फ्रांस में रेल हड़ताल, मुसाफिर परेशान

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फ्रांस में यूरो 2016 फुटबॉल टूर्नामेंट शुरू होने में नौ दिन बाकी हैं. लेकिन बहुत से रेल कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं.

रेल कंपनी एसएनसीएफ के अनुसार, हड़ताल के कारण 60 फ़ीसदी हाई स्पीड ट्रेनें और 30 से पचास फ़ीसदी ट्रेनें ही चल सकेंगी.

यात्रियों ने हड़ताल पर अपनी राय सोशल मीडिया पर ज़ाहिर की.

एक यात्री ने लिखा है कि ये किसी और महाद्वीप तक सफ़र करने से भी बुरा है.

दूसरे यात्री ने लिखा है, "आपको सिर्फ़ अपने पेट और कमाई की पड़ी है. हमारे बारे में कौन सोचेगा?"

हालांकि फ्रांस के अख़़बार जर्नल दू डिमेन्च के मुताबिक़ 46 फ़ीसदी लोग यूनियन का समर्थन कर रहे हैं.

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इस हड़ताल की बड़ी वजह ट्रेन ड्राइवरों को मिलने वाली साप्ताहिक छुट्टियों में बदलाव और अन्य सुविधाओं में बदलाव है.

जून महीने में हवाई परिवहन में भी परेशानी हो सकती है, लेकिन इसका सीधे तौर पर श्रम सुधार विधेयक से कोई लेना देना नहीं है.

उधर नए श्रम सुधार विधेयक को बिना वोटिंग के निचले सदन में मंज़ूरी मिल गई है, अब इसी महीने इसे सीनेट में पेश किया जाना है.

फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने महीनों से चल रहे हिंसक विरोध प्रदर्शन के बावजूद श्रम सुधारों पर पीछे नहीं हटने के संकेत दिए हैं.

वहीं विपक्षी पार्टी के निकोला सार्कोज़ी ने एक मैगज़ीन को दिए इंटरव्यू में कहा, "अगर हम संसद में विचारों पर बहस को नहीं स्वीकार करेंगे तो वो सड़कों तक पहुंच जाएगी."

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मंगलवार से शुरू हुई रेल हड़ताल की अगुवाई शक्तिशाली सीजीटी ने घोषणा की है कि गुरुवार से पेरिस मेट्रो और दूसरे सार्वजनिक परिवहन भी हड़ताल पर जा सकते हैं.

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