पूरा सीरिया वापस लेकर रहेंगे: असद

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सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद ने कहा है कि उनकी मंशा विद्रोही फ़ौजों से पूरे देश को फिर से हासिल करने की है.

एक दुर्लभ साक्षात्कार में उन्होंने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा कि विद्रोही समूहों को हराने में स्थानीय ताक़तों के कारण कुछ देर लग सकती है.

असद का बयान तब आया है जब दुनिया की महाशक्तियों ने एक हफ़्ते में लड़ाई बंद करने पर सहमति जताई है.

संयुक्त राष्ट्र ने उम्मीद जताई है कि वह अगले 24 घंटे में सीरिया के सबसे संकट वाले इलाक़ों में सहायता देना शुरू कर देगा.

असद ने शांति वार्ता को समर्थन जताया लेकिन कहा कि "बातचीत का यह मतलब नहीं कि हम चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ना बंद कर देंगे."

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सीरिया में पिछले पांच साल से चल रही लड़ाई में क़रीब ढाई लाख लोग मारे गए हैं और 1.1 करोड़ लोग विस्थापित हुए हैं.

संघर्ष के कारण देश के कुछ शहरों में पिछले एक साल से मानवीय मदद नहीं पहुँच सकी है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक देश के 1.35 करोड़ लोगों को मदद की ज़रूरत है.

गुरुवार रात म्यूनिख में संघर्ष विराम पर सहमति के बाद दमिश्क में असद ने कहा, "सरकारी फ़ौजें सीरिया के सभी इलाक़ों पर बेहिचक पूरा क़ब्ज़ा करेंगी. कुछ इलाक़ाई ताक़तें भी मौजूद हैं, जिसका मतलब यह है कि इसमें समय लगेगा और बहुत नुक़सान होगा."

उन्होंने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की ओर से उनकी सरकार पर लगाए गए युद्ध अपराधों के आरोपों से इनकार किया.

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शांति वार्ता इस महीने जेनेवा में शुरू हुई थी और 25 फ़रवरी तक स्थगित हो गई है.

असद ने कहा कि वह इस संकट की शुरुआत से ही बातचीत और राजनीतिक हल निकालने में यक़ीन रखते रहे हैं.

उन्होंने समाचार एजेंसी से कहा कि उन्हें इस बात का ख़तरा है कि सऊदी अरब और तुर्की सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप करेंगे, जो सीरियाई विद्रोहियों की मदद कर रहे हैं.

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