'...तो अमरीका में सारे हो जाएंगे अमर !'

  • 25 दिसंबर 2015
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अमरीका के राष्ट्रपति पद की होड़ में इस बार शामिल हैं एक बेहद दिलचस्प उम्मीदवार.

उनकी ख़ासियत ये है कि वो अमरीकी वोटरों को एक हैरतअंगेज़ वादा करते हुए अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं.

वो मृत्यु से मुक्ति और सबको अमरत्व दिलाने का वादा करते हुए मतदाताओं से ख़ुद को राष्ट्रपति बनाने की अपील कर रहे हैं.

इनका नाम है ज़ोल्टान इस्तवान और वो अपना चुनाव प्रचार ताबूत के आकार की बस के ज़रिए पूरे अमरीका में घूम घूमकर कर रहे हैं.

व्हाइट हाउस से कुछ ही दूरी पर स्थित एक होटल की लॉबी में वो मुझे बताते हैं, “मैं नेशनल ज्योग्राफ़िक के लिए पत्रकारिता करता था तो ख़ूब यात्राएं करता था. मौज मस्ती करता था. एक बार वियतनाम में मैंने पाया कि मैं एक लैंड माइन (बारूदी सुरंग) पर खड़ा हूँ. मेरे गाइड ने मुझे धक्का देकर वहां से हटाया और मेरी ज़िंदगी बचाई."

वो आगे बताते हैं, "उस वक्त मैंने तय किया कि अब मुझे मौत को मिटाने में ही अपना जीवन लगा देना चाहिए. मैं ऐसा, अपने लिए और उन सभी के लिए करना चाहता हूँ जो मेरे प्यारे हैं, .”

अमरीका के राष्ट्रपति पद के इस उम्मीदवार के विचित्र विचार और उनकी योजनाएँ सुनकर आप दंग रह जाएँगे.

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दुनिया भर के मीडिया में अमरीकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में कभी डोनल्ड ट्रंप का नाम उभरता है तो कभी जेब बुश का. कभी हेलरी क्लिंटन की चर्चा होती है तो कभी बेर्नी सैंडर्स की. लेकिन इन सबके बीच इस्तवान सबसे अनोखे उम्मीदवार हैं.

वे लेखक भी हैं, दार्शनिक भी हैं और भविष्यदृष्टा भी. वे ट्रांसह्यूमनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार हैं. यह पार्टी नहीं, बल्कि एक आंदोलन है जो मानता है कि तकनीक इंसानों के दिमाग और शरीर को बदलने की क्षमता रखती है.

ट्रांसह्यूमनिस्टों का सपना है कि अमरत्व को भविष्य की तकनीकों की मदद से हासिल किया जा सकता है. यह दिमाग को अपलोड करने से, शारीरिक अवयवों की वृद्धि और आनुवांशिक हेरफेर से हासिल हो सकता है.

ये लोग उस सोच को बढ़ावा दे रहे हैं जो मानव को सुपर मानव के तौर पर स्थापित करना चाहती है.

जब अमरीकी राष्ट्रपति पद के अन्य उम्मीदवार ईरान के मसले, अर्थव्यवस्था और अप्रवासन के मुद्दे का हल तलाश रहे हैं, वहां इस्तवान दावा कर रहे हैं कि वो मौत को ख़त्म करेंगे, हर अमरीकी हमेशा के लिए जीवित रहेगा.

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वे इन दिनों अपनी 'अमरत्व वाली बस' से अमरीका का दौरा कर रहे हैं. एक पुरानी स्कूल बस को एक बड़े ताबूत के आकार में बदला गया है. इसे तैयार करने से लेकर इसे चलाने तक का खर्चा ऑनलाइन क्राउड फंडिंग के जरिए किया जा रहा है.

वे इसके जरिए तकनीक अमर होने के विचार का प्रचार प्रसार कर रहे हैं. उनके प्रचार प्रसार का असर भी दिखने लगा है.

वे खुले तौर पर ये भी स्वीकार करते हैं कि यह बस एक स्टंट मात्र है, लेकिन इसके जरिए उन्हें मीडिया में कवरेज ज़रूर मिल रही है.

अगस्त से शुरू हुआ उनका सफ़र अभी भी जारी है. बीबीसी फ़्यूचर के लिए मैंने वाशिंगटन डीसी में इस्तवान के साथ एक पूरा दिन बिताया और ये देखने की कोशिश की कि वे अपने चुनावी वादे के प्रति कितने गंभीर हैं और वे अमरीका का भविष्य किस तरह से देखते हैं.

