पठानकोटः कितने आदमी थे... 6 या 4?

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पाकिस्तान से चल रहे चरमपंथी समूह जैश-ए-मोहम्मद के नेता मौलाना मसूद अज़हर ने पठानकोट पर हमला करने वाले 'चार' चरमपंथियों को श्रद्धांजलि दी है.

भारत में हुए कई हमलों की ज़िम्मेदारी ले चुके इस संगठन के नेता ने पठानकोट हमले को 'करामात' कहा है.

भारत के कुछ सुरक्षा अधिकारियों ने हमले के पीछे जैश-ए-मोहम्मद के होने के संकेत दिए थे लेकिन बाद में पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से संचालित विद्रोही गुट यूनाइटेड जेहाद काउंसिल ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली थी.

पाकिस्तान के मीडिया विश्लेषक जेहाद काउंसिल के दावों पर शक ज़ाहिर करते हुए कहते हैं कि कई सालों से चरमपंथी गतिविधियों में जेहाद काउंसिल की भूमिका शक में रही हैं. ख़ासकर परवेज़ मुशर्रफ़ के दौर में सीमापार हमलों में आई कमी के बाद से.

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मौलाना मसूद अज़हर ने हमलों की ज़िम्मेदारी तो नहीं ली लेकिन उनकी तारीफ़ ऐसी ही की जैसी कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद के हमलों में शामिल रहे चरमपंथियों की वो करते रहे हैं.

अज़हर ने हमलावरों को अल्लाह के मुजाहिद क़रार देते हुए कहा कि उन्होंने अल्लाह की ख़ुशी के लिए अपनी जान दे दी और बदला लेने और 'धरती को पाक' करने के लिए भारत के सबसे सुरक्षित एयरबेस में दाख़िल हो गए.

साप्ताहिक पत्रिका अल-क़लम में मौलाना अज़हर ने लिखा, "अल्लाह ने हमें एक करिश्मा दिखाया है. हमारे दौर के मुजाहिदों का करिश्मा, एक करिश्मा जिसने हमारे दिलों को सुकून दिया और हमारे विश्वास को मज़बूत किया." इस लेख का ऑडियो संस्करण मौलाना अज़हर की आवाज़ में पत्रिका की वेबसाइट पर मौजूद है.

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Image caption भारतीय सुरक्षा बल 72 घंटों तक पठानकोट में चरमपंथियों से जूझते रहे.

उन्होंने लिखा, "चार मुजाहिदों ने जुमे के बाद पठानकोट एयरबेस पर हमला किया, सुबह के वक़्त क़रीब तीन बजे, वो वक़्त जब ज़मीन आसमान के क़रीब होती है. जब दुआ और आंसू अल्लाह के घर के सबसे ऊंचे मुक़ाम को छूते हैं."

मौलाना अज़हर का हमलावरों की संख्या चार बताना भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के उस दावे से मेल नहीं खाता जिसमें हमलावरों की तादाद छह बताई गई थी.

मसूद अज़हर ने हाल के दिनों में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाक़ात पर चुटकी भी ली.

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Image caption पठानकोट हमलों के ख़िलाफ़ भारत में प्रदर्शन भी हुए हैं.

उन्होंने कहा, "मेरी समझ में नहीं आता कि पाकिस्तान के शासक भारतीय आरोपों के आगे झुक क्यों जाते हैं, वे इतने क्षमाप्रार्थी क्यों रहते हैं? भारत ने पूर्वी पाकिस्तान को तोड़ दिया, भारत ने बलूचिस्तान को हमारे लिए आग का दरिया बना दिया, कराची को मुस्लिमों की क़त्लगाह बना दिया. हमारा प्यारा कश्मीर भारत की वजह से ख़ून से सना है, भारत की वजह से ही बाबरी मस्जिद समेत सैंकड़ों मस्जिदें वीरान पड़ी हैं. उसने कभी हमारे अस्तित्व को स्वीकार ही नहीं किया है. फिर ऐसे दुश्मन के दबाव में आना कैसी समझदारी या आत्मसम्मान है."

मौलाना मसूद अज़हर के लेख में कश्मीर विवाद और अफ़ज़ल गुरू का स्पष्ट उल्लेख है. अफ़ज़ल गुरू को 2002 में संसद पर हुए हमलों के लिए फाँसी दे दी गई थी.

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Image caption प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमलों के बाद पठानकोट का दौरा किया.

अज़हर ने लिखा, "कुछ दिनों पहले तक भारतीय सैनिक कश्मीर के निहत्थे मुसलमानों को मार रहे थे लेकिन 2 जनवरी को वो अपने बहादुर सैनिकों की लाशें घसीट रहे थे."

अज़हर ने लिखा, "पहले ऐलान किया गया कि छह मुजाहिदीन थे और सब मार दिए. फिर कहा गया कि एक और है और वो लड़ रहा है. फिर कहा कि एक नहीं दो मुजाहिद ज़िंदा हैं और लड़ रहे हैं. अगर ये अल्लाह की मदद नहीं है तो क्या है? अगर ये ज़िंदा करामात नहीं है तो और क्या है. अगर ये जेहाद का सच नहीं है तो क्या है. अगर ये मुहम्मद अफ़ज़ल गुरू का जेहाद नहीं है तो और क्या है?"

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