पनामा लीक्स पर पाकिस्तान में आयोग तैयार

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पनामा लीक्स में प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के बच्चों के नाम आने के बाद पाकिस्तान हुकूमत ने इसकी जांच के लिए न्यायिक आयोग बनाने का फ़ैसला किया है.

नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि आयोग की अध्यक्षता पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे.

उन्होंने कहा कि जांच के बाद फ़ैसला होगा कि वास्तविक तथ्य क्या हैं और इन आरोपों में कितना वज़न है.

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उन्होंने कहा, 'मैं घिसे-पिटे आरोप दोहराने और दिनभर तमाशा करनेवालों से कहता हूं कि वह आयोग के सामने जाएं और अपने आरोप साबित करें, नवाज शरीफ के बच्चों ने कोई गैर कानूनी काम नहीं किया है.'

उनका कहना था कि उनके पिता ने जेद्दा में स्टील की फैक्टरी लगाई थी, निर्वासन समाप्त होने के बाद उसे बेचा, जिससे मिलने वाली रक़म से 'मेरे बेटों ने कारोबार शुरू किया था.

बड़े पैमाने पर गुप्त दस्तावेजों के सामने से ये बात पता चली है कि दुनिया भर के शीर्ष अमीर और शक्तिशाली लोग अपने धन कैसे छिपाते हैं. इनमें कई देशों की प्रमुख हस्तियां और राजनेता शामिल हैं.

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कंपनी का कहना है कि वह 40 वर्षों से बेदाग़ रूप से काम कर रही है और इस पर कभी किसी गलत काम में शामिल होने का आरोप नहीं लगा.

दस्तावेजों में दुनिया के 73 वर्तमान या पूर्व राष्ट्राध्यक्षों सहित तानाशाहों का उल्लेख किया गया है, जिन पर अपने देशों की दौलत लूटने का आरोप है.

पाकिस्तान के सूचना प्रसारण मंत्री परवेज़ रशीद ने पनामा क्लिप के रिलीज़ के बाद कहा कि प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के बच्चे कोई अवैध काम नहीं कर रहे.

पनामा लीक के सामने आने के बाद राजनीतिक दल पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ के प्रमुख इमरान खान और अन्य राजनीतिक दलों की ओर से प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और उनके परिवार की आलोचना की गई थी.

'पनामा की क़ानूनी सेवा मुहैया कराने वाली और बहुत ही गोपनीय ढंग से काम करने वाली एक कंपनी मोसाक फोंसेका के एक करोड़ दस लाख गोपनीय दस्तावेज़ों को जर्मन अख़बार ज़ूटडॉयच ट्सायटूंग ने हासिल किया और उन्हें इंटरनेशनल कॉन्सोर्टियम ऑफ इन्वेस्टीगेटिव जर्नलिस्ट यानि आईसीआईजे के साथ साझा किया.

बीबीसी पैनोरामा और द गार्डियन 78 देशों के उन 107 मीडिया संस्थानों में शामिल हैं जिन्होंने इन दस्तावेज़ों का अध्ययन किया है.

बीबीसी को उस सूत्र की पहचान नहीं पता है जिसने ये दस्तावेज़ उपलब्ध कराए हैं.

आईसीआईजे के निदेशक गेरार्ड राइल का कहना है कि इन दस्तावेज़ों में मोसाक फोंसेका कंपनी की दिन-प्रतिदिन की हर गतिविधियों का ब्यौरा दर्ज है.

इन दस्तावेज़ों से पता चलता है कि मोसाक फोंसेका ने किस तरह अपने ग्राहकों के काले धन को वैध बनाने, प्रतिबंधों से बचने और कर चोरी में मदद की.

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इन दस्तावेज़ों से अरबों डॉलर की हेराफेरी करने वाले एक संदिग्ध गिरोह का भी पता चला है जिसका संबंध एक रूसी बैंक से है जिसमें राष्ट्रपति पुतिन के करीबी सहयोगी भी जुड़े हुए हैं.

आईसीआईजे की उप निदेशक मरीना वाकर ग्वेरा ने बीबीसी को बताया कि इस दस्तावेज़ों से दुनिया में टैक्स चुराने वाले पनाहगाहों के बारे में आशर्यजनक जानकारियां मिली हैं.

इन ख़बरों के बाद अमरीका, फ्रांस, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों ने कहा है कि वो पूरे ब्यौरे की पड़ताल करेंगे.

आईसीआईजे के निदेशक गेरार्ड राइल का कहना है कि मोसाक फोंसेका कंपनी के इन दस्तावेज़ों की संख्या इतनी ज़्यादा है कि दुनिया के लिए ये बहुत बड़ा झटका साबित होंगे.

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