नेताओं के आंसू...दर्द या इमोशनल अत्याचार

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भारत और दुनिया के दूसरे देशों के कई नेता सार्वजनिक रूप से अपनी भावनाओं पर क़ाबू रख पाने में नाकाम नज़र आए हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमतौर पर सख़्त प्रशासक माना जाता है और कई लोग तो उन्हें बेदर्द, बेदिल भी कहते हैं, पर अपनी माँ के प्रति श्रद्धा और सम्मान वह कई मौक़ों पर ज़ाहिर करते रहे हैं.

पिछले साल सितंबर में फ़ेसबुक कार्यालय के दौरे पर मोदी अपनी मां को याद करते हुए भावुक हो गए थे. उनका गला भर्रा गया और आंखें नम हो उठीं.

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इससे पहले संसद में अपने कार्यकाल के पहले दिन भी नरेंद्र मोदी अपने नेता अटलबिहारी वाजपेयी को याद करके भावुक हो उठे थे. इसके अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को भी कई बार भावुक होते देखा गया है.

पूर्व पत्रकार और आम आदमी पार्टी नेता आशुतोष का कैमरे के सामने फूट-फूटकर रोना कम ही लोग भूले होंगे. इससे पहले कैमरे के आगे ऐसे ही फूट-फूट कर रोने वाले नेता थे पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी.

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भाजपा के फ़ायरब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ अपनी गिरफ़्तारी के समय पुलिस के दुर्व्यवहार का ज़िक्र करते हुए संसद में ही रो पड़े थे.

बहरहाल, सार्वजनिक रूप से अपनी भावनाओं पर क़ाबू रख पाने में नाकाम नज़र आने वालों में प्रमुख हैं अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का.

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अमरीका में बंदूक़ ख़रीद पर नए प्रतिबंध लागू करने की घोषणा करते हुए जब उन्होंने 2012 में सैंडी हुक प्राइमरी स्कूल में गोलीबारी को याद किया, तो उनके आंसू छलक पड़े थे.

हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ, जब इस हादसे को लेकर सार्वजनिक रूप से उनके आंसू निकले थे. इस हादसे में 20 बच्चे और छह वयस्क मारे गए थे.

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ब्राज़ील के पूर्व राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डि सिल्वा अक्सर भावुक हो उठते हैं. 2009 में जब रियो दि जेनेरो को 2016 ओलंपिक की मेज़बानी मिलने का ऐलान हुआ, तो वे अपनी भावनाओं पर क़ाबू नहीं रख सके और रो उठे.

हालांकि इससे उनकी छवि को कोई नुक़सान नहीं हुआ. अपने कार्यकाल के दौरान वे देश के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति बने.

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पूर्व अफ़गान राष्ट्रपति हामिद करज़ई दुनिया भर में तब सुर्खियों में रहे, जब सितंबर 2010 में काबुल में एक हाईस्कूल में भाषण के दौरान अफ़ग़ानिस्तान के हालत पर बात करते हुए वे रो पड़े.

जब उन्होंने कहा कि उन्हें डर है कि इसकी वजह से कहीं उनके बेटे को देश से बाहर न जाना पड़े तो उनके आंसू निकल गए.

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जुलाई 2014 में जब पत्रकारों ने एक जापानी नेता से उनके ख़र्चों के बारे में सवाल किए तो वे सुबकने और रोने लगे. इसका वीडियो वायरल हो गया.

रीयुतारो नोनोमुरा से जब इन आरोपों का जवाब देने को कहा गया कि उन्होंने सरकारी पैसे का निजी यात्राओं के लिए इस्तेमाल किया है, तो उनके आंसू निकल पड़े.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ये यात्राएं काम के सिलसिले में थीं. बाद में उन्होंने इस मुद्दे पर इस्तीफ़ा दे दिया.

मार्च 2012 में ये ख़बर सुनने के बाद कि उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है, मास्को के मानेझान्या चौक पर समर्थकों को संबोधित करते हुए व्लादिमिर पुतिन की आंखें गीली नज़र आई थीं.

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ये आंसू आमतौर पुतिन की सख़्त छवि के विपरीत थे. लेकिन एक प्रवक्ता ने कहा कि पुतिन की आंखों से पानी भावनाओं की वजह से नहीं बल्कि ठंडे मौसम और बर्फ़ीली हवाओं की वजह से निकल रहा था.

साल 2008 में अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान न्यू हैंपशायर में हिलेरी क्लिंटन की आंखों से तब आंसू निकल पड़े जब भीड़ में से किसी ने पूछा, "आप ये कैसे कर लेती हैं?"

उनका गला रुंध गया और थोड़ा संभलकर उन्होंने उसका जवाब दिया.

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बाद में उन्होंने कहा, "अगर मेरे अंदर किसी तरह की भावनाएं नहीं होतीं, तो चिंता की बात थी."

हिलेरी ने डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति प्रत्याशी बनने के लिए 2008 में प्रयास किया था लेकिन वह बराक ओबामा से हार गई थीं.

ब्रिटेन की पहली महिला प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने 28 नवंबर 1990 को डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर आंसू भरा विदाई भाषण दिया था.

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ब्रिटेन की लौह महिला कही जाने वाली थैचर की पार्टी ने उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया, तो वह पद से हट गई थीं.

जब वे 10 डाउनिंग स्ट्रीट से आखिरी बार अपनी गाड़ी में निकलीं तो उनकी आंखों में आंसू देखे गए थे.

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