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हंगरी के अप्रवासी अमरीकी दंपत्ति की संतान हैं इस्तवान. वे एक पत्रकार के तौर पर काम कर चुके हैं. वे कहते हैं, “मैं पर्यावरण के मुद्दे पर काम कर रहा था. मैं मानवीय कामों में दिलचस्पी लेता था. मेरा जीवन काफ़ी अच्छा ही चल रहा था.”

ऐसे में मैंने उनसे ये जानना चाहा किस तरह के विज्ञान से लोग लंबे समय तक जीवित रहेंगे?

इसके जवाब में इस्तवान कहते हैं, “मेरे साथ वियतनाम में जो हादसा हुआ उसमें मैं तो लगभग मरते मरते बचा था. यह आंदोलन नहीं मरने को लेकर है, कई तरीके से मौत को मिटाया जा सकता है. शायद मैं इस दिशा में कुछ कर सकूं.”

इस्तवान पत्रकारिता छोड़ने के बाद एक उपन्यास लिखने में जुट गए. इस उपन्यास का नाम है- ट्रांसह्यूमनिस्ट वेजर. वो बताते हैं, “इस उपन्यास को लिखने में चार से पांच साल का वक्त लगा. मैं उपन्यास पर लगातार चार साल तक आठ घंटे तक काम करता रहा. मैंने कोई काम नहीं किया. केवल उपन्यास ही लिखा.”

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इस्तवान ये बताते हैं, “मैंने नियोरिएक्शनरी या डार्क एनलाइटनमेंट को बहुत अच्छे तरह से जानता हूं लेकिन इसकी कुछ नीतियों को नापसंद करता हूं, ख़ासकर महिलाओं को लेकर. लेकिन मैं मज़बूत राजशाही विचार से भी सहमत हूं. अगर आप उदार तानाशाह हैं तो फिर देश के लिए बेहतर है.”

वे आगे कहते हैं, “इसी वजह से मैं आर्टीफ़िश्यल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धि) को एक दिन अमरीका का राष्ट्रपति बनाने के पक्ष में हूं. क्योंकि इससे समाज का भला होगा. यह हम सबके हित में होगा. हमने अतीत में देखा है कि जब शासक आत्मकेंद्रित होता है तो वह देश को भयावह अंदाज़ में चलाता है. अगर आपको लगे कि कोई आपके हित में काम कर रहा है तो आप क्या उसे अपनी टीम में नहीं रखना चाहेंगे?”

बहरहाल, वे अपनी पार्टी के लक्ष्य के बारे में कहते हैं, “हमारा मुख्य उद्देश्य लाखों लोगों को लंबे समय तक जीवित रखना है. ट्रांसह्यूमनिज़म के अलावा हम भविष्य को किस तरह से प्रभावित कर सकते हैं ये भी देखना है. लोग अपनी सरकार को ये कह सकते हैं कि ये हमारे लिए महत्वपूर्ण है. दरअसल हमारी पार्टी का लक्ष्य अमरीका की संस्कृति को बदलना है.”

मैं इस्तवान से कहता हूं कि उनकी सोच अच्छी है, लेकिन वे जिस तरह की तकनीक की बात कर रहे हैं वो तो काफी महंगी है और हर कोई इसका खर्च भी नहीं उठा सकता.

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इसके जवाब में इस्तवान कहते हैं, “हम इन तकनीकों पर केवल अमीरों का कब्ज़ा नहीं रहने देंगे. चाहे जो हो, अगर डिज़ाइनर बेबी में कृत्रिम बुद्धिमता होती है तो सरकार को यह तय करना होगा कि डिज़ाइनर बेबी की सुविधा समाज के सभी वर्गों के लिए उपलब्ध हो.”

यह काफी हद तक समाजवाद की तरह लगता है. इस पर इस्तवान कहते हैं, “मैं समाजवाद का प्रशंसक तो नहीं हूं. मैं उदारवादी पृष्ठभूमि से आता हूं, लेकिन मैं अच्छी चीज़ें करना जानता हूं. अच्छी चीज़ ये है कि समाज में बंटवारा नहीं होना चाहिए, असमानता नहीं बढ़नी चाहिए. अच्छी चीज़ तो यही है कि इन तकनीकों पर सबका एक ही समय में हक हो.”

