बंदर की 'सेल्फ़ी' पर कॉपीराइट किसका?

बंदर

एक बंदर की सेल्फी को लेकर मचे क़ानूनी घमासान के बीच एक अमरीका अदालत ने कहा है कि कॉपीराइट क़ानून जानवरों पर लागू नहीं हो सकता.

दरअसल यह सेल्फ़ी है एक इंडोनेशियाई बंदर की, जो उसने ब्रितानी नेचर फ़ोटोग्राफ़र डेविड स्लैटर के कैमरे का बटन दबाकर ली थी. बंदर की यह सेल्फ़ी वायरल हो गई थी.

अमरीका के सैन फ्रांस्सिको की एक अदालत में मुक़दमा दायर किया है पशुओं के अधिकारों के लिए काम करने वाले ग़ैर सरकारी संगठन 'पेटा' ने.

उसने इस मुक़दमे में इंडोनेशियाई बंदर के अलावा ब्रितानी नेचर फ़ोटोग्राफ़र डेविड स्लैटर को पक्षकार बनाया है.

पेटा का कहना है कि बंदर की इस तस्वीर से होने वाली आय बंदर को ही मिलनी चाहिए.

डेविड स्लैटर ने बीबीसी से कहा, "2011 में जब यह कहानी सामने आई तभी से मैं क़ानूनी लड़ाई लड़ रहा हूं. विकिपीडिया और अन्य संगठनों का कहना है कि चूंकि कैमरे का बटन बंदर ने दबाया, इसलिए मेरा इस तस्वीर पर कोई कॉपीराइट नहीं है. जबकि मेरा इस तस्वीर पर अधिकार है."

उन्होंने कहा कि इस तस्वीर को बंदर की सेल्फी कहा जा रहा है. लेकिन सेल्फी टर्म 2011 में सामने आया जबकि यह तस्वीर उससे पहले की है.

दूसरी बात यह है कि विकीपीडिया का कहना है कि इस तस्वीर को बंदर ने कैमरे वाले मोबाइल फ़ोन का बटन दबाकर लिया था, जबकि सच्चाई यह है कि यह तस्वीर एक बड़े कैमरे को ट्राईपैड पर लगाकर ली गई थी.

स्लैटर बताते हैं कि काफी क़रीब से ली गई इस तस्वीर को लेने के लिए काफी तैयारी करनी पड़ी थी. इसके लिए वाइड एंगल लेंस का प्रयोग किया गया और कई ट्राईपैड पर कैमरे लगाए गए. बंदर ने केवल बटन ही दबाया था.

डेविड स्लैटर ने बताया कि इस तस्वीर की क़ानूनी लड़ाई पर उन्हें बहुत अधिक पैसा खर्च करना पड़ा. उन्होंने बताया कि 2011 में उन्हें अच्छी आय हुई थी. जिसका अधिकांस हिस्सा इस क़ानूनी लड़ाई पर खर्च हो गया. विकीपीडिया और अन्य ने बंदर की इस तस्वीर का मुफ़्त में प्रयोग किया. इससे भी मुझए काफी घाटा उठाना पड़ा. वो कहते हैं कि मैं अभी इसका हिसाब नहीं लगाया है कि इस लड़ाई पर कितना खर्च हुआ.

स्लैटर कहते हैं कि इस कानूनी लड़ाई में उन्हें बहुत अधिक मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा.

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