नवाज़ शरीफ़ या मुशर्रफ़, किस पर करें यकीन

पाकिस्तान में दो बड़ी सियासी शख़्सियतों ने चरमपंथ पर अलग-अलग बयान दिए हैं.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ एक तरफ जहां चरमपंथियों को अपना दुश्मन बता रहे हैं तो दूसरी तरफ पूर्व राष्ट्रपति जनरल (सेवानिवृत्त) परवेज़ मुशर्रफ़ ने उन्हें फ्रीडम फाइटर करार दिया है.

इस्लामाबाद में चल रहे 'हार्ट ऑफ़ एशिया' मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि पाकिस्तान किसी भी चरमपंथी संगठन का साथ नहीं देगा.

उन्होंने ये बात बुधवार को अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर 'हार्ट ऑफ़ एशिया' मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के उद्घाटन पर कही.

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नवाज़ शरीफ़ अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी के साथ इस सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे हैं.

अफ़ग़ानिस्तान का आरोप है कि उसके यहां सक्रिय कई चरमपंथियों को पाकिस्तान में शरण मिलती है.

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वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक और आॅल पाकिस्तान मुस्लिम लीग के अध्यक्ष जनरल (सेवानिवृत्त) परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा है कि भारत प्रशासित कश्मीर में लड़ने वाले दहशतगर्द नहीं बल्कि मुजाहिदीन हैं.

कराची में बीबीसी उर्दू को दिए एक ख़ास इंटरव्यू में जनरल मुशर्रफ़ ने कहा, "हम उन्हें मुजाहिदीन कहते हैं, उन्हें कश्मीर और पाकिस्तान में बड़ी मदद हासिल है."

उन्होंने आगे कहा, "उन्हें तालिबान या दहशतगर्द नहीं कहते हैं, वे तो हमारे मुजाहिदीन हैं, हमारे फ़्रीडम फ़ाइटर हैं."

इससे पहले भी सरकार और पाकिस्तानी सेना के बीच टकराव होते रहे हैं. नवाज़ शरीफ़ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर उनके शपथ ग्रहण समारोह में आए थे, तब भी जनरल मुशर्रफ़ ने इसका विरोध किया था. उनका कहना था कि अगर वो उनकी जगह होते तो कभी नहीं आते.

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Image caption पाकिस्तानी सेना के जनरल रहील शरीफ

वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी सेना के जनरल राहील शरीफ़ का भी मुशर्रफ़ ने समर्थन किया है. वो सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि राहील शरीफ़ के कार्यकाल को बढ़ाए जाने की ज़रूरत है.

अगर ऐसा नहीं हुआ तो भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ उनकी मुहिम पर पानी फिर जाएगा.

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान में जनरल राहील शरीफ़ ने पाकिस्तान सरकार के ख़िलाफ़ कई भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाइयों को अंजाम दिया है.

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