क्या है ब्रिटेन का सबसे बड़ा राज़?

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चलिए आज आपको ब्रिटेन के बहुत बड़े राज़ से रूबरू कराते हैं. ब्रिटेन में अंडरग्राउंड पाइपलाइन का एक खुफ़िया नेटवर्क है.

इसे जनता की नज़र से बरसों से छुपाकर रखा गया है. क़रीब अस्सी साल पुराने इस पाइपलाइन नेटवर्क ने दूसरे विश्व युद्ध में ब्रिटेन की जीत में बड़ा योगदान दिया था.

ब्रिटेन में बहुत से लोगों ने इस पाइपलाइन नेटवर्क की निशानियां देखी होंगी. मगर किसी को भी इसका पूरा सच नहीं पता होगा.

इसे बीसवीं सदी में ब्रिटिश इंजीनियरों के सबसे बड़े कारमानों में से एक कहा जाए तो ग़लत नहीं होगा.

इस पाइपलाइन नेटवर्क से ब्रिटेन के तमाम हवाई अड्डों तक हवाई जहाज़ के ईंधन की सप्लाई की जाती है.

ये पाइपलाइन नेटवर्क, सीधे रिफ़ाइनरीज़ से तेल को एयरपोर्ट तक पहुंचाता है, किसी की नज़र में आए बग़ैर.

इस पाइपलाइन नेटवर्क को पिछली सदी के तीस के दशक में बिछाया गया था. इसके पीछे मक़सद था देश की सुरक्षा.

उस वक़्त लिवरपूल की स्टैनलो रिफ़ाइनरी से ब्रिस्टॉल के एवनमाउथ बंदरगाह तक एक पाइपलाइन बिछाई गई. फिर इसे देश के रोड और रेल नेटवर्क से जोड़ा गया.

सितंबर 1939 में दूसरा विश्व युद्ध छिड़ गया. हिटलर की सेनाओं ने एक एक करके हॉलैंड, बेल्जियम और फ्रांस पर कब्ज़ा कर लिया. ब्रिटेन पर लगातार हवाई हमले हो रहे थे. बड़ा ख़तरा मंडरा रहा था.

दुश्मन पर जवाबी हवाई हमलों के लिए इंग्लैंड के पूर्वी तटों पर स्थित फौजी हवाई अड्डों तक ईंधन की लगातार सप्लाई होनी ज़रूरी थी. और ये काम दुश्मन की नज़र से छुपाकर करना था.

सड़क से या रेल से ईंधन भेजना ख़तरे से ख़ाली नहीं था. जर्मनी के विमान उन पर बमबारी कर सकते थे. इसीलिए इस पाइपलाइन के नेटवर्क को बिछाने का फ़ैसला किया गया. इसकी खुदाई बड़े खुफिया तरीक़े से की गई. रात में ही इसका काम होता था. ताकि दुश्मन की निगाहों से बचा जा सके.

आख़िर में इस पाइपलाइन नेटवर्क की मदद से पूर्वी इंग्लैंड के कई हवाई अड्डों तक तेल की सप्लाई का इंतज़ाम किया गया.

यहां से उड़ान भरने वाले ब्रिटिश और अमरीकी विमानों को बिना रुके लगातार ईंधन की मिला. अमरीकी और ब्रिटिश सेनाओं की जीत में इस नेटवर्क का बड़ा योगदान रहा.

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दूसरे विश्व युद्ध के ख़ात्मे के बाद भी इस पाइपलाइन का इस्तेमाल होता रहा. बल्कि हवाई उड़ानों में इज़ाफ़े के साथ-साथ इस नेटवर्क का और विस्तार किया गया.

सैन्य हवाई अड्डों के साथ साथ सिविलियन एयरपोर्ट तक भी पाइपलाइन बिछा दी गई. आज इसका नेटवर्क क़रीब 2,400 किलोमीटर का है.

कुछ जगहों पर ही इस नेटवर्क के पाइप धरती से ऊपर देखने को मिलते हैं. ज़्यादातर जगहों पर ये अंडरग्राउंड ही है. कई जगह, इसके आस-पास चेतावनी के बोर्ड भी लगाए गए हैं. इनमें से कई बोर्ड तो दूसरे विश्व युद्ध के दौरान के ही हैं.

वैसे तो आज ये नेटवर्क कोई राज़ नहीं. मगर सरकारी दस्तावेज़ों में ये अभी भी ख़ुफ़िया नेटवर्क ही है. इसका नाम पहले गवर्नमेंट पाइपलाइन एंड स्टोरेज सिस्टम था. 2015 में इसे एक स्पेनिश कंपनी को बेच दिया गया.

अब इसे सीएलएच पाइपलाइन सिस्टम के नाम से जाना जाता है. इसका पूरा नक्शा कंपनी की वेबसाइट पर है. हालांकि सही-सही ठिकाने की जानकारी अभी भी सार्वजनिक नहीं की गई है.

बस, कुछ चेतावनी वाले बोर्ड की मदद से इसकी पहचान होती है.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें जो बीबीसी फ्यूचर पर उपलब्ध है.)

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