क्यों इंग्लैंड, यूरोप के लोगों ने फेंकी क़ीमती चीज़ें?

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इंसान अपने बुरे वक़्त के लिए पैसे और क़ीमती चीज़ें जमा करके रखता है. जहां आज भविष्य के लिए शेयर बाज़ार और बैंक में पूंजी लगाई जाती है, पहले के दौर में लोग सोना-चांदी और जवाहरात छुपाकर रखते थे.

मगर पिछले कुछ सालों में इंग्लैंड और यूरोप के कई अन्य देशों में पुराने दौर की कुछ चीज़ें मिली हैं. ये कांस्य युग की वस्तुएं हैं.

कई जगहों पर छुपाकर रखी गई ये वस्तुएं किस मक़सद से रखी गई थीं, ये सवाल इतिहास में दिलचस्पी रखने वालों को परेशान किए हुए है.

पिछले एक दशक में इंग्लैंड में कई जगहों पर कांस्य युग की क़ीमती चीज़ें जैसे भाले, तलवार, कटार, मुंदड़ी कहीं नदी किनारे, तो कहीं तालाब के अंदर गड़े मिले हैं.

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अकेले लिंकनशायर के स्टिक्सवुड में 129 ऐसी चीज़ें मिली हैं. ये 2900 से 3000 हज़ार साल तक पुरानी बताई जा रही हैं.

इन चीज़ों को टैटेरशैल होर्ड नाम दिया गया है. असल में पिछले कई सालों से ब्रिटेन में पोर्टेबल एंटीक्विटी स्कीम नाम से एक योजना चलाई जा रही है.

इसके तहत किसी को भी पुराने दौर की चीज़ें मिलती हैं तो उसे सरकार को ख़बर करनी होती है. इसी योजना के अंतर्गत तैनात अफ़सर एडम डॉबने ने कांस्य युग की हज़ारों चीज़ों का पता लगाया है.

पिछले दस सालों में क़रीब 75 हज़ार हथियार और दूसरी चीज़ें एडम के हाथ लगी हैं. मगर टैटरशैल होर्ड में मिली चीज़ें एकदम अलग हैं.

एडम कहते हैं कि अक़्सर कांस्य युग की सिर्फ़ टूटी-फूटी कुल्हाड़ियां ही मिलती रही हैं.

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मगर टैटरशैल में बहुत सी चीज़ें मिली हैं. बहुत सा सामान ऐसा है जो उस दौर में बहुत क़ीमती माना जाता रहा होगा.

इनमें कुल्हाड़ियां, तलवारें, खंजर जैसे सामान हैं. इन चीज़ों की तलाश मेटल डिटेक्टर से की गई है. इनके पाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि इन सभी सामानों को तोड़-फोड़कर छुपाया गया है.

लोग बुरे वक़्त के लिए जब अपनी क़ीमती चीज़ें छिपाते हैं तो उसे बहुत सहेजकर छिपाते हैं.

ऐसे में जानकारों को समझ नहीं आ रहा है कि उस दौर के लोगों ने ये क़ीमती चीज़ें आख़िर तोड़कर क्यों छिपाईं? वो भी एक साथ.

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अगर वो बाद के लिए था तो उसे तोड़ने की क्या ज़रूरत थी? अगर तोड़ ही डाला था तो उसे छुपाने की क्या ज़रूरत थी?

ब्रिटेन में कांस्य युग के सबसे ज़्यादा सामान आइलहैम नाम की जगह पर मिले थे. यहां क़रीब 6500 चीज़ें मिलीं जो 3000 साल से भी ज़्यादा पुरानी थीं.

इन पर रिसर्च करने वालों ने ये समझा कि किसी लुहार ने इन्हें छुपाया होगा ताकि बाद में निकालकर इस्तेमाल कर सके.

लेकिन साथ में मिले टूटे हुए हथियारों ने जानकारों को उलझा दिया है. सवाल वही कि अगर बाद के लिए छुपाए गए थे, तो आख़िर इन हथियारों को तोड़ा क्यों गया?

