इनका सपना चंद्रमा पर गांव बसाने का है

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प्रोफ़ेसर जोहान डीट्रिख़ वर्नर 4.4 अरब यूरो के बजट वाली यूरोपीय स्पेस एजेंसी के महानिदेशक हैं.

यूरोप में निगरानी, मौसम, संचार, सेटेलाइटों की उड़ान, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के वैज्ञानिकों, मंगल, बुध और बृहस्पति के अभियान, इन सभी कामों की ज़िम्मेदारी उनकी है.

जब मैंने उनसे यूरोपीय स्पेस एजेंसी को लेकर उनकी योजनाओं के बारे में पूछा, तो मुझे उम्मीद नहीं थी कि वो ऐसा अप्रत्याशित जवाब देंगे.

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उन्होंने मुझे चौंकाते हुए कहा, "हम अंतरिक्ष में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से आगे की योजना पर काम कर रहे हैं. हम ने चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से पर एक गांव बनाने का प्रस्ताव रखा है."

कुछ ऐसा ही सपना अमरीकी स्पेस एजेंसी नासा ने 1960 के दशक से देखना शुरू किया था, लेकिन बाद में राजनीतिक तौर पर साथ नहीं मिलने से नासा ने अपने इस विचार को छोड़ दिया.

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वर्नर कहते हैं, "चंद्रमा पर गांव का मतलब ये नहीं है कि कुछ घर, चर्च और टाउन हाल बनाए जाएंगे. यह गांव ऐसा होगा जिसमें सारी दुनिया की मदद से रोबोटिक और अंतरिक्षीय मिशन को बढ़ाया जाएगा और संचार के क्षेत्र में काम कर रहे सेटेलाइट की मदद से अलग-अलग तरह के प्रयोग किए जाएँगे. "

उनका कहना है, "चंद्रमा का दूरस्थ हिस्सा काफी दिलचस्प है. वहां टेलीस्कोप लगाकर हम अंतरिक्ष में दूर तक की जानकारियां पा सकते हैं. अमरीकी जल्दी ही मंगल तक जाने की सोच रहे हैं. हम ऐसा कैसे कर पाएंगे? मंगल पर जाने से पहले हमें वही प्रयोग चंद्रमा पर करने चाहिए."

उदाहरण के लिए वर्नर बताते हैं कि नासा मंगल पर एक विशालकाय 3डी प्रिंटर वाला बेस बनाना चाहता है, यूरोपीय एजेंसी इसे चांद पर आज़मा सकती है.

वर्नर चंद्रमा पर अपने गांव की कल्पना में रूसी और चीनी अंतरिक्ष अभियान को भी शामिल कर सकते हैं.

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वर्नर कहते हैं, "हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग करना होगा. बिना रोकटोक के, जितने देश इस अभियान से जुड़ सकें...दुनिया के कई देशों के बीच आपसी समस्या है लेकिन अंतरिक्ष हमें एक साथ ला सकता है."

वर्नर आगे कहते हैं, "किसी भी देश को अलग रखना, सही तरीका नहीं है. बेहतर हल तो यह है कि पृथ्वी पर मानव समुदाय को एक साथ लाने के लिए अंतरिक्ष के प्रयोग में एक दूसरे का साथ देना चाहिए."

अमरीका ने चीनी अंतरिक्ष कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार किया था, जिसकी वर्नर ने भी आलोचना की है.

अंतरिक्ष अनुसंधान पर होने वाले खर्च की भी काफी आलोचना होती रही है.

इस आलोचना को ख़ारिज करते हुए वर्नर ने कहा, "अनुसंधान और उसके व्यावहारिक प्रयोग के बीच की दीवार नहीं होती. ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन का मामला लीजिए जिसे आज हर कोई जान रहा है. इसकी जांच में सैटेलाइट इस्तेमाल किए जा रहे हैं. लेकिन इसकी खोज पृथ्वी पर नहीं हुई थी, बल्कि यह बुध अभियान के दौरान मालूम पड़ा था."

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वैसे अभी तक चंद्रमा पर गांव विकसित करने का विचार केवल विचार भर ही है.

इसको लेकर किसी ने कोई प्रस्ताव नहीं दिया है. कोई देश या फिर किसी अंतरिक्ष एजेंसी ने इसके लिए पैसे खर्च करने की बात नहीं की है और ना ही किसी ने इस विचार पर आगे काम करने के लिए मंजूरी दी है.

लेकिन इससे एक बात जाहिर है कि अंतरिक्ष अनुसंधान के केंद्र में चंद्रमा एक बार फिर लौट रहा है. वर्नर कहते हैं, "मैं बहुत ख़ुश होऊंगा अगर कोई इससे बेहतर आइडिया देता है."

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.

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