बर्मा में ऐतिहासिक दिन, एनएलडी संभालेगी सत्ता

Image caption सू ची के राष्ट्रपति बनने पर अब भी रोक है

बर्मा यानी म्यांमार के लिए सोमवार एक ऐतिहासिक दिन है, जहां लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई नई संसद अपना कामकाज संभाल रही है.

म्यांमार में हाल ही में चुनाव हुए. इसमें लोकतंत्र समर्थक और नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू ची की पार्टी एनएलडी को बहुमत प्राप्त हुआ.

पिछले हफ़्ते ही म्यांमार में एक रंगारंग कार्यक्रम के साथ दशकों तक चले सैन्य शासन का समापन हुआ.

हालांकि नई संसद में भी सेना के पास एक चौथाई सीटें रहेंगी. लेकिन सेना के समर्थन वाली सरकार लोकतांत्रिक तरीके से एनएलडी को सत्ता का हस्तांतरण कर रही है.

राष्ट्रपति थेन सेन का कहना है, "आजादी के बाद ये पहला मौका है जब सरकार और चुने हुए प्रतिनिधियों के बीच सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण हो रहा है. मैं कहना चाहूंगा कि मैंने इस अहम काम को पूरा करने का वादा किया था और वो भी पूरी प्रक्रियाओं के साथ."

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वैसे मौज़ूदा क़ानून के तहत सू ची के राष्ट्रपति बनने पर रोक है क्योंकि उनके बच्चे ब्रितानी नागरिक हैं. सू ची सैन्य शासन के दौरान 15 साल तक नज़रबंद रहीं.

बीबीसी संवाददाता जोना फ़िशर के मुताबिक़, यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि सू ची और सेना के बीच इस पर कोई सहमति बन सकती है कि उन्हें राष्ट्रपति बनने दिया जाए.

संसद को जल्द ही राष्ट्रपति का चुनाव करना होगा, क्योंकि मौजूदा राष्ट्रपति थेन सेन मार्च में अपने पद से हट जाएंगे.

म्यांमार के पूर्व सैन्य शासक पहले ही सू ची को भविष्य की नेता बता चुके हैं.

बीबीसी संवाददाता ने बताया है कि अब तक म्यांमार की संसद पर सेना की पृष्ठभूमि वाले लोगों का दबदबा रहता था.

लेकिन अब क़रीब 50 सालों में पहली बार इसकी बागडोर लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सू ची की पार्टी एनएलडी के हाथों में होगी.

सैन्य शासन के दौरान एनएलडी को दुश्मन की तरह समझा गया और सू ची समेत इसके सैकड़ों नेताओं को नजरबंद रखा गया था. लेकिन अब उन्हीं में से बहुत से लोग नई संसद के सदस्य हैं.

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