एशिया प्रशांत के कई देशों में सूखे की मार

बुंदेलखंड में सूखा इमेज कॉपीरइट Ashish Dixit

एशिया प्रशांत के कई देश सूखे की मार झेल रहे हैं.

अल-नीनो के कारण केवल भारत और पाकिस्तान में ही नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देश भी सूखे की चपेट में हैं.

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक़ 2025 तक 1.8 अरब लोग पानी की कमी से जूझ रहे इलाक़ों में रहने को मजबूर होंगे.

संयुक्त राष्ट्र की तरफ़ से विश्व पानी दिवस 22 मार्च को मनाया जाता है.

एक विश्लेषण सूखा ग्रस्त देशों का.

भारत

इमेज कॉपीरइट DEVIDAS DESHPANDE

भारत में महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तर प्रदेश राज्य सूखे की मार झेल रहे हैं.

लगातार दो सूखे के कारण महाराष्ट्र सरकार ने 2016-17 का आधा बजट कृषि को देने का फ़ैसला लिया है.

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़ पानी की क़िल्लत के चलते औरंगाबाद और इलोरा में हाईवे पर बने होटलों में शौचालय की सुविधा बंद कर दी गई है.

विश्व पानी दिवस के मौक़े पर महाराष्ट्र में जलजागृति अभियान पूरे हफ़्ते चलाया जाएगा.

पानी की क़िल्लत के चलते राज्य के जल संसाधन मंत्री गिरिश महाजन ने सभी वाटर पार्कों और स्विमिंग पूल को बारिश आने तक बंद करने के निर्देश जारी किए हैं.

'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक़ मराठवाड़ा समेत राज्य के आठ ज़िलों में पानी की भारी क़िल्लत है. हालात की गंभीरता को दर्शाते हुए कहा गया है कि पिछले मार्च में 20 फ़ीसदी के मुक़ाबले मराठवाड़ा के जलाशयों में इस बार केवल पांच फ़ीसदी पानी बच गया है. यहां पानी के लिए लोग टैंकरों पर पूरी तरह से निर्भर हैं.

पीड़ित परिवारों का कहना है कि वो किसी समारोह में नहीं जाते क्योंकि घूमने-फिरने और जश्न मनाने का मतलब है ज़्यादा पानी का ख़र्च होना.

बीड ज़िले के माजलगांव स्थित किसान मानिक राव मुंडे का कहना है कि पानी की क़िल्लत 2016 में रहेगी, कम से कम जून महीने तक और अगर इस बार भी बारिश नहीं हुई तो पूरे साल सूखे की मार झेलनी पड़ेगी.

मराठवाड़ा के सभी बाज़ार लगभग बंद हैं. पांच किलो की दाल की जगह अब वो एक किलो दाल ही ख़रीदते हैं. सभी शादियों को फ़िलहाल टाला जा रहा है. सभी ख़र्चों पर रोक लगाई जा रही है. सभी ग़रीब होते जा रहे हैं और दिन ब दिन सरकारी सहायता पर निर्भर होना पड़ रहा है. सबसे ख़राब और सबसे पहला संकट पानी का है.

बॉम्बे हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के किसानों के प्रति कठोर और उदासीन रवैये की आलोचना करते हुए पूर्व विदर्भ के चार ज़िलों में स्थित (अमरावती, अकोला, यवतमाल और वशीम) 6,147 गांवों को सूखा-ग्रस्त घोषित करने के निर्देश दिए.

इस बीच ओडिशा सरकार ने आशंका जताई है कि पिछले साल हुए सूखे के कारण 2015-16 में आर्थिक विकास दर गिरेगा.

इमेज कॉपीरइट Ashish Dixit

उत्तर प्रदेश में भी हालात नाज़ुक हैं. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि छह महीनों का खाद्य तेल और अनाज बुंदेलखंड समेत प्रदेश के 50 सूखा ग्रस्त इलाक़ों के लिए दिए जाएं.

किसानों की मदद के लिए भारत सरकार ने जनवरी में फ़सल बीमा योजना लागू किया था जिसके तहत मोबाइल और उपग्रह तकनीक की सहायता से नुक़सान का जल्दी आंकलन किया जाएगा और जल्दी सभी को राहत पहुंचाई जाएगी.

इंडियास्पेंड वेबसाइट के मुताबिक नौ भारतीय राज्यों, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 2015 में सूखा घोषित किया गया.

पाकिस्तान

इमेज कॉपीरइट AFP

एक अनुमान के तहत पाकिस्तान में इस साल सिंध प्रांत के सूखा ग्रस्त थारपारकर में 200 से अधिक लोगों की मौत हो गई है. ज़्यादतर मौतें कूपोषण और पानी से जुड़ी बीमारियों के कारण हुए हैं जिससे भारी संख्या में बच्चों की मौतें हुई हैं.

पाकिस्तानी एनजीओ, पाकिस्तान इंस्टिट्यूट ऑफ़ लेबर एड्यूकेशन एंड रिसर्च (पीआईएलईआर) के मुताबिक़ 1 लाख 75 हज़ार से ज़्यादा परिवार सूखे से पीड़ित हैं.

पाकिस्तान के नेशनल कमीशन फ़ॉर ह्यूमन राइट्स और पीआईएलईआर ने सरकार पर इस मुद्दे पर उदासीन होने का इल्ज़ाम लगाया है ख़ासकर जब इस इलाक़े में 300 डॉक्टरों के पद ख़ाली हैं.

दक्षिण पूर्व एशिया

इस क्षेत्र के कई और देश जैसे वियतनाम, थाईलैंड, फ़िलीपींस, कंबोडिया, लाओस, म्यांमार और मलेशिया भी सूखे की मार झेल रहे हैं.

इमेज कॉपीरइट AFP

वियतनाम सदी के सबसे भयानक सूखे की मार झेल रहा है. देश का मेकांग डेल्टा जहां चावल की खेती होती है, सूखे की चपेट में है जिससे क़रीब दस लाख लोग प्रभावित हैं.

1926 के बाद से मेकांग नदी के पानी का स्तर सबसे नीचे जा चुका है और यही कारण है कि पानी का खारापन काफ़ी अधिक है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक़ थाईलैंड में इस साल का सूखा एक दशक में सबसे भयानक है.

थाईलैंड के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में स्थित होटलों में पानी के बचत का अभियान चलाया जा रहा है.

थाई होटल एसोसिएशन अध्यक्ष सूरापोंग तेचारूविचिट ने कहा कि उन्होंने सभी होटलों से पानी बचाने में मदद करने को कहा है. उनके मुताबिक़ पूरा देश एक साथ सूखे की मार झेलेगा.

थाई सरकार ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से सोंगक्रान फ़ेस्टिवल के दौरान पानी की बचत करने का आग्रह किया है. इस फ़ेस्टिवल में बुद्ध की प्रतिमा पर पानी डाला जाता है. सरकार ने लोगों से बाल्टी भर पानी की जगह कटोरी भर पानी डालने को कहा है.

चीन की भूमिका

इमेज कॉपीरइट AFP

चीन मेकांग नदी में पानी छोड़ रहा है जिससे कंबोडिया, लाओस, म्यांमार, थाईलैंड और वियतनाम में सूखे का प्रभाव कम हो सके.

चीनी विदेश मंत्री के प्रवक्ता लू कैंग ने कहा है कि 15 मार्च से जिंगहॉन्ग हाईड्रो पावर स्टेशन से आपातकालीन पानी सप्लाई शुरू किया गया है जो 10 अप्रैल तक जारी रहेगा.

(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की खबरें ट्विटर और फ़ेसबुक पर भी पढ़ सकते हैं. बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार