अब रोबोट से भी बचाने पड़ेंगे राज़ !

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पिछले साल फ़रवरी में एक दक्षिण कोरियाई महिला अपने घर के फ़र्श पर सो रही थी जब रोबोट वैक्यूम क्लीनर ने उसके बाल निगल लिए.

उसे इस हालत में तत्काल मदद के लिए फ़ोन करना पड़ा. ये उस डरावने भविष्य की तरह लगता है जिसके बारे में प्रोफ़ेसर स्टीफ़न हॉकिन्स ने हमें चेतावनी दी थी.

उन्होंने चेताया था कि हम ऐसे भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं जहां 'इंटेलीजेंट मशीनें मानव सभ्यता के अंत की इबारत लिखेंगी.'

लेकिन ये घटना कम से कम रोबोट को अपने घर में रखने के अनपेक्षित ख़तरों के बारे में तो ज़रूर बताती है.

ये पूरी तरह से संभव है कि हम सबसे छिपा कर रखे गए अपने सिक्रेट्स को रोबोट के सामने खोल दें क्योंकि इनके 'क्यूट चेहरे' और 24 घंटे इर्द-गिर्द रहने से हम इन्हें परिवार के सदस्य जैसा मानने लगेंगे.

ऐसे बहुत से उदाहरण हैं जब इंटेलीजेंट मशीनों ने गड़बड़ की है. लेकिन अक्सर ये शारीरिक ख़तरा बनने के बजाय धोखाधड़ी के मामले रहे हैं.

अपराधियों के बनाए या इस्तेमाल किए जाने वाले मेलेवलेन्ट बॉट्स (दुष्ट रोबोट) अब सोशल मीडिया और अन्य जगहों पर बड़ी संख्या में पाए जाते हैं.

उदाहरण के लिए डेटिंड वेबसाइट टिंडर में रोबोट्स बार-बार घुस जाते हैं और ख़ुद को इंसान बताकर यूज़र्स को अपने वेबकैम इस्तेमाल करने या अपने क्रेडिट कार्ड की जानकारी बताने के लिए फ़ुसलाते हैं. इसलिए यह ध्यान में रखना पड़ेगा कि विश्वास न करने योग्य रोबोट जल्द ही असली दुनिया का हिस्सा बन सकते हैं.

ऐसे उदाहरण बढ़ते जा रहे हैं कि इंसान अपने सबसे बड़े रहस्य इंसानी शक्ल वाले रोबोट्स को बताने में नरम पड़ जाते हैं - ख़ासकर बच्चे. ऐसे रोबोट्स की शक्ल कितनी ही प्यारी हो, उनके पीछे शोषण करने वाला कोड हो सकता है.

एक बार आप किसी रोबोट को अपने घर ले आए तो आपको अपनी उम्मीदों को नियंत्रण में रखना होगा. फ़िल्मों में और मार्केटिंग के ज़रिए भले ही हमें ये बताया गया हो कि अपने रोबोटिक साथी के साथ आप दोस्त की तरह बर्ताव कर सकते हैं लेकिन जिस तरह की तस्वीर बनाई गई है वैसा 'सामाजिक प्राणी' बनने में रोबोट को वक़्त लगेगा.

उम्मीदों और वास्तविकता के बीच खाई को देखते हुए 'जादूगर जैसे' फ़र्ज़ी दावों से बचने की ज़रूरत है. ऐसे मामलों में यूज़र समझता है कि रोबोट ख़ुद सभी हरकतें कर रहा है जबकि वास्तव में इसके कई कामों को कोई इंसान रिमोट के ज़रिए ऑपरेट कर रहा होता है.

इसके व्यवहार का सही अनुमान न लगा पाने की स्थिति में तब गंभीर समस्या पैदा हो जाती है जब उपभोक्ता एक निर्जीव मशीन के साथ सहज महसूस करते हैं.

वो इतना सहज महसूस करते हैं कि उसके सामने अपनी गुप्त सूचना का इस्तेमाल करने लगते हैं. ऐसा वो शायद कभी न करते यदि उन्हें पता होता कि कोई इंसान भी इससे जुड़ा हुआ है.

उदाहरण के लिए 'अदृश्य बॉयफ्रेंड' नाम की सेवा को लें. एक मासिक शुल्क देकर एक नकली प्रेमी रोमांटिक टेक्स्ट और वॉयस मेल संदेश आपके फ़ोन पर भेजता है. हालांकि शुरुआत में कंपनी की कोशिश थी कि वह नकली प्रेमी को पूरी तरह स्वचालित (मशीनी) बनाए लेकिन तकनीक इतनी परिष्कृत नहीं थी, इसलिए मनुष्य ही कामुक संदेशों का आदान-प्रदान करते हैं.