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कुछ इतिहासकार ये मानते हैं कि शायद ये उस दौर की परंपरा का हिस्सा रहा हो. जिसमें हथियारों को जंग के बाद तोड़कर ऐसे नदी किनारे या तालाब में दफ़ना दिया जाता था.

लंदन के ब्रिटिश म्यूज़ियम के एलेनॉर घे कहती हैं कि जिस तरह हथियार घिसे हुए हैं, उनसे साफ़ है कि इन्हें जंग में इस्तेमाल किया गया था.

एक और बात जो साफ़ है वो ये कि कांसे की चीज़ों को सोने के साथ नहीं रखा जाता था. सोने के सामान अलग छुपाए जाते थे.

कांसे के सामान नदी किनारे या बस्तियों के क़रीब छुपाए जाते थे. वहीं सोने की चीज़ें बस्तियों से दूर छुपाई जाती थीं.

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इनसे साफ़ है कि कांसे के हथियार और दूसरी चीज़ें यूं ही नहीं फेंक़ दी गई थीं. इन्हें किसी ख़ास मक़सद से तोड़कर छुपाया गया था.

शायद ये कांस्य युग का कोई रिवाज़ रहा होगा. हर समुदाय में कुछ न कुछ रस्में, कुछ रिवाज़ चलन में होते हैं.

2010 में डेविड येट्स और रिचर्ड ब्रैडले ने कांस्य युग के इन ठिकानों के बारे में एक पेपर लिखा था. उनके मुताबिक़ नदी किनारे अक़्सर खंजर और तलवारें मिलती हैं.

वहीं तालाब में या दलदल में छोटे हथियार जैसे कुल्हाड़ी, चाकू वग़ैरह मिलते हैं.

कुछ जानकार ये कहते हैं कि पानी और अंडरवर्ल्ड का रिश्ता बहुत पुराना है. तो कहीं ये हथियार बदमाशों ने तो नहीं छुपाए थे.

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लोग कहते हैं कि पुराने दौर में लड़ाकू लोगों को जहाज़ में बैठाकर उसे जला दिया जाता था.

ब्रिटिश म्यूज़ियम की एलेनॉर कहती हैं कि शायद किसी बदमाश के मारे जाने के बाद उसके हथियार को तोड़कर छुपा दिया जाता था.

शायद मान्यता ये रही हो कि मरने वाले के साथ उसके हथियार भी दूसरी दुनिया में चले जाएं.

ग्रीनविच यूनिवर्सिटी के पीटर शोन कहते हैं कि कांस्य युग के आख़िरी दौर में पानी तेज़ी से बढ़ रहा था. ख़ास तौर से समुद्र का.

तो शायद हथियारों के पानी के ठिकानों के क़रीब पाए जाने का इससे भी कोई ताल्लुक़ हो.

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पीटर कहते हैं कि पानी के स्रोत के किनारे हथियार जमा करके शायद लोग ऊपरवाले से अपील कर रहे हों कि वो पानी का क़हर कम करें और बढ़ते जल स्तर को रोकें.

वहीं जर्मनी के इतिहासकार टोबियास मोर्ज कहते हैं कि ये जंग के बाद का रिवाज़ रहा होगा जिसमें हथियारों को तोड़कर छुपा दिया जाता रहा हो.

जैसे-जैसे उस दौर की और चीज़ें सामने आ रही हैं, उम्मीद की जा रही है कि क़ीमती सामान फेंकने और छुपाने की इस परंपरा के ऊपर से पर्दा उठेगा. वैसे इसकी कोई एक वजह रही हो, ऐसा नहीं लगता.

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एडम डॉबने कहते हैं कि जैसे आज लोग कई वजहों से चर्च जाते हैं- कुछ को ईश्वर में विश्वास है, कुछ परंपरा निभाने जाते हैं, कुछ सिर्फ़ शादियों के लिए तो कुछ अंतिम संस्कार के लिए चर्च जाते हैं.

कांस्य युग में हथियार छुपाने की भी कई वजहें हो सकती हैं. पक्के तौर पर इनका पता लगना अभी बाक़ी है.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी अर्थ पर उपलब्ध है.)

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