साइबर किडनैपरों ने किया फ़ोन का 'अपहरण'

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मोबाइल स्क्रीन में कुछ सही नहीं था. वो काला हो गया था. निक हार्वे ने उसे करीब से देखा. कुछ अटपटा लग रहा था. तभी उन्हें एक मैसेज दिखा.

उनके स्मार्टफ़ोन का किसी ने अपहरण कर लिया था और उनसे फिरौती मांगी जा रही थी.

उन्होंने बीबीसी रेडियो 4 पीएम प्रोग्राम में कहा, "मेरे मोबाइल को लॉक कर दिया गया है."

उन्हें कहा गया कि फोन को अनलॉक करने के लिए वाउचर कोड के ज़रिए कुछ पैसे भेजने होंगे.

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केन मेन के साथ भी कुछ ऐसा हुआ था और वो समझ सकते हैं कि निक को कैसा महसूस हुआ होगा. उनके ग्लासगो स्थित हेयर सैलून के कम्प्यूटरों में भी ऐसा ही कुछ हुआ था.

उन्होंने बताया, "वो नीला स्क्रीन था जिसमें संदेश बीचों बीच लिखा था. अगर हमें ये जानकारी वापिस चाहिए तो फिरौती देनी पड़ेगी."

ये दोनों शख़्स शिकार हुए थे रैनसमवेयर का, जो एक प्रकार का कंप्यूटर वायरस है.

ये वायरस यूज़र्स को उनके कंप्यूटर या फ़ोन से सम्पर्क तोड़ देता है और फ़ाइल वापस करने के लिए पैसे मांगता है.

"ये बिल्कुल ऐसा है, जैसे कोई आपके घर में घुस आया हो," केन ने कहा.

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केन के मुताबिक संदेश पढ़कर उन्हें डर सताने लगा कि क्या होगा अगर वो अपनी जानकारियों को वापस नहीं हासिल कर सके.

अब आप सोच रहे होंगे कि आख़िर केन और निक से कितने पैसे मांगे गए. ये रक़म शायद आपकी सोच से काफी कम होगा.

निक ने बताया, "उन्होंने मुझसे 50 डॉलर या 50 पाउंड मांगे." केन से मांगी गई रक़म थोड़ी ज़्यादा थी.

केन ने बताया, "उन्होंने मुझसे शुरू में 350 डॉलर मांगे. जब हमने मेल के ज़रिए उनसे संपर्क साधा तो इसे बढ़ाकर 1,000 पाउंड कर दिया गया."

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सॉफ्टवेयर सुरक्षा कंपनी कैस्परस्काई लैब के मुताबिक़, पीड़ितों से पैसों की उतनी ही मांग की गई जितना वो अपनी फ़ाइलों को वापस पाने के लिए देने को राज़ी हो जाएं.

सुरक्षा कंपनी से जुड़े जॉर्न्ट वैन डर वील के मुताबिक़, छोटे व्यापार के लिए, "कई बार इनके लिए फ़िरौती की रकम देना बैकअप से सस्ता पड़ता है."

निक हार्वे को कोई पैसे नहीं चुकाने पड़े. वो अपने फ़ोन को दाबारा चालू करवाने में कामयाब रहे लेकिन उनका कुछ डेटा ज़रूर नष्ट हो गया.

केन के पास पैसे देने के अलावा कोई चारा नहीं था, "मुझे अपनी जानकारियां वापस चाहिए थीं. मुझे अपना व्यापार चलाना था."

"मुझे लगता है कि मेरी जगह पर कोई भी व्यापारी होता वो भी ऐसा ही सोचता क्योंकि मेरे पास जानकारियों को वापस पाने के लिए कोई दूसरा विकल्प नहीं था."

जॉर्न्ट वैन डर विएल के मुताबिक, रैंसमवेयर आपके कंप्यूटर में वायरस वाले मेल के ज़रिए घुस सकता है.

उनकी सलाह है कि जो भी फ़ाइलें संदेहास्पद लगें उन्हें खोला न जाए.

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वील के मुताबिक़, अगर आपके इंटरनेट ब्राउज़र में लेटेस्ट "सिक्युरिटी पैचेज़" इंस्टाल ना हो तो ये मुश्किल आ सकती है.

सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ब्रिटेन में लोग ऐसे फ्रॉड का ज़्यादा शिकार हो रहे हैं.

केन मेन को फिरौती की रक़म देने का मलाल नहीं है. हालांकि इससे उनकी सारी परेशानियों का हल नहीं निकल पाया.

केन के 80 से 90 फीसदी जानकारियां नष्ट हो गईं और कमाई के लिहाज़ से 20 हज़ार पाउंड तक का नुकसान उठाना पड़ा.

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