मुश्किल में चीन, भारत पर कितना असर?

भारतीय फ़ेक्ट्री इमेज कॉपीरइट AFP

चीन ने 2016-17 के लिए अपनी विकास दर के लक्ष्य को कम करके 6.5 से 7 प्रतिशत के बीच कर दिया है.

विश्लेषकों का कहना है कि यह चीन में मंदी का संकेत है. पिछले कुछ समय से चीन की अर्थव्यवस्था धीमेपन के दौर से गुज़र रही है और पिछले साल चीन की विकास दर 6.9 प्रतिशत तक लुढ़क गई थी.

चीन में आर्थिक धीमेपन का असर भारत समेत दुनिया के लगभग सभी देशों पर पड़ेगा.

चीन में भारी पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी के आसार बन गए हैं. कोयले के भाव इतने गिर गए हैं कि कोयला खदानों को चलाना मुश्किल हो गया है.

इमेज कॉपीरइट Reuters

करीब चार महीने पहले चीन की एक कोयला खदान में एक लाख लोगों की छंटनी कर दी गई थी.

चीन बहुत सारा कोयला ऑस्ट्रेलिया से खरीदता था. पेट्रोलियम पदार्थों का भी वो एक बड़ा ख़रीदार है. लेकिन जब घरेलू स्तर पर ही औद्योगिक गतिविधियां धीमी हों तो आयात प्रभावित होना तय है.

इसका सीधा असर ऑस्ट्रेलिया पर दिखने लगा है, जहां हालात बहुत ख़राब हैं. अफ़्रीका पर इसका असर पहले ही पड़ चुका है.

इमेज कॉपीरइट AP

चीन की बहुत सारी परियोजनाएं अफ़्रीका और पाकिस्तान समेत कई देशों में चल रही हैं, लेकिन आर्थिक सुस्ती की वजह से ख़र्च में कटौती हो सकती है और इसका असर सीधे इन देशों पर पड़ेगा.

चीन ने कहा था कि वो इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए 46 अरब डॉलर पाकिस्तान को देगा.

पिछली बार जब 2008 में मंदी आई थी तो चीनी सरकार ने 750 अरब डॉलर का प्रोत्साहन पैकेज दिया था. ये बहुत बड़ा पैकेज था, अमरीका से भी ज़्यादा.

जैसा कम्युनिस्ट सरकार का ढांचा होता है, चीन ख़ुद बेहिसाब पैसा खर्च कर मंदी से बाहर निकल आया.

आज भी चीन सरकार के पास सवा तीन खरब डॉलर विदेशी मुद्रा भंडार है और वो फिर से प्रोत्साहन पैकेज घोषित कर सकती है.

लेकिन बाज़ार को आप कैसे संभालेंगे. जितना पैसा अभी तक लगाया गया है, उसके बावजूद बजट घाटा तीन प्रतिशत पहुंच गया है.

इमेज कॉपीरइट Getty

कई विश्लेषकों ने कहा है कि अगर यह घाटा चार प्रतिशत तक चला जाए तो कहीं जाकर चीन इस मंदी से उबर सकता है.

हालांकि आर्थिक धीमेपन के बावजूद चीन ने अपने रक्षा बजट में कोई कटौती नहीं की है, और इसे बढ़ाया ही है.

चीन सरकार बीते साल के मुक़ाबले रक्षा में सात प्रतिशत अधिक ख़र्च करेगी और उसका रक्षा बजट बढ़कर 146 अरब डॉलर हो गया है.

वहीं भारत इस साल रक्षा बजट में मात्र 38 अरब डॉलर ख़र्च करेगा.

(वरिष्ठ पत्रकार एसडी गुप्ता के साथ बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय की बातचीत पर आधारित)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार