'15 लाख लोगों के क़त्ल' पर भिड़े तुर्की और जर्मनी

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जर्मन संसद ने एक प्रस्ताव पारित किया है जिसमें पहले विश्व युद्ध के दौरान तुर्की के ओटोमान साम्राज्य द्वारा अर्मेनियाई लोगों की हत्या को नरसंहार घोषित किया गया है.

जर्मन संसद के निचले सदन बुंडेसटाग में लगभग एक मत से प्रस्ताव पारित किया गया.

वहीं तुर्की ने इसे ऐतिहासिक ग़लती बताया है और बर्लिन से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है.

अर्मेनिया का कहना है कि 1915 में तुर्कों ने व्यवस्थित तरीक़े से 15 लाख लोगों का क़त्ल किया था, हालांकि तुर्की इस संख्या को ख़ारिज करता है और इसे नरसंहार कहने पर भी उसे आपत्ति है.

ये प्रस्ताव ऐसे समय में पारित किया गया है जब प्रवासी संकट से निपटने में तुर्की यूरोपीय संघ का अहम साझीदार है.

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कीनिया के दौर पर तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन ने नैरोबी में कहा, "हम चर्चा के लिए अपने राजदूत को बुला रहे हैं. जब वो आ जाएंगे तो हम इन मुद्दों पर बात करेंगे कि इसका तुर्की और जर्मनी के रिश्तो पर क्या असर होगा. मेरी तुर्की वापसी हम ये बात करेंगे और तय करेंगे कि तुर्की क्या क़दम उठाएगा."

वहीं जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल उम्मीद जताई है कि इस प्रस्ताव का दोनों देशों के रिश्तों पर बुरा असर नहीं होगा.

उन्होंने कहा, "बहुत सारी चीज़ें हैं जो जर्मनी और तुर्की को जोड़ती हैं, और अगर किसी एक मुद्दे पर हमारे मत भिन्न भी हैं तो हमारे संपर्कों का दायरा, हमारी दोस्ती और हमारे रणनीति रिश्ते बहुत महान हैं."

अर्मेनिया ने जर्मन संसद में पारित प्रस्ताव का स्वागत किया है.

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