'शांतिप्रिय मुस्लिमों की आवाज़ नहीं सुनी जा रही'

अमरीका में जहां एक ओर चरमपंथी हमलों के बाद से मुसलमानों को लेकर बहस जारी है, वहीं न्यूयॉर्क में सैकड़ों मुसलमानों ने चरमपंथ के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया है.

अमरीका में कैलिफ़ोर्निया के चरमपंथी हमले के बाद से बहस में तेज़ी आई है कि मुसलमानों को अब खुलकर साफ़ शब्दों में चरमपंथ का विरोध करना होगा.

इसी माहौल में शनिवार को न्यूयॉर्क के मशहूर टाइम्स स्क्वेयर पर 500 से अधिक मुसलमानों ने चरमपंथ और चरमपंथी गुट आईएस के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया.

प्रदर्शन में महिला, बच्चे, जवान और बूढ़े सभी थे, जिनके हाथों में पोस्टर थे जिन पर- मुस्लिम्ज़ फ़ॉर पीस, नॉट इन माई नेम, मुस्लिम्ज़ अगेंस्ट आईसिस, चरमपंथ का कोई धर्म नहीं होता जैसे नारे लिखे थे.

न्यूयॉर्क के सुहैल चीमा मुस्लिम्ज़ फ़ॉर पीस संस्था से जुड़े हैं और विरोध प्रदर्शन के आयोजक हैं.

वे कहते हैं, "देखिए, सिर्फ़ अमरीका में ही नहीं बल्कि हर मुल्क में मुसलमानों को चरमपंथ के ख़िलाफ़ विरोध करना होगा. उसकी भर्त्सना करनी होगी और जब तक सारे लोग बाहर निकलकर नहीं आएंगे, यह मुद्दा हल नहीं होगा."

वह कहते हैं, "अब मुसलमानों को आतंकवादियों के लिए सफ़ाई पेश करना या उनकी आतंकी गतिविधियों के कारण गिनाना भी बंद करना होगा. और साफ़ शब्दों में खुलकर हर जगह आतंकवाद की निंदा करनी होगी."

पेरिस और कैलिफ़ोर्निया में दाएश या आईएस नामक चरमपंथी संगठन से प्रेरित हमलों के बाद से अमरीका में मुसलमानों पर दबाव बढ़ा है कि वो ख़ुद को चरमपंथ से अलग दिखाने के लिए साफ़ शब्दों में इसका विरोध करें.

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इस समय अमरीका में चरमपंथी हमलों को लेकर भय और चिंता काफ़ी बढ़ गई है. कई शहरों में मुसलमानों और मस्जिदों पर हमले भी हुए हैं. इसलिए मुसलमानों में भी डर का माहौल है.

प्रदर्शन में शामिल एक मुस्लिम महिला कौसर बानो कहती हैं, "चौबीस घंटे मीडिया में आतंकवाद को लेकर यह प्रोपेगैंडा होता है और सारे मुसलमानों को एक ही रंग में रंग दिया जाता है. हम जैसे शांतिप्रिय और बेगुनाह मुसलमानों की तो आवाज़ ही नहीं सुनी जा रही. हमारे लिए तो यह बहुत ही डरावना है."

प्रदर्शन के आयोजकों को उम्मीद है कि वो अपनी आवाज़ उठाकर कुछ हद तक आम अमरीकियों को यह समझाने में कामयाब होंगे कि वो आतंकवाद का विरोध करते हैं और आईसिस जैसे संगठन उनके धर्म या मुसलमानों का प्रतिनिधित्व नहीं करते.

इस प्रदर्शन पर एक अमरीकी व्यक्ति डैरन ने कहा, "यह बहुत अच्छी बात है. बहुत ही अच्छी बात है. सिर्फ़ मुसलमान ही नहीं बल्कि सारे लोगों को यहां इनके साथ खड़े होकर चरमपंथ के ख़िलाफ़ आवाज़ उठानी चाहिए."

हाल ही में अमरीका में रिपब्लिकन पार्टी की तरफ़ से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की दौड़ में शामिल डॉनल्ड ट्रंप ने कैलिफ़ोर्निया गोलीकांड पर कहा था कि अमरीका में मुसलमानों के आने पर रोक लगा देनी चाहिए.

ट्रंप के बयान की निंदा भी हो रही है और कुछ लोग इससे उत्तेजित भी हैं. ट्रंप कहते हैं कि उन्होंने यह बात किसी धर्म के ख़िलाफ़ नहीं बल्कि सुरक्षा के मुद्दे के मद्देनज़र कही है.

प्रदर्शन में 21 वर्षीय युवा शाबान आसिफ़ भी थे. उनका कहना था, "जो भी आतंकवादी हमले करते हैं, वो मुसलमान नहीं हैं. वो न तो इस्लाम का प्रतिनिधत्व करते हैं न हमारा प्रतिनिधत्व करते हैं. हमारा धर्म शांति की शिक्षा देता है और इसीलिए सभी मुसलमानों को बाहर निकलकर आतंकवाद का विरोध करना चाहिए."

अमरीकी जांच एजेंसियों के मुताबिक़ दाएश या आईएस सोशल मीडिया के ज़रिए युवा मुसलमानों को बहकाकर साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा है.

सुरक्षा अधिकारी कहते हैं कि अमरीका से 250 लोग, जिनमें अधिकतर युवा हैं, आईएस के साथ जुड़ने और मिलकर लड़ने के लिए सीरिया भी गए हैं.

दो दिसंबर को कैलिफ़ोर्निया के सैन बर्नारडिनो में एक युवा मुस्लिम दंपत्ति ने एक इमारत में गोलीबारी की थी, जिसमें 14 लोग मारे गए थे.

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