'वार्ता से पहले तालिबान में मतभेद न हो'

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Image caption अफ़ग़ानिस्तान से विदेशी बल चले जाने की सूरत में तालिबान के फिर से ताक़तवर होने का अंदेशा है.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अज़ीज़ ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति वार्ता बिना शर्त हो और विश्वास बहाली के लिए क़दम उठाए जाने चाहिए.

पाकिस्तान के इस्लामाबाद में सोमवार से अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, चीन और अमरीका के प्रतिनिधियों की समिति अफ़ग़ानिस्तान तालिबान से शांति वार्ता के लिए माहौल बनाने के उद्देश्य से चर्चा कर रही है.

इस दौरान सरताज अज़ीज़ ने कहा कि शांति वार्ता की शुरुआत के लिए किसी भी तरह की शर्त न रखी जाए.

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Image caption अफ़ग़ानिस्तानी सैन्य बल कई इलाक़ों में तालिबान लड़ाकों का सामना कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि सभी तालिबान गुटों को शांति वार्ता की पेशकश और तालिबान गुटों की ओर से इस पेशकश का जवाब मिलने से पहले सैन्य कार्रवाइयों की धमकी देना सही क़दम नहीं होगा.

उन्होंने कहा, "शांति वार्ता के लिए तैयार गुटों और वो गुट जो तैयार नहीं हैं के बारे में फ़र्क़ करने और वार्ता के लिए तैयार न होने वाले गुटों से कैसे निपटा जाए, इस बारे में फ़ैसला तब किया जाए जब शांति वार्ता की तमाम कोशिशें आज़माई जा चुकी हों."

सरताज अज़ीज़ के मुताबिक़ इस्लामाबाद में चल रही वार्ता में अफ़ग़ानिस्तान तालिबान के साथ शांति वार्ता का रोड मैप तैयार किया जाएगा.

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बीते महीने पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान तालिबान के साथ शांति वार्ता फिर से शुरू करने पर राज़ी हुए थे.

अफ़ग़ानिस्तान और तालिबान के बीच पाकिस्तान के पर्यटन शहर मरी में बीते साल वार्ता हो रही थी.

लेकिन तालिबान के नेता मुल्ला उमर की मौत की ख़बर सामने आने के बाद ये शांति वार्ता रुक गई थी.

शांति वार्ता रुक जाने पर पाकिस्तान सेना ने कहा था कि काबुल से जानकारी लीक होने से ये वार्ता रुक गई.

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