'अमरीकी आयोग नहीं करे भारत पर टिप्पणी'

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समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अमरीकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग को वीज़ा नहीं देने के फ़ैसले पर अमरीका में भारतीय दूतावास ने सफ़ाई दी है.

अमरीका में भारतीय दूतावास के बयान में कहा गया है कि अमरीकी आयोग के पास कोई नैतिक अधिकार नहीं है कि वो भारतीय लोगों के संवैधानिक अधिकारों पर टिप्पणी करे.

इससे पहले भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय धार्मिक आज़ादी पर नज़र रखने वाले अमरीकी आयोग को वीज़ा देने से इनकार कर दिया था.

आयोग का प्रतिनिधिमंडल भारत में धार्मिक स्वतंत्रता का जायज़ा लेने और इस पर चर्चा करने के मक़सद से भारत का दौरा करने वाला था.

आयोग को अमरीकी विदेश मंत्रालय और भारत में अमरीकी दूतावास का समर्थन हासिल है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ यूएससीआईआरएफ़ के अध्यक्ष रॉबर्ट जॉर्ज ने कहा था, ''बहुलतावादी, ग़ैर सांप्रदायिक, लोकतंत्र देश होने के नाते और अमरीका के क़रीबी सहयोगी देश भारत को हमारी यात्रा को लेकर विश्वास होना चाहिए.''

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जॉर्ज ने कहा कि आयोग धार्मिक आज़ादी का उल्लंघन करने वाले पाकिस्तान, सउदी अरब, विएतनाम, चीन और म्यांमार जैसे देशों की यात्रा भी कर चुका है.

2015 में इस अमरीकी आयोग की रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में धार्मिक और सांप्रदायिक हिंसा में पिछले तीन सालों में बढ़ोतरी हुई है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ एक बहुलतावादी, गैर सांप्रादायिक और लोकतांत्रिक देश होते हुए भी अल्पसंख्यक समुदाय की रक्षा करने में भारत संघर्ष करता रहा है और उनके ख़िलाफ़ अपराध होने पर सज़ा दिलवाने में उसे सफलता नहीं मिल पाती है.

इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया था कि एनजीओ और मुस्लिम, ईसाई और सिख समुदायों के नेता ने कहा था कि 2014 के चुनाव में जिस तरह का चुनाव प्रचार हुआ उससे पूरे माहौल पर बहुत प्रभाव पड़ा.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया था कि नरेन्द्र मोदी की पार्टी भाजपा के नेताओं ने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं.

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