'वरना गिरगिट और ओबामा की बातों में फ़र्क़ नहीं'

इमेज कॉपीरइट AP

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पिछले दिनों बाल्टीमोर में एक मस्जिद का दौरा किया, जिसकी पाकिस्तानी ही नहीं भारतीय उर्दू मीडिया में भी ख़ासी चर्चा है.

पेशावर से छपने वाले ‘मशरिक़’ ने संपादकीय लिखा है- ओबामा के मुस्लिम समुदाय के बारे में सकारात्मक ख़्याल.

अख़बार ने लिखा है कि अमरीका में पहली बार किसी मस्जिद का दौरा करने वाले ओबामा ने कहा कि मुसलमानों के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी के लिए अमरीका में कोई जगह नहीं है.

अख़बार लिखता है कि जब डॉनल्ड ट्रंप जैसे नेता अमरीका में मुसलमानों के आने पर रोक लगाने की बात कह रहे हैं, तब ओबामा ने अमरीकी मुसलमानों की तारीफ़ करते हुए कहा है कि वो निहायत ही सम्मानित और देशभक्त मुसलमानों से मिले हैं.

अख़बार लिखता है कि मुसलमानों की छवि में बेहतरी लाने की ओबामा की कोशिश से अमरीका में मुसलमानों के बारे में ग़लतफ़हमियां दूर करने में मदद मिलेगी, जिसके सकारात्मक नतीजे सामने आएंगे.

इमेज कॉपीरइट Getty

लाहौर से प्रकाशित 'एक्सप्रेस' लिखता है कि नमाज़ियों के सामने अपने भाषण में ओबामा ने माना कि इस वक़्त अमरीका में मुसलमानों को ख़ौफ़ज़दा करने की कोशिश हो रही है, जिस पर उन्होंने चिंता जताई है.

अख़बार के मुताबिक़ ओबामा ने कहा कि अमरीका में इस्लाम शुरू से ही रहा है और पुराने ज़माने में जिन लोगों को ग़ुलाम बनाकर लाया जाता था, उनमें से ज़्यादातर मुसलमान ही होते थे.

अख़बार की राय है कि जो कुछ ओबामा कह रहे हैं, वो बहुत अच्छी बात है, लेकिन उन्होंने यह काम बहुत देर से किया है.

अख़बार के मुताबिक़ ओबामा के दौर में मुस्लिम देशों के ख़िलाफ़ अमरीका की नीति पक्षपातपूर्ण रही है और अगर ओबामा प्रशासन अफ़ग़ानिस्तान, इराक़, लेबनान और सीरिया में संतुलित नीति अपनाता, तो हालात इतने ख़राब न होते.

इसी सिलसिले में नवा-ए-वक़्त ने लिखा है कि ओबामा के दौर में अमरीकी मुसमलानों पर नस्ली हमले हुए, उनका मज़ाक उड़ाया गया, इस्लाम को दहशतगर्दी के लिए ज़िम्मेदार क़रार दिया गया और ओबामा ख़ामोश रहे.

इमेज कॉपीरइट Getty

अख़बार के मुताबिक अब अपने कार्यकाल के आख़िरी दिनों में अचानक मस्जिद जाकर ओबामा मुसलमानों के ख़ैरख्वाह बन गए हैं और इस्लाम पर हमले को तमाम धर्मों पर हमला बता रहे हैं और मुसलमानों के शोषण पर अफ़सोस जता रहे हैं.

अख़बार कहता है कि अपने बाक़ी बचे कार्यकाल में ओबामा मुसलमानों को बराबरी का हक़ दिलाने वाला क़ानून बनाएं और इस्लाम को दहशतगर्दी से जोड़ने वालों की न सिर्फ़ निंदा करें बल्कि दुनिया को बताएं कि इस्लाम अमनपसंद मज़हब है.

अख़बार कहता है कि ओबामा यह करते हैं तो समझा जाएगा कि उनकी कथनी और करनी में अंतर नहीं है, वरना उनके बयानों को रंग बदलने वाले गिरगिट की तरह ही देखा जाएगा.

पाकिस्तान में पांच फ़रवरी को मनाए जाने वाले कश्मीर दिवस पर 'दुनिया' ने संपादकीय लिखा- कश्मीर समस्या का हल और विश्व समुदाय की असंवेदनशीलता.

अख़बार लिखता है कि यह एक ज़मीनी हक़ीक़त है कि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति क़ायम होने में सबसे बड़ी रुकावट यही समस्या है, जिसने परमाणु हथियारों से लैस दो पड़ोसी देशों को लगातार एक दूसरे के आमने-सामने खड़ा कर रखा है.

अख़बार लिखता है कि कश्मीर एकुजटता दिवस मनाने का मक़सद विश्व समुदाय का ध्यान इस अहम मुद्दे की तरफ़ दिलाना है ताकि इसके हल की अहमियत और ज़रूरत उजागर हो सके.

इमेज कॉपीरइट EPA
Image caption पाकिस्तान में पीआईए के हड़ताली कर्मचारियों पर बल प्रयोग की कड़ी आलोचना हुई

अख़बार ने जहां अमरीका के इस बयान का ज़िक्र किया है कि कश्मीर समस्या के हल में देरी दक्षिण एशिया में शांति के लिए ख़तरा है तो वहीं अमरीका और ब्रिटेन से पूछा है कि उन्होंने भारत को बातचीत की मेज़ तक लाने के लिए भला क्या किया है?

वहीं 'औसाफ़' ने पाकिस्तानी एयरलाइंस पीआईए के निजीकरण के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों और इससे हवाई यातायात में आ रही बाधाओं को अपने संपादकीय में उठाया है.

अख़बार लिखता है कि सरकारी संस्थाओं के घाटे को कम करना बहुत ज़रूरी है, लेकिन यह भी ज़रूरी है कि निजीकरण से पहले उन लोगों को विश्वास में लिया जाए, जो उससे जुड़े हैं.

अख़बार ने कुप्रबंधन का ज़िक्र करते हुए लिखा है कि दुनियाभर में जहां ट्रांसपोर्ट, रेल और विमान सेवाएं फ़ायदे में जा रही हैं, वहीं पाकिस्तान में स्थिति उलट है.

भारत का रुख़ करें तो बेंगलुरु में तंजानिया की एक छात्रा के साथ बदसुलूकी पर 'हिंदोस्तान एक्सप्रेस' ने लिखा है- भीड़ का वहशी चेहरा.

Image caption भारत में रह रहे कई अफ्रीकियों का कहना है कि नस्ली भेदभाव झेलना उनके लिए रोज़मर्रा की बात है.

अख़बार लिखता है कि मेहमान को भगवान कहने वाले देश में ऐसी घटना चिंताजनक है और यह सवाल भी खड़ा होता है कि हिंदुस्तान को लेकर दुनिया भर में कितना ग़लत संदेश जाएगा.

अख़बार की राय है कि दुनिया भर के लोग सस्ती शिक्षा, सस्ते इलाज और सस्ते पर्यटन के लिए भारत का रुख़ करते हैं और ऐसी घटनाएं विदेशियों के भारत आने में रोड़ा साबित हो सकती हैं.

उधर 'हमारा समाज' ने बाल्टीमोर की अमरीकी मस्जिद में राष्ट्रपति ओबामा के भाषण पर लिखा- इस्लाम की महानता का बचाव.

अख़बार के मुताबिक़ ओबामा ने इस बात को पूरी तरह ख़ारिज कर दिया कि अमरीका और दुनिया में मुसलमानों की छवि दाग़दार है या फिर उन्हें आईएस से कोई हमदर्दी है.

अख़बार लिखता है कि ओबामा के इस बयान से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों को लेकर गुमराह सोच रखने वालों के ज़ेहन साफ़ होंगे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार