मोटापे पर कैसे इतराएं...

बीशम्बर दास

ब्रिटेन की अवार्ड विजेता प्लस साइज़ मॉडल बिशाम्बर दास दुबली-पतली मॉडलों को चुनौती दे रही हैं.

उन्होंने ब्रिटेन में रहने वाले एशियाई समुदाय की अपने शरीर पर शर्मिंदा होने की संस्कृति की आलोचना की है.

उनका कहना है कि औरतों और लड़कियों की उनके शरीर के ढांचे की वजह से आलोचना करना उनके जीवन पर हानिकारक प्रभाव डाल सकता है.

उन्होंने दो साल पहले पहली बार एक सौंदर्य प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था. उन्होंने प्लस साइज़ मॉडलों की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता का ख़िताब अपने नाम किया है.

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वो उम्मीद करती हैं उनकी सफलता कई सारी लड़कियों को स्वस्थ शरीर पाने के लिए प्रोत्साहित करेगी.

उनका कहना है, "कुछ आंटियों को लगता था कि मुझे यह कहना उनका हक़ है कि मुझे इस तरह मोटा नहीं होना चाहिए. मुझे कई लोगों ने बताया कि मैं एक मोटी और ख़ूबसूरत लड़की हूँ. इसलिए मैं हमेशा इस ख़्याल के साथ बड़ी हुई हूं कि मुझे कभी मेरा प्यार नहीं मिलेगा, क्योंकि मैं किसी लायक़ नहीं हूं."

लेकिन उन्होंने अवार्ड जीतकर अपनी इन आलोचनाओं को ग़लत साबित किया.

बिशाम्बर बताती हैं, "मुझे अपना ऑडिशन याद है. वहां मैंने दुबली-पतली लड़कियों को देखा. मैं नहीं जानती कि यह आइडिया कहां से आया मेरे दिमाग़ में लेकिन कुछ था जो मुझे उनसे अलग करता था. और मैंने इसे एक कमी के रूप में देखने की बजाए इसे अपनी पहचान के रूप में देखा."

वो अपनी सफलता का इस्तेमाल बड़ी क़द-काठी वाली लड़कियों को अपने शरीर पर गर्व करने के लिए प्रोत्साहित करने में कर रही हैं.

उनका मानना है कि एशियाई लोग स्लिम बनने को लेकर दीवाने हैं. वे आपको एक स्लिम शरीर के रूप में देखना चाहते हैं, ठीक वैसे ही जैसे वे आपको गोरा देखना चाहते हैं.

मुझे पता है कि ये ख़्याल कहां से आते हैं. यह बॉलिवुड का प्रभाव है.

ये सब कई औरतों को निराश कर सकता है. बिशाम्बर का कहना है कि ऐसी कई औरतें सदमे का शिकार हो जाती हैं.

उन्होंने बताया कि उनके पास कई ऐसी लड़कियां आ चुकी हैं जो कहती हैं कि वे अब और नहीं झेल सकतीं हैं.

ऐसी लड़कियां अपने परिवार और समुदाय के दबाव से निपटने में असफल हैं और आत्महत्या की कोशिशें भी कर चुकी हैं.

मॉडलों का कहना है कि बिशाम्बर मोटापा या अस्वस्थ्य जीवन शैली को प्रोत्साहित नहीं कर रही हैं. वे अपनी मुहिम से यह बताना चाहती हैं कि सुंदरता सभी ढांचे और आकार में होती है.

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