'शराब बुरी चीज़, पी पीकर ख़त्म कर रहा हूं'

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जब भी भारत या पाकिस्तान की कोई राज्य सरकार साल-छह महीने के लिए गुटखे, पान-मसाले वगैरह पर प्रतिबंध लगाती है तो मेरे मोहल्ले का राजू पनवाड़ी, "भत्ता बढ़ाने के धंधे है साहब, क्या करें पुलिस वालों का भी तो पेट लगा पड़ा है" कहते हुए थोड़ा सा गुटखा और फांक लेता है.

हिंद हो कि सिंध, बिहार हो कि बलूचिस्तान कहीं की भी सरकार गुटखे, पान-मसाले वालों को लाइसेंस देती है और फिर उनसे कई सालों तक करोड़ों रुपए टैक्स बटोरती रहती है. उसके बाद अचानक से एक दिन सरकार को हड़बड़ाकर ख़्याल आता है कि ये तो जनता की सेहत के लिए ख़तरनाक चीज़ है.

इससे तो गले और मुंह का कैंसर हो जाता है, चलो हटाओ दुकानों से, छापे मारो गोदामों पर, ज़ब्त कर लो सारा माल.

इससे और कुछ तो नहीं होता. जिस चीज पर रोक लगती है वो ब्लैक में इन्हीं जगहों से दोगुनी-तिगुनी क़ीमत पर मिलने लगती है.

मैंने तो आजतक यह नहीं देखा कि किसी ने सिर्फ़ इसलिए पान-मसाला या गुटखा खाना छोड़ दिया हो कि आज 23 मई के बाद इससे कैंसर हो सकता है.

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कहने को तो शरीर बेचने पर पाकिस्तान में पिछले चालीस साल से पाबंदी है लेकिन अब सारा काम मोबाइल फोन पर ही हो जाता है.

मुजरा भी पिछले साढ़े तीन दशक से सरकार की मंजूरशुदा ख़ास जगहों पर रात आठ से दस बजे तक ही देखा जा सकता है.

इससे बस इतना फर्क पड़ा है कि पहले टेबला नवाब साहब मुजरा देखने कोठे तक जाते थे अब कोठा चलकर नवाब साहब के बालाख़ाने तक पहुंच जाता है.

शराब बेचना, ख़रीदना और पीना पाकिस्तान में आज से नहीं, 1977 से अपराध है. लेकिन कौन सी विलायती और देशी है जो आसानी से उपलब्ध नहीं.

अब कोई इतना मूर्ख भी ना हो कि बस स्टॉप पर खड़ा होकर बोतल गटागट मुंह से लगाकर चीखे, "आओ मुझे पकड़ लो."

ऐसे पागल को तो सचमुच में पकड़ ही लेना चाहिए. इस बात को छोड़े कि पूरी एक नार्कोटिक्स कंट्रोल बनी हुई है और ड्रग स्मगलिंग पर मृत्यु दंड भी मिल सकता है.

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बीसियों टन पकड़ी चरस और सैकड़ों विलायती बोतलों को भी हर महीने मीडिया के सामने आग लगाई जाती है.

फिर भी अगर किसी को कही से भी ऐसी चरस ना मिले तो पड़ोस का थाना किस लिए है. अरे कोई ना कोई बांका सिपहिया तो जानने वाला होगा ही ना. चलिए आपका नहीं तो आपके किसी मित्र का.

नहीं !

लानत है ज़िंदगी पर. अभी से बिहार सरकार ने शराब और पान, गुटखे पर रोक लगाया है तो लगता है कि सरकार के पास इन दिनों करने को कोई ढंग का काम नहीं बचा.

बिहार सरकार से अच्छा तो मेरा यार फ्रेडी है जब भी मिलो, नशे में धुत. पूछोगे भैया क्यों इतनी पीता है, अरे मर जाएगा.

मगर फ्रेडी का भी एक ही जवाब होता है, "अबे नहीं यार. मुझे पता है कि शराब बहुत बुरी चीज है. तभी तो इसे पी-पीकर संसार से ख़त्म कर रहा हूं."

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