इंडोनेशिया: कुंवारों ने बनाया फ़ेसबुक पर अड्डा

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इंडोनेशिया में कुछ युवाओं ने शादी को चुनौती दी है और इसके लिए सहारा लिया है सोशल मीडिया का.

भारत की तरह इंडोनेशिया में भी दोस्त, रिश्तेदार, परिवार वाले अक्सर युवाओं पर शादी करने और घर बसाने का दबाव डालते हैं.

लेकिन इंडोनेशिया का एक युवा ग्रुप अब इस पुरानी प्रथा को चुनौती दे रहा है और सिंगलहुड यानी अकेले रहने को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहा है.

'जकार्ता लोनली काउंसिल' का फ़ेसबुक पेज कुंवारों के लिए एक प्लेटफॉर्म बन गया है.

इस ग्रुप की सबसे लोकप्रिय पोस्ट वे हैं, जिनमें मशहूर और चर्चित लोगों की कही बातों में इस तरह बदलाव कर मीम बनाए जाते हैं कि उनसे सिंगल स्टेटस, अकेलापन और अपने पूर्व प्रेमी से जुड़ी भावनाएं ज़ाहिर हों.

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इसी तरह की एक पोस्ट में कहा गया है, "शनिवार की रात को डेटिंग की मजबूरी एक बुर्ज़ुआ साज़िश है."

एक दूसरी पोस्ट में 14 फ़रवरी को सिंगल प्राइड डे घोषित करते की दलील देते हुए कहा गया है, "सिंगल, लेकिन गर्व है".

इंडोनेशिया के प्रथम राष्ट्रपति सूकर्णो, इंडोनेशिया के महान उपन्यासकार प्रमूदिया अनुंता तूर और दुनिया के बड़े-बड़े लोग जैसे जोसेफ़ स्टालिन, फ्रीड्रिक स्किलर, ऑस्कर वाइल्ड और जॉन एफ़ केनेडी की कही बातों में फेरबदल कर मीम बनाए गए हैं.

जोसेफ़ स्टालिन का कथन, "a single death is a tragedy; a million deaths is a statistic (एक मौत त्रासदी है, दस लाख मौतें एक आंकड़ा है)" को बदलकर लिखा गया है, "Rejected once is a tragedy; rejected a million times? That's a statistic" (यानी पहली बार ख़ारिज किया जाना त्रासदी है; दस लाख बार ख़ारिज किया जाना? यह आंकड़ा है.)

एक और पोस्ट में लिखा गया है कि एक 'डेट' का होना कोई बड़ी बात नहीं है, जो बात उसे महान बनाती है वो है उसकी व्याख्या. ये पोस्ट उपन्यासकार प्रमूदिया अनुंता तूर के शब्द, 'जीवन सरल है, लेकिन जो चीज़ उसे उलझाती है वो है उसकी व्याख्या.'

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इसमें मशहूर 'लोगो' को भी एडिट कर पोस्ट किया जाता है, जैसे पिज्जा हट को 'पिज्जा हर्ट'.

पेज बनाने वालों में से एक का कहना है कि दो साल पहले उन्होंने इसे मस्ती के तौर पर बनाया था क्योंकि उनके सदस्य हास्य के लिए इस तरह के मीम बनाना बेहद पसंद करते हैं.

जकार्ता लोनली काउंसिल के एक और सदस्य का कहना है कि जब इस पेज को तैयार किया गया था तब ज़्यादातर सदस्य कुंवारे थे. लेकिन अब उनमें से एक ने शादी कर ली है.

ये सदस्य ज़्यादातर युवा हैं और अलग-अलग पेशों से हैं, कोई रिसर्चर, कोई लेखक तो कोई कॉलेज शिक्षक है.

ये लोग अपनी कई पोस्टों में इस बात पर ज़ोर देते हैं कि अकेले रहना या अविवाहित होना एक निजी चुनाव है और इसमें कोई ग़लती नहीं है.

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कई यूज़र्स को ये पोस्ट हास्यास्पद और असली लगते हैं. एक यूज़र का कहना है कि अकेले रहना बेहद मुश्किल है.

लेकिन कुछ लोग इन पोस्टों को अशिष्ट और असभ्य भी मानते हैं. ताज़ा राजनीतिक मामलों पर लिखे पोस्ट अक्सर विवाद का कारण बन जाते हैं.

फ़ेसबुक पेज पर जकार्ता लोनली काउंसिल का कहना है कि उनके मीम किसी मशहूर शख़्सियत या उनकी सोच का मज़ाक उड़ाने के लिए नहीं बनाए जाते, बल्कि उनके साथ हंसने के लिए बनाए जाते हैं जैसे कि वो अभी भी ज़िंदा हों और सभी के साथ मज़ाक कर रहे हों. उनका मानना है कि हंसी के साथ वो और अनुभवी हो जाते हैं.

ग्रुप चाहता है कि मीम के अलावा उनका पेज अविवाहितों के लिए एक उत्सव मनाने जैसा होना चाहिए.

उनके मुताबिक़, शादी करना कोई ज़रूरी नहीं और अकेला होना उनका एक निजी चुनाव है.

ये लोग उन सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों की भी आलोचना करते हैं जो अविवाहितों को अपने माता-पिता की मर्ज़ी से शादी करने के लिए बाध्य करते हैं.

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इंडोनेशिया में धर्म भी रिश्तों में एक अहम भूमिका निभाता है. अलग धर्मों के लोगों के बीच शादी गैरकानूनी है और ऐसी शादियों में किसी एक पार्टनर को अपना धर्म बदलकर ही शादी करनी होती है.

जकार्ता लोनली काउंसिल के संस्थापक कहते हैं कि अलग धर्म, अलग विचारधारा और अलग जातीयता के कारण कई लोगों को अपने रिश्तों को ख़त्म करना पड़ता है.

मनोवैज्ञानिक और लेक्चरर पिंगकैन रिमोंडर के मुताबिक़, "समाज ऐसा सोचता है कि जो लोग सिंगल और अविवाहित हैं, वो अकेले हैं, भावनात्मक रूप से अस्थिर हैं और बड़ों की तरह व्यवहार नहीं कर पाते."

पिंगकैन बीना नुसांतारा यूनिवर्सिटी में पढ़ाती हैं और युवाओं पर शादी के दबाव का अध्ययन कर रही हैं.

वो कहती हैं कि जैसे ही कोई शादी की उम्र तक पहुंचता है और कमाने लगता है तो धर्म लोगों पर शादी और परिवार बनाने का दबाव डालता है. उनके मुताबिक़, इस सोच को बदलने की ज़रूरत है.

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