सांपों से खेलने वाली ये जांबाज़ महिलाएं

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यह कमज़ोर दिलवालों के बस की बात नहीं है लेकिन दुनिया में कई जगहों पर सांपों को पकड़ना और उन्हें वापस जंगल में छोड़कर लोगों को सर्पदंश से बचाना एक बड़ा काम है.

मेडेसीन सैंस फ्रंटीयर्स के मुताबिक़ हर साल दुनिया भर में 50 लाख लोगों को सांप डसते हैं जिसमें से एक लाख लोग तो मारे जाते हैं और चार लाख लोग विकलांगता या किसी विकृति का शिकार हो जाते हैं.

मुंबई की डॉक्टर मधुरिता गुप्ता और ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन में रहने वाली जुलिया बेकर ने सांपों को बचाने और उन्हें वापस जंगल में भेजने के अपने अनुभवों के बारे में बीबीसी को बताया.

डॉक्टर मधुरिता गुप्ता के पिता एक वैज्ञानिक हैं और वे सांपों के बारे में शोध करते हैं. डॉक्टर मधुरिता गुप्ता सांपों के साथ ही पली-बढ़ी हैं.

उन्होंने पहली बार 15 साल की उम्र में सांप को अपने हाथों से पकड़ा था. वो अपने इस अनुभव के बारे में बताती हैं कि वो 'बहुत ठंडा' था जो कि एक अद्भुत एहसास की तरह था.

उन्होंने सांपों के बारे में और अधिक जानने के लिए वेटनरी कॉलेज में दाखिला लिया. वो और उनके पति ने मिलकर एक स्नेक कंजरवेशन ट्रस्ट की स्थापना की है जो सांपों को बचाने का काम करती है.

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वहीं दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया की जुलिया बेकर का एक चिड़ियाघर में घूमने के बाद सांपों के प्रति लगाव बढ़ गया.

उनका कहना है, "जब चिड़ियाघर के लोगों ने मेरे गले में सांप डाल दिया तो मैं फूट फूटकर रोने लगी. यह किसी के साथ प्यार में होने के एहसास जैसा था. मेरे शरीर में अद्भुत रासायनिक प्रतिक्रियाएं हो रही थीं."

वो अब ऑस्ट्रेलिया में एक टीवी प्रोग्राम स्नेक बॉस की प्रजेंटर हैं.

सांप पकड़ने के इस काम के लिए विशेष कुशलता की जरूरत पड़ती है.

डॉक्टर मधुरिता गुप्ता ने सांपों को बचाने के लिए एक विशेष तरह की बाईक रखी हुई है जिसमें उन सारे उपकरणों से लैस है जो उन्हें सांप पकड़ने में मदद करती हैं.

वो बताती हैं, “मेरे पास सांप पकड़ने के लिए स्नेक कैचिंग स्टिक, कैंची, नेट कटर और एंटी वेनम (जहररोधी) कीट रहता है. कभी-कभार बहुत बुरी परिस्थितयों में जब सांप काट लेता है तो ये एंटी वेनम मेरे काम आता है.”

हालांकि ऑस्ट्रेलिया में जुलिया बेकर अपने साथ एंटी वेनम नहीं रखती हैं. सांप काटने की स्थिति में यहां सांप काटने वाले को अस्पताल पहुंचाना पड़ता है.

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बेकर कहती हैं कि आधे सांप ऐसे होते हैं जो काटने पर अपना जहर नहीं उगलते हैं.

बेकर के मुताबिक़ अगर आपके अटारी में कोई सांप है तो कभी-कभी बेहतर यही होता है कि उसे अकेला छोड़ दीजिए.

वो कहती हैं, "मैं लोगों को सांपों को खदेड़ने से रोकने की कोशिश करती हूं क्योंकि हमें ऑस्ट्रेलिया में सांपों के साथ ही रहना है."

“हमारे अनुमान के मुताबिक़ ब्रिस्बेन में 50 फ़ीसदी लोगों के घर के अटारी पर अजगर रहता है जो कि यहां के लिए कोई समस्या की बात नहीं है क्योंकि कोई कभी भी अपने अटारी पर नहीं जाता है. ये अजगर चूहों को दूर रखते हैं.”

बेकर के मुताबिक़ ऑस्ट्रेलिया में 95 फ़ीसदी सांप काटने की घटनाएं तब होती हैं जब लोग ख़ुद से ही सांपों से निपटने की कोशिश करते हैं लेकिन हर साल सांप काटने से सिर्फ पांच लोग ही मारे जाते हैं.

वो बताती हैं कि ऑस्ट्रेलिया के बड़े क्षेत्रफल और कम जनसंख्या के कारण सांपों की कुछ प्रजातियां शायद ही कभी दिखती हैं. इसमें सांप की एक प्रजाति इनलैंड ताईपेन भी शामिल है जो कि दुनिया का सबसे जहरीला सांप है.

मधुरिता गुप्ता बताती हैं कि भारत में हर साल सांप काटने से मरने वालों की संख्या क़रीब 60,000 तक पहुंच जाती हैं जो कि एक बड़ी तदाद है.

वो कहती हैं, “मैं सोचती हूं कि यहां लोग सांप को बचाते वक्त सेल्फी लेने का ख्याल रखते हैं.”

“नई पीढ़ी सांपों को रोमांच और फेसबुक फोटो के लिए बचाने की कोशिश करती हैं और यही वो लोग हैं जो सांप काटने से मारे जाते हैं क्योंकि वे प्रशिक्षित नहीं होते हैं. ”

बेकर मानती है कि जब वो एक अजगर को जंगल में छोड़ रही थी तो उसने उन्हें लगभग अपना शिकार बना लिया था.

"कभी-कभी ऐसा होता है कि आप अधिक आत्मविश्वास में आ जाते हैं और इसी चक्कर में मैंने उसके सिर की ओर हाथ बढ़ा दिया था."

"वो मेरे हाथों में बुरी तरह से लिपट गया था और बीस मिनट तक मैं उसके चंगुल से निकल नहीं पाई थी."

तब बेकर ने अपने एक दोस्त को फोन किया जिसने उसपर पानी डालने को कहा और तब जाकर पानी डालने के बाद अजगर ने उन्हें अपने चंगुल से छोड़ा.

ख़ैर इस हादसे से उन्होंने सांपों को बचाने का काम बंद नहीं किया.

वो सांपों के बारे में कहती हैं, “यह एक बहुत खूबसूरत प्राणी है और ये दुनिया में बहुत सारे अच्छे काम भी करते हैं लेकिन लोग इस बात को मानते नहीं हैं.

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