भारत के बजट पर विश्व मीडिया

अरुण जेटली, जयंत सिन्हा इमेज कॉपीरइट PIB

अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भारत के बजट में काफ़ी दिलचस्पी ली और इसे प्रमुखता से कवर किया.

किसी ने इसमें आर्थिक सुधारों की कमी की बात कही तो किसी ने कहा कि यह निवेशकों के लिए सही नहीं है. मीडिया ने यह भी कहा कि आने वाले चुनावों को ध्यान में रख कर बजट तैयार किया गया है.

आइए नज़र डालते हैं कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारतीय बजट के बारे में क्या छपा है.

वॉल स्ट्रीट जर्नल

भारत के वित्तमंत्री का कहना है कि 1 अप्रैल 2017 से जनरल एंटी-अवॉयडन्स रूल (जीएएआर) लागू कर दिया जाएगा.

ऐसे हुआ तो भारत को यह हक होगा कि वह उन कर समझौतों की समीक्षा करे, जो इसे लगता है कि कर चुकाने से बचने के लिए किए गए हैं.

भारत में विदेशी संस्थागत निवेशकों से मिलने वाले पैसों का बड़ा हिस्सा मॉरीशस और सिंगापुर की कंपनियों से आता है.

स्टॉक में निवेश करने वालों को डर है कि कर विभाग के लोग उनका पीछा करेंगे. इससे निवेशकों और उद्योग जगत को निराशा हुई है.

फ़ाइनेंशियल टाइम्स

बजट में घाटा कम करने और ढांचागत सुविधाओं पर काफ़ी खर्च करने की बात कही गई है. पर नई परियोजनाओं और उलझन भरे कर उपायों को निवेशकों ने ज़्यादा भाव नहीं दिया है.

साहसिक आर्थिक सुधारों की कमी की वजह से निवेशक बजट से प्रभावित नहीं हुए. स्टॉक मार्केट गिरा और बाद में थोड़ा संभला.

ब्लूमबर्ग

अरुण जेटली किसानों, ग़रीबों और कमज़ोर तबके के लोगों की भलाई के लिए भारत को बदलना चाहते हैं. यह होना ही था. नरेंद्र मोदी नवंबर में महत्वपूर्ण चुनाव हार चुके हैं, उन्हें और नौ चुनावों का सामना करना है.

फ़ोर्ब्स

एक राजनीतिक पार्टी के रूप में कांग्रेस को बजट का विरोध करना है, यहां तो सही है. पर अर्थशास्त्र के लिहाज से उसकी बात बड़ी अजीब है. कांग्रेस का कहना है कि अर्थव्यवस्था को आगे बढाने के लिए कोई ख़ास प्रोत्साहन देने का ऐलान नहीं किया गया है.

जिस देश की अर्थव्यवस्था 7.50 फ़ीसदी की सालाना विकास दर दर्ज कर रही हो और महंगाई की दर 5 प्रतिशत हो, वहां खास आर्थिक प्रोत्साहन की बात किसी के दिमाग में नही आएगी.

रॉयटर्स

सरकार ने संकट से निपटने वाला बजट पेश किया. इसका मक़सद गांव के मतदाताओं का समर्थन फिर से हासिल करना और विकास दर को बरक़रार रखना है, और वह भी बग़ैर नए कर्ज के.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार