मोदी को दावत, हमें रुकावट: पाक मीडिया

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पाकिस्तान के उर्दू अख़बारों में दक्षिण एशिया के हालात और उसे लेकर अमरीका के रवैए को लेकर सवाल उठाए गए हैं.

रोज़नामा ‘पाकिस्तान’ लिखता है कि अमरीकी कांग्रेस की तरफ़ से भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साझा सत्र को संबोधित करने की बाक़ायदा दावत दी गई है, वहीं पाकिस्तान को एफ़-16 विमानों की बिक्री में अमरीकी कांग्रेस बराबर रुकावट पैदा कर रही है.

पढ़िए: पाकिस्तान को एफ़-16 की बिक्री खटाई में पड़ी

अख़बार लिखता हैं कि राष्ट्रपति ओबामा की तरफ़ से पाकिस्तान को एफ़-16 विमान देने का भरोसा दिलाया गया है, लेकिन अमरीका सियासत का रवैया इस बारे में दुरुस्त नहीं है.

सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए अख़बार लिखता है कि आतंरिक स्थिरता क़ामय करने के लिए फ़ौज जान लड़ा रही है, लेकिन विदेशी मोर्चे पर तो विदेश मंत्रालय को ही काम करना है.

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वहीं ‘नवा-ए-वक़्त’ ने लिखा है कि अमरीका भारत को अफ़ग़ानिस्तान के ज़रिए पाकिस्तान में हस्तक्षेप करने से रोके.

अख़बार कहता है कि पाकिस्तानी सेना के अभियान हर्बे अज़्ब के कारण सारे दहशतगर्द भाग कर अफ़ग़ानिस्तान चले गए हैं और वे अफ़ग़ान सरहद से घुस कर पाकिस्तान में दहशतगर्दी करते हैं.

इन चरमपंथियों को भारत का समर्थन होने का आरोप लगाते हुए अख़बार लिखता है कि अगर अमरीका पाकिस्तान को दहशतगर्दी की आग में नहीं झौंके रखना चाहता है तो भारत को पाकिस्तान में हस्तक्षेप करने से रोके.

अख़बार के मुताबिक़ दहशतगर्दी के ख़िलाफ़ अमरीकी जंग का हिस्सा बनने के कारण ही आज पाकिस्तान दहशतगर्दों के निशाने पर है.

वहीं ‘औसाफ़’ ने लिखा है कि पाकिस्तान में भारत के कुलभूषण जाधव के बाद अब एक अफगान जासूस को गिरफ्तार किया गया है.

अख़बार लिखता है कि देश में लंबे अर्से से अफ़ग़ान शरणार्थियों की मौजूदगी ऐसे लोगों का काम आसान बना देती है और पश्तो बोलने की वजह वे आसानी से घुल मिल जाते हैं, लेकिन इस मुद्दे को अफ़ग़ान सरकार के साथ उठाए जाने की ज़रूरत है.

‘एक्सप्रेस’ लिखता है कि जहां तक अफ़ग़ानिस्तान का संबंध है तो पाकिस्तान वहां शांति क़ायम करने की हर संभव कोशिश कर रहा है लेकिन अफ़ग़ान सरकार पाकिस्तान के साथ सहयोग और साझा कोशिश करने की बजाय जिद्दी रवैया अपनाए हुए है.

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अख़बार के मुताबिक़ पिछले दिनों अफ़ग़ान संसद के साझा सत्र को संबोधित करते हुए अफ़ग़ान राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने पाकिस्तान को लेकर बहुत सख़्त लहजे में बात की.

अख़बार के मुताबिक़ सवाल ये है कि आने वाले दस साल में एशिया में होने वाली आर्थिक तरक़्क़ी में पाकिस्तान का कितना हिस्सा होगा और क्या पाकिस्तान ने ऐसी नीतियां बनाई हैं जो उसे आने वाले बरसों में एशिया की उभरती हुई आर्थिक ताक़तों के सामने खड़ा कर सके.

वहीं ‘जंग’ ने पाकिस्तान के केंद्रीय कैबिनेट में वर्ष 2016-17 के लिए बजट की बुनियादी रूपरेखा पेश किए जाने पर लिखा है कि गरीबों को राहत दी जाए.

अख़बार के मुताबिक़ ग़रीब लोग महसूस करते हैं कि प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने आम आदमी पर बोझ न डालने की हिदायत दी है, तो इसका मतलब हक़ीक़त में उन लोगों को राहत देना है, जिनके लिए जिस्म और रूह का रिश्ता बरक़रार रखना मुश्किल हो रहा है

अख़बार लिखता है कि मौजूदा सरकार अगर ग़रीबों को राहत देने में कामयाब हो गई तो जनता की नज़र में उसका मुक़ाम ऊंचा होगा और उसे इतिहास में अच्छे नाम से याद किया जाएगा.

रुख़ भारत का करें तो 'हमारा समाज' ने गुजरात में सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10 फ़ीसदी आरक्षण दिए जाने को राज्य सरकार की नई सोच बताया है.

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अख़बार कहता है कि सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक़ कुल आरक्षण 50 फ़ीसदी से ज़्यादा नहीं हो सकता है लेकिन अब गुजरात में ताज़ा फ़ैसले के बाद ये 59 फीसदी तक पहुंच गया है, अब देखना है कि सुप्रीम कोर्ट इस पर क्या कहता है.

अख़बार की राय में गुजरात सरकार ने पटेल आरक्षण आंदोलन को ठंडा करने के लिए नई चाल लगी है, लेकिन आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल इसे सिर्फ़ एक लॉलीपॉप बता रहे हैं.

उधर, 'हिंदोस्तान एक्सप्रेस' ने देश में आग लगने की बढ़ती घटनाओं पर संपादकीय लिखा है.

अखबार कहता है कि देश में एक तरफ़ सूखे की समस्या मुंह खोले खड़े है, जीव जंतु क्या कई इलाक़ों में इंसान भी पानी के लिए तरस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आग लगने की घटनाओं में हैरतअंगेज़ तौर पर इज़ाफ़ा दिख रहा है.

अख़बार के मुताबिक़ पिछले साल एक से 24 अप्रैल के दौरान आग लगने की शिकायत वाली 1439 कॉल फ़ायर ब्रिगेड के दफ़्तरों में आई थीं जबकि इस इतनी ही अवधि में 2552 कॉल दर्ज की गई हैं.

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