पाकिस्तान को एफ-16 की बिक्री का रास्ता खुला

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अमरीकी सीनेट ने पाकिस्तान को एफ़-16 लड़ाकू विमानों की बिक्री पर रोक लगाने के प्रस्ताव को नामंज़ूर कर दिया है.

सीनेट के 100 सदस्यों में से 71 ने इस प्रस्ताव के ख़िलाफ़ वोट दिया और 24 इसके हक़ में थे.

अब कांग्रेस के किसी सदस्य के पास सिर्फ़ और दो दिन बचे हैं जिसके दौरान वो इस बिक्री पर आपत्ति दर्ज कर सकते हैं.

उसके बाद ओबामा प्रशासन जिस दिन भी चाहे इस पर दस्तख़त कर सकता है. प्रशासन ने इस बिक्री के हक़ में पूरा ज़ोर लगाया था और विदेश मंत्री जॉन केरी ने भी इसके लिए कांग्रेस में दलील पेश की थी.

अमरीका में पाकिस्तान के राजदूत जलील अब्बास जिलानी ने सीनेट के इस वोट पर बयान देते हुए कहा कि ये 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ अमरीका और पाकिस्तान की साझेदारी का प्रतीक है'.

बीबीसी को दिए बयान में उन्होंने कहा, “ये अमरीका और पाकिस्तान के आपसी रिश्ते की मज़बूती को दिखाता है.”

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Image caption पाकिस्तान को एफ-16 विमान देने के हक़ में हैं जॉन केरी

बिक्री के ख़िलाफ़ प्रस्ताव लाने वाले सीनेटर रैंड पॉल ने लगभग एक घंटे चली बहस में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ काफ़ी सख़्त बयान दिए.

उन्होंने पाकिस्तान पर अमरीका के साथ दोमुंही नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वो तब तक पाकिस्तान को हथियारों की बिक्री रोकने के लिए कोशिश करते रहेंगे जब तक वो जेल में बंद डॉक्टर शकील अफ़रीदी और आसिया बीबी को रिहा नहीं कर देता.

उनका कहना है कि डॉ अफ़रीदी को ओसामा बिन लादेन को ढूंढने और मारने में अमरीका की मदद करने के आरोप में जेल में रखा गया है वहीं ईसाई महिला आसिया बीबी को ईशनिंदा के मामले में जेल में रखा गया है.

सीनेट में विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष बॉब कार्कर ने सदस्यों से इस बिक्री को रोकने के प्रस्ताव के ख़िलाफ़ वोट डालने की अपील की और कहा कि इसके रुकने से पाकिस्तान को जो शर्मिंदगी उठानी होगी उसके बाद वो इस तरह के विमान खरीदने के लिए रूस और फ्रांस का रूख करेगा.

पहले सीनेटर कॉर्कर ने जॉन केरी को एक पत्र लिखकर ये बिक्री रोकने की अपील की थी. उन्होंने ये भी कहा था कि पाकिस्तान अगर सिर्फ़ अपने पैसे से ये विमान खरीदना चाहे तो उन्हें कोई परेशानी नहीं है लेकिन अमरीकी टैक्सदाताओं का पैसा वो इस पर खर्च नहीं होने देना चाहते.

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पिछले महीने अमरीकी विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के लिए लगभग 86 करोड़ डॉलर का बजट पास किया जिसमें से 27 करोड़ फ़ौजी साजो सामान के लिए दिए गए थे.

अमरीकी रक्षा मंत्रालय की तरफ़ से जारी एक बयान के अनुसार इन आठ विमानों और उससे जुड़े अन्य उपकरणों की कीमत लगभग सत्तर करोड़ डॉलर है. तो अंदाज़ा ये लगाया जा रहा है कि अगर ये बिक्री होती है तो इसमें से 43 करोड़ डॉलर पाकिस्तान को ख़ुद खर्च करना होगा.

भारत ने भी इस बिक्री का ख़ासा विरोध किया है और दिल्ली में अमरीकी राजदूत को बुलाकर आपत्ति दर्ज कराई है.

अमरीकी रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि भारत को इस बिक्री से किसी तरह की चिंता नहीं होनी चाहिए क्योंकि प्रशासन ने क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति के आकलन के बाद ही ये फ़ैसला किया है.

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता का ये भी कहना था कि अमरीका भारत और पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को अलग-अलग रखता है.

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