आप्रवासियों पर ओबामा की योजना को चुनौती

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अमरीकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वो राष्ट्रपति बराक ओबामा की अहम आप्रवास सुधार योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करेगा.

इस योजना के तहत अमरीका में ग़ैर क़ानूनी रूप से रह रहे 50 लाख लोगों पर लटक रही प्रत्यर्पण की तलवार हट जाएगी.

लेकिन टेक्सस राज्य के नेतृत्व में अमरीका के 26 राज्यों ने योजना को निचली अदालतों में चुनौती दी और उन्हें इसमें कामयाबी भी मिली.

अब अमरीकी सुप्रीम कोर्ट की ओर से गर्मियों तक फ़ैसला आने की उम्मीद है. उस वक़्त अमरीका में चुनाव प्रचार ज़ोरों पर होगा.

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ब्रैंडी हॉफिन ने कहा, "हमें विश्वास है कि नीतियों को क़ानूनी मान्यता मिलेगी."

राष्ट्रपति ओबामा ने नवंबर 2014 में इस योजना का एलान किया था जिसे 'डेफर्ड एक्शन फॉर पेरेंट्स ऑफ़ अमेरिकंस एंड लॉफुल पर्मानेंट रेजिडेंट्स' (डीएपीए) के नाम से जाना जाता है.

ओबामा ने अमरीकी कांग्रेस की अनदेखी करते हुए इस योजना को लेकर अपनी राष्ट्रपति वाली शक्तियों को इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस ने कुछ नहीं किया है और इसीलिए उन्हें ये कदम उठाना पड़ा है.

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लेकिन योजना की घोषणा के बाद ही इसका विरोध शुरू हो गया था. पिछले साल फरवरी में टेक्सस की एक संघीय अदालत ने इस योजना पर अमल ना करने का आदेश दिया.

ओबामा प्रशासन ने इस मुद्दे पर एक अपील दाख़िल की लेकिन नवंबर में आया फैसला उनके पक्ष में नहीं रहा.

ओबामा प्रशासन का कहना है कि अगर अदालत ने इस योजना को हरी झंडी दिखा दी तो सरकार इस योजना को जल्द से जल्द शुरू करेगी ताकि नए राष्ट्रपति के कार्यभार संभालने से पहले लोग अपना पंजीकरण कराना शुरू कर दें.

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