उनके सिर में गोलियां लगीं, मेरी शर्ट पर छींटे

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पिछले साल दिसंबर में पेशावर के आर्मी स्कूल पर हमले में जो बच्चे बच गए थे, उनके ज़ेहन में आज भी वह घटना एक बुरे सपने की तरह दर्ज है.

तालिबान के इस हमले में 152 लोग मारे गए थे जिनमें 133 बच्चे थे.

अपनी आखों के सामने अपने दोस्तों को मरते देखना इन बच्चों के लिए जीवन का सबसे भयावह क्षण था.

बीबीसी ने इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी चंद छात्रों से बात की.

मलिक हसन ताहिर

मैं दसवीं का छात्र हूँ और आर्मी पब्लिक स्कूल में पढ़ता हूँ. जब हमला हुआ तो मैं वहां था और मेरे बड़े भाई की इस हमले में मौत हो गई.

जब गोलियां चलने की आवाज़ आई, तब मैं स्कूल के ऑडिटोरियम में बैठा था.

दो-तीन मिनटों बाद ही दरवाज़ा टूटा और एक हथियारबंद आदमी वहां आया और गोलियां बरसानी शुरू कर दी.

मैं और मेरे दो दोस्त बाहर के दरवाज़े की ओर भागे, पर जैसे ही मैंने पीछे देखा तो मेरे दोनों दोस्तों के सिर में गोलियां लगी थीं और खून के छींटे मेरी शर्ट पर पड़ गए थे.

मुझे लगा कि अब मैं ज़िंदा नहीं बचूंगा. मैं बस बाहर निकलना चाहता था और अपने घर पहुँचना चाहता था.

जब मैं निकल आया तो मुझे अपने भाई की चिंता हुई, जो अंदर ही फंस गया था.

वहां से बच्चों के निकलने और चीखते हुए नज़दीकी घरों की ओर भागना दिल दहला देने वाला था.

मैं उम्मीद कर रहा था कि मेरा भाई हिफ़ाज़त से होगा लेकिन मुझे पता नहीं चल पाया कि वह हमेशा के लिए चला गया था.

एजाज़ अली

14 साल के एजाज़ अली अब पेशावर से एबटाबाद के बर्नहाल स्कूल आ गए हैं, लेकिन अभी भी वह सदमे में हैं.

उन्होंने दो बार ख़ुदकुशी की कोशिश की. आख़िरकार उनका शहर बदलना पड़ा. वो बताते हैं: मैं नौवीं कक्षा का छात्र हूँ और डॉक्टर बनना चाहता हूँ.

जब शूटिंग शुरू हुई तो मैं फ़र्श पर लेट गया. मैं किसी तरह क्लासरूम में ही छिपने में कामयाब रहा, जहां से बाद में सेना ने मुझे बचाया.

इस हमले में मेरे 14 दोस्त मारे गए थे.

हमले के बाद मुझे पेशावर छोड़ना ही था क्योंकि मैं इस बात से डर गया था कि वो मुझे भी मारने के लिए आएंगे.

एबटाबाद में मैं सुरक्षित महसूस करता हूँ.

मौज ख़ान

कॉलेज में पढ़ने वाले 16 साल के मौज ख़ान का बांया हाथ हमले के दौरान ज़ख़्मी हो गया था. वो कहते हैं-

इससे पहले मैं क्रिकेट, फ़ुटबॉल और बैडमिंटन जैसे खेल खेलता था.

दौड़ लगाना और बास्केटबॉल मेरा पसंदीदा खेल था, लेकिन जबसे मेरे बाएं हाथ में गोली लगी है, मैं कठिन खेल नहीं खेल सकता.

मेरी कोहनी में तीन गोलियों के घाव हैं. डॉक्टरों ने मेरे पैर से मांस लेकर मेरी बांह का इलाज किया है.

लेकिन इसके बाद भी, मैं अपनी बांह और पैर पूरी तरह नहीं मोड़ सकता.

इसलिए मैं ख़ुद को इनडोर गेम्स में ही रखता हूँ. अक्सर मैं स्नूकर खेलता हूँ और फ़ोटोग्राफ़ी करता हूँ. मुझे तस्वीरें खींचना पसंद है.

सबसे बड़ी समस्या है बाएं हाथ से लिखना, जो दर्द करता है.

हालांकि ज़िंदगी आगे बढ़ी है लेकिन इस हमले ने मुझे पूरी तरह बदल डाला है.

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