पेरिस हमले: 'शरणार्थियों' पर अमरीका सख़्त

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पेरिस में हुए चरमपंथी हमलों के बाद अमरीकी संसद ने सीरियाई और इराक़ी प्रवासियों के लिए नियम कड़े कर देने वाला बिल पारित कर दिया है.

289 सांसदों ने इस विधेयक के पक्ष में जबकि 137 ने विरोध में वोट दिया. दर्जनों डेमोक्रेट सांसदों ने भी बिल पारित कराने में रिपब्लिकन सांसदों का साथ दिया.

इस विधेयक को राष्ट्रपति ओबामा के लिए झटका माना जा रहा है. ओबामा ने कहा है कि वो इसे रोकने के लिए अपनी वीटो शक्ति का इस्तेमाल करेंगे.

हालांकि विधेयक का अभी सीनेट से पारित होना बाकी है.

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13 नवंबर को पेरिस में हुए हमलों में 129 लोग मारे गए थे. इस्लामिक स्टेट ने इन हमलों की ज़िम्मेदारी ली थी. मारे गए सात हमलावरों में से एक को सीरियाई शरणार्थी माना जा रहा है जो ग्रीस के रास्ते फ़्रांस पहुँचा था.

इस विधेयक के पारित होने के बाद एफ़बीआई, होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और एनआईए के निदेशकों को अमरीका में शरण लेने वाले हर प्रवासी के दस्तावेज़ प्रमाणित करने होंगे और ये स्पष्ट करना होगा कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा नहीं है.

एफ़बीआई प्रत्येक शरणार्थी की जाँच भी करेगी.

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नेब्रास्का के एक डेमोक्रेट सांसद ब्रेड एशफ़र्ड ने पेरिस हमलों को नियम बदलने वाला बताते हुए कहा, "मैं चुपचाप नहीं बैठ सकता. मुझे अपने संसदीय क्षेत्र और अमरीकी जनता की सुरक्षा की चिंता है."

सदन के नेता केविन मकार्थी ने विधेयक का समर्थन करने की वजह बताते हुए कहा, "चरमपंथियों को वो मौक़ा देना जिसकी उन्हें तलाश है हमारे राष्ट्र और मुक्त समाज के मूल्यों के ख़िलाफ़ है."

कई अन्य सांसदों ने चरमपंथियों से बचकर भाग रहे लोगों के प्रति करुणा दिखाने का आह्वान किया.

रिपब्लिकन सांसद जेरॉल्ड नेडलर ने कहा, "आतंकवाद को हराने का मतलब ये नहीं है कि जो लोग आतंकियों से बचकर भाग रहे हैं उनके लिए दरवाज़े बंद कर लिए जाएं."

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