ईरान में सऊदी के दूतावास में घुसे प्रदर्शनकारी

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सऊदी अरब में शिया धर्मगुरू अल निम्र को सज़ा-ए-मौत दिए जाने के बाद से शिया समुदाय में रोष बढ़ता जा रहा है.

ईरान से मिल रही रिपोर्टों के मुताबिक़ राजधानी तेहरान में प्रदर्शनकारी सऊदी अरब के दूतावास में घुस गए.

सोशल मीडिया पर प्रकाशित तस्वीरों में दूतावास की इमारत के एक हिस्से में आग लगी दिख रही है.

सऊदी अरब ने शिया धर्मगुरू शेख निम्र अल निम्र को चरमपंथ संबंधित अपराधों के लिए फांसी दी है.

लेकिन उनके समर्थकों का कहना है कि सऊदी राज परिवार के ख़िलाफ़ शांतीपूर्ण प्रदर्शनों के लिए उनका 'क़त्ल' किया गया है.

सुन्नी बहुल सऊदी अरब के प्रतिद्वंदी शिया बहुल ईरान ने अल निम्र को सज़ा-ए-मौत दिए जाने की अधिकारिक निंदा भी की है.

सऊदी अरब के शिया बहुल पूर्वी प्रांत, बहरीन और कई अन्य देशों में भी प्रदर्शन हुए हैं.

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शेख निम्र अल निम्र को मौत की सज़ा दिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए अमरीका ने कहा है कि इससे नस्लीय तनाव बढ़ने का ख़तरा पैदा हो गया है.

अमरीका ने कहा है कि ऐसे वक़्त में जब तनाव को कम करने की आपात ज़रूरत है तब इससे तनाव बढ़ने का और ज़्यादा ख़तरा पैदा हो गया है.

अमरीका ने सऊदी अरब से शांतीपूर्ण विरोध प्रदर्शनों की अनुमति देने का आह्वान किया है और सभी समुदायों के नेताओं के साथ मिलकर तनाव कम करने के लिए कहा है.

शेख निम्र सऊदी अरब में 2011 में हुए लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के प्रखर समर्थक थे.

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शनिवार को सऊदी अरब में 47 लोगों को चरमपंथ से जुड़े अपराधों में मौत की सज़ा दी गई है. अल निम्र भी इनमें शामिल थे.

अल निम्र की मौत की निंदा करते हुए ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सऊदी अरब को इसकी क़ीमत चुकानी होगी.

प्रभावशाली शिया धर्मगुरु अयातुल्ला अहमद ख़ातमी ने इसे ऐसा 'अपराध' क़रार दिया, जिससे सऊदी अरब के शाही परिवार का ख़ात्मा हो जाएगा.

बीबीसी के मध्यपूर्व संपादक एलन जॉन्सटन के मुताबिक़ अल निम्र के एक प्रमुख और प्रखर शिया धर्मगुरू थे जो सऊदी अरब की भेदभाव और अलगाव महसूस करने वाले शिया अल्पसंख्यक समुदाय की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करते थे.

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जॉन्सटन के मुताबिक़ ईरान मध्य पूर्व में अहम शिया ताकत है और क्षेत्र में शिया अल्पसंख्यकों के मुद्दों में हस्तक्षेप रखता है.

ऐसे में अल निम्र को सज़ा-ए-मौत दिए जाने के बाद सऊदी अरब और ईरान का आमने-सामने होना अपरिहार्य है.

वहीं लेबनान के शिया उग्रपंथी समूह हिज़बुल्ला ने निम्र को सज़ा दिए जाने को 'क़त्ल' कहा है.

शिया बहुल लेकिन सुन्नी शासन वाले पड़ोसी देश बहरीन में पुलिस और शिया प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुई हैं.

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इराक़ में प्रभावशाली शिया धर्मगुरू मुक़तदा अल सद्र ने विरोध प्रदर्शनों का आह्वान किया है.

यमन, पाकिस्तान और भारत प्रशासित कश्मीर में भी सऊदी अरब के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए हैं.

सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत के क़ातिफ़ शहर में प्रदर्शनों पर पाबंदी के बावजूद भी प्रदर्शन हुआ है.

सऊदी अरब की राजशाही की आलोचना करने के बाद साल 2012 में निम्र अल-निम्र को हिरासत में ले लिया गया था.

उनके समर्थकों का दावा है कि निम्र अल निम्र ने कभी भी हिंसा की वकालत नहीं की.

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सऊदी अरब में अल्पसंखयक शिया समुदाय ने निम्र की गिरफ़्तारी का विरोध किया था.

निम्र अल निम्र के भाई ने कहा है कि उनका परिवार मौत की सज़ा दिए जाने की ख़बर से सदमे में है.

उन्होंने उम्मीद जताई कि लोगों की प्रतिक्रिया शांतिपूर्ण होगी.

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