आईएस में शामिल होने कैसे गईं पाक महिलाएं

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पाकिस्तान की लाहौर पुलिस के अनुसार तीन महिलाएं, अपने बच्चों सहित सीरिया जाकर इस्लामिक स्टेट (आईएस) में शामिल हो गई हैं.

कुछ महीने पहले लाहौर की टाउनशिप हिद्दत कॉलोनी और हिंजरवाल थानों में इन महिलाओं और बच्चों के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करवाई गई थी.

हालांकि अब सरकार को इन महिलाओं के परिवारों के माध्यम से जानकारी मिली है कि उनका अपहरण नहीं हुआ बल्कि वे कराची और ग्वादर के रास्ते ईरान से सीरिया गई हैं ताकि आईएस में शामिल हो सकें.

लाहौर के डीआईजी ऑपरेशन्स, डॉ हैदर अशरफ, ने बीबीसी को बताया, "पुलिस के पास उनके अपहरण की एफ़आईआर दर्ज थी लेकिन अब उनमें से कुछ महिलाओं का संपर्क अपने परिवार से हुआ है, जिन्होंने बताया कि महिलाओं का अपहरण नहीं हुआ वे अपनी मर्ज़ी से गई हैं."

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"आगे की जांच से पता चला है कि वे महिलाएं कराची और ग्वादर के रास्ते ईरान से सीरिया गईं ताकि आईएस के लिए काम कर सकें".

सीरिया जाने वाली महिलाओं में फ़रहाना नाम की एक महिला भी शामिल है जो सितंबर में अपने पांच बच्चों के साथ घर से गायब हो गई थीं.

फ़रहाना के भाई इमरान ख़ान एक स्थानीय पत्रकार हैं और उन्होंने पुलिस को इस गुमशुदगी की सूचना दी थी.

इमरान का कहना है कि उनके बहनोई मोहम्मद हामिद राजस्व विभाग में काम करते थे और उनके दिल में चरमपंथी संगठनों के लिए हमदर्दी नज़र आती थी.

उन्हें पहले इसी तरह के मामलों में पूछताछ के लिए हिरासत में भी लिया गया था और वह कई महीने तक लापता रहे थे.

इमरान का कहना था कि इस दौरान फ़रहाना का भी चरमपंथी विचारधारा की तरफ़ रुझान हुआ और वह सितंबर में अपने पांच बच्चों के साथ घर से गायब हो गईं.

लेकिन इमरान का दावा है कि फ़रहाना पाकिस्तान की सीमा के पार नहीं गईं बल्कि सितंबर में ही एफ़सी ने उन्हें ईरान की सीमा के पास जीवानी से गिरफ़्तार कर लिया था.

उनका कहना है कि इसके बाद उनकी इंटरनेट के ज़रिए अपनी बहन से बात हुई है लेकिन इस समय वह कहां हैं यह पता नहीं.

लाहौर में आईएस की उपस्थिति की सूचना ने सरकार और आम लोगों में हलचल मचा दी है.

इससे एक दिन पहले सियालकोट के पास डसका क्षेत्र से चरमपंथ विरोधी बल ने आठ लोगों के एक ऐसे नेटवर्क को तोड़ने का दावा किया था कि जो पाकिस्तान में आईएस की गतिविधियों का संचालन करने और उनके लिए भर्तियां करने का काम कर रहा था.

पंजाब के कानून मंत्री राणा सना अल्लाह ने पंजाब में आईएस की उपस्थिति की सरकारी स्तर पर पुष्टि करते हुए बताया था कि डसका में मौजूद आठ लोग आईएस के लिए काम करने वाले एक व्यक्ति अमीर मुआविया से वाइबर के ज़रिए संपर्क में थे.

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उन्होंने एक उपनगरीय गांव में प्रशिक्षण शिविर भी बना रखा था जहां यह आईएस के पक्ष में लोगों की ब्रेन वाशिंग कर रहे थे.

जब सरकारी एजेंसियों ने उनका पता लगाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की तब वे सीरिया जाने की तैयारी में थे. इन लोगों से भारी मात्रा में हथियार और प्रचार सामग्री भी बरामद हुई है.

इन लोगों को बाद में गुजरांवाला चरमपंथ विरोधी अदालत में पेश किया गया. जहां से उन्हें दस दिन के रिमांड पर पुलिस के हवाले कर दिया गया.

इससे कुछ हफ्ते पहले लाहौर में पंजाब विश्वविद्यालय से कुछ प्रोफेसरों को गिरफ्तार कर अज्ञात स्थान पर ले जाया गया था.

इन प्रोफेसरों के बारे में भी बताया गया था कि वे पाकिस्तान में ख़िलाफ़त की स्थापना के लिए काम कर रहे थे और उनके संपर्क प्रतिबंधित संगठनों से थे.

पाकिस्तान के केंद्रीय गृहमंत्री चौधरी निसार देश में आईएस की मौजूदगी से इनकार करते रहे हैं.

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हालांकि पिछले कुछ महीनों में, विशेषकर पंजाब में, होने वाले इन घटनाओं के बाद सरकारी एजेंसियों, विशेषकर चरमपंथ विरोधी एजेंसियों में चिंता की लहर दौड़ गई है.

राज्य में आईएस का नेटवर्क कितना व्यापक है और कितने लोग इस संगठन के लिए काम करने के लिए पाकिस्तान से बाहर जा चुके हैं, इस बारे में अभी कोई पुख़्ता जानकारी मौजूद नहीं लेकिन हाल की घटनाओं के बाद इस संबंध में जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है.

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