'ज़्यादा पुश अप से हो सकता है नुकसान'

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आज ज़माना ख़ुद को फ़िट रखने का है. इसके लिए लोग तरह-तरह के नुस्खे आज़माते हैं. वर्ज़िश करते हैं. बदन को खींच-तानकर अपना वज़न घटाने की कोशिश करते हैं. क्रंचेज़ करते हैं.

मगर जो लोग ऐसा नहीं करते हैं वो अफ़सोस न करें. क्योंकि हाल में तमाम रिसर्च से ये बात सामने आई है कि उठक-बैठक, क्रंचेज़ से आपको कोई ख़ास फ़ायदा नहीं होता. बल्कि कई शोध तो ये भी दावा कर रहे हैं कि इनसे नुक़सान भी हो सकता है.

इन वर्ज़िशों से न तो आपके सिक्स पैक ऐब्स बनते हैं. न ही आपका पेट कम होता है. बल्कि पेट का घेरा कम करने के लिए अपने खान-पान में बदलाव लाना ज़रूरी है. साथ ही कुछ आम सी कसरत से भी इसमें फ़ायदा होता है.

वर्ज़िश को लेकर हाल में जो रिसर्च सामने आए हैं, उनके मुताबिक़, उठने-लेटने की कसरत से आपके बदन का लचीलापन बढ़ता है. कुत्तों में ऐसी कसरत से उनके शरीर के कुछ हिस्सों को ज़रूरी पोषक पदार्थ मिलते हैं.

अगर आप सिक्स पैक ऐब्स बनाने का इरादा रखते हैं तो महज़ सिट-अप कसरत से आपका भला नहीं होने वाला. हाल ही में अमेरिका के इलिनॉय में एक तजुर्बा किया गया. कुछ लोगों को दो हिस्सों में बांटा गया. एक ग्रुप को सिट-अप कसरत करने को कहा गया. दूसरे समूह के लोगों को किसी कसरत की सलाह नहीं दी गई. क़रीब डेढ़ महीने बाद जब दोनों ग्रुप के लोगों के पेट का माप लिया गया तो दोनों में कोई फ़र्क़ नज़र नहीं आया. कहने का मतलब ये कि जो लोग उठने-लेटने की कसरत कर रहे थे, उन्हें इससे पेट कम होने का फ़ायदा नहीं हुआ.

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बहुत से खिलाड़ी सिट-अप करते हैं ताकि उनका शरीर खेल की बुनियादी ज़रूरतों के हिसाब से ढल सके. मगर अमरीका की इंडियाना स्टेट यूनिवर्सिटी के थॉमस नेसर के रिसर्च के मुताबिक़, इससे खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ता.

कनाडा की वाटरलू यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर स्टुअर्ट मैक्गिल ने भी सिट-अप्स के बारे में एक रिसर्च की. कई सालों के उनके तजुर्बे पर भरोसा करें तो सिट-अप्स या क्रंचेज़ से आपके शरीर को नुक़सान होने का ज़्यादा डर होता है बनिस्बत किसी फ़ायदे के.

प्रोफेसर स्टुअर्ट ने सुअरों के एक झुंड पर अपना तजुर्बा आज़माया. उन्होंने उन सुअरों की रीढ़ की हड्डी की पड़ताल की जो इंसानों के सिट-अप करने जैसे अंगड़ाई लेकर अपनी रीढ़ को सीधा करती हैं. प्रोफ़ेसर स्टुअर्ट ने पाया कि इससे सुअरों की रीढ़ की हड्डी को काफ़ी नुक़सान पहुंचा था.

इस रिसर्च के लिए सुअरों को इसलिए चुना गया था क्योंकि उनकी और इंसानों की रीढ़ की हड्डियां में काफ़ी समानता है. हालांकि इस रिसर्च के विरोधियों का कहना है कि इंसान और सुअर में बहुत फ़र्क़ है. साथ ही क्रंचिंग करने वाले अक्सर बीच में ब्रेक लेते हैं.