इस्तवान भविष्य की चुनौतियों का जिक्र करते हुए बताते हैं, “जिन विचारों का हम समर्थन कर रहे हैं, उनमें सर्वमान्य मूलभूत आमदनी शामिल है. आने वाले दिनों में रोबोट आदमी की जगह ले लेंगे. अगले 10 से 20 साल में ये हो जाएगा. यानी 20 साल में कामकाजी ट्रेनिंग वाला आदमी बेरोजगार हो जाएगा. ऐसे में हमें सर्वमान्य मूलभूत आमदनी सुनिश्चित करनी होगी ताकि सबके सिर पर छत हो, खाने के लिए भोजन हो. मूलभूत सुविधाएं मिलनी चाहिए. ”

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इसके अलावा इस्तवान अन्य पहलुओं को भी रेखांकित करते हैं, “हम सबको मुफ्त शिक्षा देने की व्यवस्था चाहते हैं. हमारी नीति है हम सबके लिए स्कूल और कॉलेज की शिक्षा अनिवार्य कर देंगे. सबको चार साल कॉलेज में बिताने होंगे. आज जिसका जन्म हो रहा है वह 150 से 200 साल तक जीवित रहेगा, लेकिन शिक्षा का स्तर नहीं बदल रहा है.”

वो आगे कहते हैं, “अमरीका में हम जितना शिक्षा पर खर्च करते हैं उससे चार गुना ज़्यादा पैसा जेल की व्यवस्था पर खर्च कर रहे हैं. वहीं बम, युद्ध और रक्षा उपकरणों पर हम शिक्षा के बजट से दस गुना ज़्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं. हमें जेल के उद्योग को बंद करना चाहिए.”

इस्तवान के मुताबिक, “लोगों को जेल में रखने के बदले उन्हें शिक्षित करने में पैसा खर्च होना चाहिए. आप इसे ऐसे देख सकते हैं कि अगर 20 फ़ीसदी कम कैदी रखें तो देश के सभी कॉलेजों का भुगतान कर सकते हैं.”

इतना ही नहीं इस्तवान के मुताबिक सभी काम रोबोट से कराने का चलन बढ़ेगा. वो कहते हैं कि ड्रोन के जरिए या फिर टैगिंग से अपराधियों का पीछा करना संभव है तो फिर उन्हें जेल में बंद कर मुफ़्त में खाना खिलाने की क्या ज़रूरत है.

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इस्तवान और मेरी उम्र एक ही है - 42 साल. मुझे ये भी ध्यान है कि पिछले कम से कम 20 साल से हम सुनते आए हैं कि आने वाले दिनों में रोबोट का इस्तेमाल बढ़ेगा और कृत्रिम बुद्धिमता का चलन भी बढ़ेगा, आम लोग हाथों से काम करना बंद कर देंगे....

तो ये महज़ वादे हैं या फिर ऐसा हो पाना व्यावहारिक है?

इस्तावान कहते हैं, "हम लोग पांच से छह साल पहले तक 3डी प्रिटिंग के बारे में नहीं जानते थे, लेकिन अब ये हो रहा है. इंटरनेट से लेकर क्लाउड तक दुनिया काफी बदली है."

हालांकि इस्तवान को ख़ुद के चुनाव जीतने की उम्मीद नहीं है. वे कहते हैं इस बार जीतने की उम्मीद नहीं है लेकिन कई दूसरे उम्मीदवार उन्हें वाइस प्रेसीडेंट के तौर पर देख सकते हैं.

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इसके अलावा उन्होंने एक अन्य विकल्प भी तलाशा हुआ है. वे कहते हैं, “मैं हेलरी क्लिंटन के दफ़्तर में ईमेल भेजूंगा कि आपको तकनीकी सलाहकार तो नहीं चाहिए. तकनीक से लेकर विज्ञान के क्षेत्र तक या फिर कैबिनेट या फिर डिप्टी के तौर पर मैं जगह खोजूँगा.”

वैसे इस्तवान ख़ुद किसे अपना वोट देते, ये पूछे जाने पर वह कहते हैं कि अगर मुझे मौका मिलता तो मैं ओबामा को फिर से राष्ट्रपति चुनता.

वो कहते हैं, “कई लोग इससे असहमत होंगे लेकिन देश अभी सही दिशा में चल रहा है. मैं किसी और को इस पद पर देखना नहीं चाहता. चीन की उपस्थिति बढ़ रही है और ऐसा आदमी चाहिए जो विज्ञान को आगे ले जा सके. हमें सावधान होने की जरूरत है क्योंकि हम ख़तरनाक दौर में पहुंच चुके हैं.”

इस बारे में मूल अंग्रेज़ी लेख यहां पढ़ें जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.

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