भारत की बढ़ती ताक़त से चिंतित पाक मीडिया

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पाकिस्तानी मीडिया को लगता है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकेला पड़ता जा रहा है और इसे लेकर मीडिया में चिंता ज़ाहिर की गई है.

पाकिस्तानी मीडिया का आकलन है कि अमरीका के साथ पाकिस्तान का गठबंधन एक ओर जहां गोता लगा रहा है, वहीं अफ़ग़ानिस्तान भी पाकिस्तान से निराशा जता रहा है.

वहीं पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक़ क्षेत्र में भारत की ताक़त लगातार बढ़ रही है.

एक विश्लेषक ने लिखा है कि "क्षेत्र में इस्लामाबाद अलग-थलग पड़ चुका है, इसकी विदेश नीति डांवाडोल है.''

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21 मई को पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में अमरीकी ड्रोन हमले में अफ़ग़ान तालिबान के मुखिया मुल्लाह अख़्तर मंसूर की मौत के बाद से पाक-अमरीकी रिश्ते तनावपूर्ण हैं.

इसके साथ ही अमरीका ने पाकिस्तान को एफ-16 फ़ाइटर जेट्स की ख़रीद के लिए कोई मदद देने से भी इंकार कर दिया है.

'डॉन' अख़बार में मोईद युसुफ़ ने इस मुद्दे पर अमरीकी रुख़ को इस तरह बयान किया है, "करदाताओं के पैसे एक ऐसे देश पर क्यों ख़र्च किए जा रहे हैं जो अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैनिकों को मारने वालों का समर्थन कर रहा है."

लेकिन पाकिस्तान मीडिया में इस तर्क का विरोध नज़र आता हैं.

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उर्दू अख़बार 'दुनिया' में सलमान यूसुफ़ लिखते हैं कि "समय आ गया है कि अमरीका-पाकिस्तान रिश्तों में अपमान और ग़ुलामी का अध्याय बंद हो और सम्मान और समानता के आधार पर नए युग की शुरुआत हो."

वरिष्ठ पत्रकार आरिफ़ निज़ामी 'पाकिस्तान टुडे' में लिखते हैं कि ''इस्लामाबाद और वॉशिंगटन के बीच भरोसे की कमी है."

वह आगे लिखते हैं कि जहां तक अमरीका का सवाल है उसके लिए 'पाकिस्तान भरोसेमंद सहयोगी नहीं है'.

आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान अमरीका का दोस्त नहीं बल्कि 'फेरेनेमी' है, जो फ्रेंड (दोस्त) और इनेमी (दुश्मन) से मिलकर बना है.

क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी भारत के साथ अमरीका की बढ़ती नज़दीकी भी पाकिस्तानी मीडिया में चिंता का विषय है.

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हाल में ईरान के चाबहार बंदरगाह को विकसित करने को लेकर भारत से हुए समझौते और ईरान और अफ़गानिस्तान के साथ व्यापार के लिए तीनतरफा समझौते को लेकर भी पाकिस्तान मीडिया ने चिंता जाहिर की है.

चाबहार बंदरगाह समझौते को चीन की मदद से पाकिस्तान में विकसित किए जा रहे ग्वादर बंदरगाह के मुक़ाबले में देखा जा रहा है.

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भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपने पड़ोसी देशों से गठजोड़ करने की पॉलिसी का ज़िक्र करते हुए 'डॉन' में उमेर अली लिखते हैं, ''चाबहार समझौता मोदी की 'माईनस पाकिस्तान पॉलिसी' का एक नया ज़रिया है. भारत अपने संबंध ईरान, अफ़ग़ानिस्तान और अब सउदी अरब से भी मज़बूत कर रहा है."

इस लेख में विशेषज्ञ के हवाले से बताया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पाकिस्तान को दिखा दिया है कि यदि पाकिस्तान आर्थिक एकीकरण और रीजनल कनेक्टीविटी के लिए तैयार नहीं है तो पाकिस्तान को लिए बिना क्षेत्रीय देश आगे बढ़ सकते हैं.

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