तो, अगर आप लगातार सिट-अप्स करते हैं तो आपकी रीढ़ की हड्डी को नुक़सान होने की आशंका रहती है. हालांकि रोज़ाना पंद्रह-बीस सिट-अप करने से बहुत फ़र्क़ नहीं पड़ता. फिर भी ये कसरत करते वक़्त चोटिल होने का जोखिम तो रहता ही है.

साल 2005 में अमरीका के फोर्ट ब्रैग्स सैन्य अड्डे पर तैनात सैनिकों के बारे में रिसर्च की गई थी. इसके मुताबिक़ वहां चोटिल सैनिकों में से 56 फ़ीसदी आर्मी के फ़िज़िकल फिटनेस टेस्ट के दौरान चोटिल हुए थे, इसमें सिट-अप करते हुए लगी चोट भी शामिल थी.

वैसे कुछ लोग सिट-अप से पीठ की दिक़्कतों का ज़्यादा सामना करते हैं. हो सकता है कि हम बरसों तक रोज़ाना तीस उठने-लेटने वाली कसरत कर सकें. हो सकता है ऐसा न भी कर पाएं. असल में हमें पता ही नहीं होता कि हम किस खांचे में फ़िट बैठते हैं. अक्सर इसका सीधा संबंध हमारे जीन्स में होता है.

कनाडा, फिनलैंड और अमरीका में 1991 से ट्विन स्पाइन स्टडी हो रही है. इसमें जुड़वां लोगों के कसरत और इससे पीठ को होने वाली तकलीफ़ पर नज़र रखी जा रही है. तजुर्बा करने वालों ने पाया कि चोटिल होने की आशंका का सीधा संबंध, किसी इंसान के जीन से जुड़ा होता है.

तो सिट-अप करने से आप चोटिल हो सकते हैं. इसका डर दिखाकर इस कसरत से बहानेबाज़ी से बचा जा सकता है.

तो, क्रंचेज़ करते वक़्त आपकी पीठ चोटिल न हो इसके लिए क्या करना चाहिए. कनाडा के प्रोफ़ेसर स्टुअर्ट सलाह देते हैं कि ऐसी वर्ज़िश के वक़्त अपने हाथों को अपनी पीठ के नीचे रखना चाहिए. इससे बैलेंस बिगड़ने की सूरत में आपकी पीठ की ज़मीन से सीधी टक्कर नहीं होगी.

आप एक घुटना मोड़िए और दूसरा पैर फैला लीजिए. फिर अपने सिर और कंधों को ज़मीन से ऊपर उठाइए, इस दौरान अपना सिर इस तरह रखिए जैसे किसी चीज़ पर टिकाए हुए हों.

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न्यूज़ीलैंड की ऑकलैंड यूनिवर्सिटी में भी सिट-अप पर रिसर्च हुई है. ये तजुर्बा करने वाले ब्रेट कॉन्ट्रियास कहते हैं कि कसरत के हर सेशन में आप साठ सिट-अप कर सकते हैं. हालांकि शुरुआत पंद्रह से ही होनी चाहिए. फिर इसे आप थोड़ा-थोड़ा करके बढ़ा सकते हैं.

वो ये भी बताते हैं कि जब हम रात भर लेटे रहते हैं तो हमारी रीढ़ की हड्डी की लंबाई थोड़ी बढ़ जाती है.

ऐसे में बेहतर ये होगा कि सुबह उठते ही ये कसरत करने से बचें. यही नहीं दफ़्तर की कुर्सी से सीधे उठकर सिट-अप करना भी ठीक नहीं. अपने बदन को थोड़ा रिलैक्स करने दीजिए. फिर करिए सिट अप या क्रंचेज़ या फिर उठक-बैठक. तब आपको नुक़सान होने का डर कम होगा.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.)

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