ब्राज़ीली कैबिनेट में महिलाएं नदारद

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मेरे पिता दुख से बहुत रोए जब उन्हें पता चला कि उनकी पहली संतान एक लड़की है.

लेकिन मेरी रोल मॉडल, अर्थशास्त्री मां ने ब्राज़ीलियन समाज के भेदभाव से बचाकर मुझे बड़ा किया.

समाज के इस भेदभेव से मैं बहुत बाद में रूबरू हुई, कुछ पेशेवर अनुभव और ज़्यादातर आंकड़ों से इससे सामना हुआ.

अंतरिम राष्ट्रपति माइकल तेमर की कैबिनेट में 23 नामों की घोषणा इसी भेदभाव के ख़िलाफ़ लड़ाई में ख़तरे की घंटी है.

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क़रीब चार दशकों में ये पहला मौक़ा होगा जब ब्राज़ील की कैबिनेट में केवल पुरुष हैं. आख़िरी बार ऐसी स्थिति सैन्य तानाशाही के दौर थी.

भारी आलोचना के बाद ऐसा सुनने में आया है कि संस्कृति मंत्रालय को दोबारा शुरू किया जाएगा. ख़र्चों में कटौती के नाम पर संस्कृति मंत्रालय समेत नौ ऐसे विभाग बंद कर दिए गए थे.

ख़बरों के मुताबिक़ तेमर अड़े हैं कि इसकी बागडोर किसी महिला को ही दी जाए. लेकिन दिलचस्प बात है कि पूर्व मंत्रालय को अब महज़ सचिवालय का दर्जा प्राप्त होगा. पुर्तगाली में अब तक प्रतीक का कोई शब्द नहीं है.

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पहले से ही ब्राज़ील की राजनीति में महिलाओं की प्रतिनिधत्व बेहद कम है और अब कैबिनेट में एक भी महिला को शामिल नहीं किया गया है.

सीनेट के 81 सदस्यों में केवल 12 महिलाएं हैं. उनमें से एक महिला सीनेटर को ट्विटर पर एक लोकप्रिय टीवी प्रस्तुतकर्ता ने 'कॉफी लेडी' कहकर संबोधित किया था.

वकर्स पार्टी की तरफ़ से सीनेटर, रेगिना सोउसा ब्राज़ील की उन चंद महिला और काले विधायकों में से एक हैं.

ब्राज़ील में अभी भी सबसे अधिक महिलाएं बतौर घरेलू कर्मचारी काम करती हैं. और उनमें से भी ज़्यादातर काली हैं.

यह इस बात को दर्शाता है कि इस टिप्पणी के ख़िलाफ़ कई लोगों ने क्यों विद्रोह किया. लेकिन सब ने क्यों नहीं.

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ब्राज़ील में विविधता की कमी पर ज़्यादा बात नहीं की जाती, ऐसे देश में जहां 'पार्टी ऑफ़ द ब्राज़ीलियन वुमन' का केवल एक निर्वाचित सांसद है, वो भी पुरुष.

इसलिए बहस ध्रुवीकृत हो जाता है.

फेसबुक पेज पर एक पुरुष पाठक ने एक लेख जिसका शीर्षक, "ऑल द प्रेसिडेंट्स मेन(एंड नो वुमन)" पर कमेंट में लिखा, "क्या अब सरकारी नौकरियों में भी आरक्षण चाहिए?"

उसने लिखा, "राजनीति हो या फिर नौकरी, लोगों को वहां उनकी योग्यता के कारण होना चाहिए ना कि लिंग के कारण, लेफ़्ट की ये मूर्खतापूर्ण बात है.

हालांकि दूसरों ने नए कैबिनेट की आलोचना की.

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देश के सबसे प्रभावशाली मैगज़ीन में ब्राज़ील की नई 'फ़र्स्ट लेडी' के एक विवादित प्रोफ़ाइल का ज़िक्र करते हुए एक पत्रकार ने लिखा, "आप यही उम्मीद करेंगे एक ऐसे राष्ट्रपति से जिनकी पत्नी ख़ूबसूरत, संकोची और घर में रहने वाली है."

शुरुआती लाइनें थी, "वो एक सौभाग्यशाली महिला हैं."

मार्सेला तेमर का भाग्य उसी वक़्त उदय हो गया था जब वो पहली बार अपने होने वाले पति से मिलीं. वो महज़ 18 साल की थीं और वो 60 से ज़्यादा के थे जब उनके अंकल ने एक पार्टी कॉन्फ्रेंस में दोनों को मिलाया.

अप्रैल में ज़िल्मा रूसैफ़ को कांग्रेस में मिली महत्वपूर्ण हार के बाद एक और लिंग संबंधी विवाद उठा.

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एक मैगज़ीन के कवर पर उन्हें नर्वस ब्रेकडाउन हुए महिला के तौर पर दर्शाया गया.

इस तरह की कई टिप्पणी उनके राष्ट्रपति पद से हटाए जाने के बाद की गईं.

लेकिन उनके ख़िलाफ़ भारी असंतोष को उनके लिंग से जोड़कर देखना इस बात को नज़रअंदाज़ करता है कि ये वही महिलां हैं जो ब्राज़ील की सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति में से एक रही हैं.

देश की अर्थव्यवस्थआ को न संभाल पाना, सबसे ख़राब मंदी का दौर आने और उनके पार्टी के भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरना उनकी पतन के कारण हैं.

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