मर्केल की प्रवासी नीति का टेस्ट!

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जर्मनी में क्षेत्रीय चुनाव के लिए वोटिंग जारी है. इन चुनावों को चांसलर एंगेला मर्केल की शरणार्थी नीति के लिए परीक्षा की तरह देखा जा रहा है.

मर्केल की शरणार्थी नीति की विरोधी ऑल्टर्नेटिव फ़ॉर जर्मनी पार्टी को चुनाव में बढ़त मिलने की संभावना जताई जा रही है.

मर्केल की 'खुले दरवाज़े' की नीति का जर्मनी में विरोध होता रहा है.

2015 में अफ़ग़ानिस्तान, सीरिया और इराक़ से आने वाले 10 लाख से ज़्यादा प्रवासी और शरणार्थी जर्मनी पहुँचे थे.

जानकारों के मुताबिक़ मर्केल की क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) पूर्वी जर्मनी के सैक्सॉन-अनहॉल्ट में आगे रहेगी.

अनुमान लगाया जा रहा है कि पश्चिम में बाडन-वुर्टम्बर्क में जहां फिलहाल सीडीयू सबसे बड़ी पार्टी है, वहां उसे हार का सामना करना पड़ सकता है.

राइनलैंड-पैलेटिनेट में जहां सीडीयू दूसरे नंबर पर थी, वहां इस बार कांटे की टक्कर है.

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एएफ़डी पार्टी के प्रतिनिधि जर्मनी के 16 क्षेत्रीय संसदों में से पांच में शामिल हैं. इन चुनावों में एएफ़डी 'सीमा को सुरक्षित करो' और 'शरणार्थियों से मची उथल-पुथल रोको' जैसे नारों के साथ उतरी है.

हालांकि जर्मनी के वाइस चांसलर सिग्मैर गेब्रिएल ने कहा है कि एएफ़डी को चुनाव में सफलता मिल भी जाती है, तो भी सरकार की शरणार्थी नीति में बदलाव नहीं होगा.

मर्केल की पार्टी को अगर चुनाव में सफलता नहीं मिली, तो प्रवासी संकट पर तुर्की और यूरोपीय संघ के बीच समझौते की कोशिश को लेकर जर्मनी पर दबाव बढ़ेगा.

सबसे बड़ी यूरोपीय अर्थव्यवस्था होने के नाते यूरोपीय संघ में नीतियां बनाने में जर्मनी की भूमिका महत्त्वपूर्ण रहती है.

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