फ्रांस: बच्चों में ख़ुफ़िया कौशल की तलाश

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फ्रांस की बाह्य खुफिया सेवा डीजीएसई ने देश के स्कूलों में 'कोड-ब्रेकर' प्रतियोगिता का प्रायोजित की.

इस प्रतियोगिता का मक़सद देश के सबसे प्रतिभाशाली कोड-ब्रेकर मेधा की तलाश करना था.

यह पहली बार है जब डायरेक्टरेट-जेनरल फॉर एक्सटरनल सेक्योरिटी (डीजीएसई, देश की बाहरी सुरक्षा के महानिदेशालय) स्कूलों में इस तरह की प्रतियोगिता से जुड़ी है.

प्रतियोगिता के पहले चरण में 18000 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया.बुधवार को हुए फाइनल राउंड में 38 विद्यार्थी ही पहुंचे थे.

प्रतियोगिता पेरिस की टीम ने जीती.

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डीजीएसई के प्रवक्ता ने कहा कि इस प्रतियोगिता का मक़सद खुफिया कामों के प्रति युवाओं में जागरुकता फैलाना है.

पिछले साल पेरिस में हुए जिहादी हमले के बाद सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.

डीजीएसई में 6200 कर्मचारी है, जिसमे 63 फीसदी आम नागरिक हैं.

इसका वार्षिक बजट 750 मिलियन यूरो यानी क़रीब 839 मिलियन डॉलर है.

खुफिया सेवा का काम इस्लामिक समूहों पर नज़र रखना है.

नवंबर में पेरिस में जिहादियों के हमले में करीब 130 लोग मारे गए थे. पेरिस में हुई इस गोलीबारी की जिम्मेदारी कथित इस्लामिक स्टेट नामक चरमपंथी समूह ने ली थी.

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जनवरी 2015 में जिहादियों द्वारा शार्ली हेब्दो पत्रिका के दफ्तर पर किए गए हमले में भी 17 लोग मारे गए थे.

विद्यार्थियों के लिए आयोजित क्रिप्टोग्राफिक परीक्षा का आयोजन फ्रांस की दो गणितज्ञों की संस्था आईओआई और एनिमैथ ने किया था.

इस प्रतियोगिता का नाम अलकिंदी था. जिसे नौवीं शताब्दी के अरब के महान गणितज्ञ और दार्शनिक अबू यूसुफ़ याक़ूब इब्न इशाक अल किंदी के नाम पर रखा गया है.

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इस प्रतियोगिता का आयोजन चार चरणों में किया गया. प्रतियोगिता का आखिरी चरण पेरिस के सेना संग्रहालय में पूरा किया गया.

प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार में स्मार्ट फोन और कंप्यूटर दिए गए.

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