोलिस्टिन को कई बीमारियों के लिए अंतिम इलाज के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है.

वैज्ञानिकों के अनुसार, मुमकिन है कि इस दवा के मवेशियों में ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल के कारण ये प्रतिरोधक क्षमता विकसित हुई.

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Image caption ये प्रतिरोधक क्षमता पहले सूअरों में देखी गई जिन्हें चीन में ये एंटीबायटिक दिया जाता रहा है.

विशेषज्ञ कहते हैं कि इस नई चिंताजनक जानकारी को दुनिया में चेतावनी की तरह लेना चाहिए.

इलाज के लिए पूरी तरह से प्रतिरोधी बनने पर इस बैक्टीरिया से 'एंटीबायोटिक सर्वनाश' का युग शुरु हो जाएगा.

इससे एक बार फिर सामान्य सा संक्रमण भी जान लेवा बन सकता है. इतना ही नहीं एंटीबायोटिक दवाओं पर निर्भर सर्जरी और कैंसर का उपचार खतरे में पड़ जाएगा. सरल भाषा में कहें तो सामान्य से दस्त या उल्टी की समस्या यदि बिगड़ जाए तो उसका इलाज करने के लिए कोई एंटीबायोटिक कारगर साबित नहीं होगा.

चीनी वैज्ञानिकों ने एक नए तरह का परिवर्तन देखा जिसे एमसीआर-1 जीन नाम दिया गया. ये एंटीबायोटिक कोलिस्टिन के ज़रिए बैक्टीरिया को मारने से रोकता है. यह जीन परीक्षण के बाद हर पांचवे पशु और 15 फीसद कच्चे मांस के नमूनों और 16 रोगियों में पाया गया.

इसके लाओस और मलेशिया में फैलने के सबूत भी है.

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कार्डिफ विश्वविद्यालय से इस अध्ययन पर सहयोग करने वाले प्रोफेसर टिमोथी वॉल्श ने बीबीसी को बताया," पोस्ट एंटीबायोटिक दुनिया (यानी कारगर एंटीबायोटिक युग का अंत) को वास्तविकता में लाने के लिए सभी परिस्थितियां अब मौजूद हैं.

इससे पहले भी एंटीबयोटिक कोलिस्टीन का प्रतिरोध उभर चुका हैं. इस बार महत्वपूर्ण अंतर ये है कि ये इस तरह से हुआ है कि आसानी से बैक्टीरिया में साझा हो सकता है.

लीड्स टीचिंग अस्पताल, एनएचएस ट्रस्ट के प्रोफेसर विलकॉक्स ने कहा, "क्या मैं डरता हूं कि हम एक उपचार न हो सकने वाली जैविक स्थिति की तरफ बढ़ रहे हैं ? हां,बिल्कुल. ये इस साल या अगले साल या इसके बाद के साल में होगा. ये कहना मुश्किल है.

ऐसे संकेत हैं कि चीनी सरकार समस्या का समाधान करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रही है.

एंटीबयोटिक कैंपेन समूह से जुड़ी प्रोफेसर लॉरा पिडडॉक कहती हैं कि एक ही एंटीबायोटिक दवा को पशु चिकित्सा और मानव चिकित्सा में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.

वो कहती हैं, "उम्मीद की जानी चाहिए कि एंटीबायोटिक के बाद का युग अभी शुरू नहीं हुआ है. लेकिन मौजूदा स्थिति को एक चेतावनी के तौर पर लेना ही चाहिए "

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