लेकिन सभी ग्राहकों को समझ नहीं आता कि यह सिस्टम काम कैसे करता है. कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर जो 'हाइप' बना है, और जिस तरह से स्वचालित रोबोट ने अनेक बार सफलतापूर्वक लोगों को यकीन दिलाया है कि वह इंसान है, इससे लोग धोखा का जाते हैं. कुछ लोग गलती से यह मान लेते हैं कि उन्हें कम्प्यूटर के लिखे संदेश मिल रहे हैं.

इसका मतलब साफ़ है- जैसे-जैसे रोबोट इंटरनेट से ज़्यादा जुड़ते जाएंगे और स्वाभाविक भाषा का जवाब देने में सक्षम होते जाएंगे, आपको यह पहचानने में विशेष रूप से सावधानी बरतनी पड़ेगी कि आप किससे बात कर रहे हैं.

हमें इस पर भी भरपूर और ठीक से सोचने की ज़रूरत है कि सूचनाएं कैसे जमा और साझा की जा रही हैं, क्योंकि जब रोबोट की बात होती है तो वह आपकी हर हरकत को रिकॉर्ड कर सकते है.

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कुछ रिकॉर्डिंग उपकरणों को भले ही मनोरंजन के लिए बनाया गया हो लेकिन उन्हें आसानी से बुरे काम या नुक़सान पहुँचाने में भी लगाया जा सकता है.

उदाहरण के लिए निक्सी को लें. पहनने वाला यह कैमरा एक पल में आपकी कलाई से उड़ सकता है और ऊंचाई से आपके आसपास की तस्वीरें लेने लगता है. यह समझने के लिए बहुत दिमाग लगाने की ज़रूरत नहीं है कि इस तकनीक का ख़ासा दुरुपयोग हो सकता है.

ज़्यादातर लोग किसी रिकॉर्डिंग उपकरण की मौजूदगी में अपने रहस्यों को बचाकर रखते हैं और सावधानी बरतते हैं. लेकिन तब क्या होगा जब हम अपने घर में रोबोट की मौजूदगी के आदी हो जाएंगे.

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अगर हमारे चारों ओर मौजूद तकनीक बातों, तस्वीरों और हरकतों को रिकॉर्ड और प्रोसेस करने लग जाए- आपके रहस्यों को छुप कर सुनने की बात तो रहने ही दीजिए- उस सूचना का क्या होगा? इसे स्टोर कहां किया जाएगा, इस तक पहुंच किसकी होगी?

अगर इंटरनेट के इतिहास को देखें तो ये ब्यौरे विज्ञापन कंपनियों के लिए तो ख़रा सोना हैं. अगर हम अपने जीवन में रोबोट्स को ज़्यादा शामिल करते हैं तो हमारे काम और बातें आसानी से आम हो सकती हैं.

तो रोबोट्स को अपने घरों, सार्वजनिक स्थानों और सामाजिक जीवन में लाने का सबसे सुरक्षित तरीका क्या है? हमें सावधानी के साथ सकारात्मक नज़रिया रखना चाहिए. ये बहुत अच्छे साथी बन सकते हैं.

इसके साथ ही यह भी ध्यान रखना होगा कि ऐसे रोबोट्स के लिए कड़ी सीमा रेखा तय की जाए.

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हम लोग ग्राहक सुरक्षा संस्थाओं की पहुंच बढ़ाने या नई रोबोट-केंद्रित नीतियां बनाने पर विचार कर सकते हैं. जैसे रेडियो में प्रगति होने के बाद अमरीका में फ़ेडरल रेडियो कमीशन बना उसी तरह रोबोटिक्स में प्रगति के बाद एक ऐसी संस्था बनाई जानी चाहिए जो इसे समाज में शामिल किए जाने के मामले को देखे.

एक ऐसी संस्था जिसके पास आप तब जा सकें जब रोबोट कोई अपराध करे, आपका क्रेडिट कार्ड चुरा ले या आपके बाल खा जाए...

(इवान सेलिंजर रॉशेस्टर इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में दर्शनशास्त्र के सहायक प्रोफ़ेसर हैं. वुडड्रॉ हार्टजॉग कम्बरलैंड स्कूल ऑफ़ लॉ में निजता, मीडिया और रोबोटिक्स कानून के विशेषज्ञ हैं. अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.)

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