यौन हमले को बताया बस '20 मिनट का काम'

ब्रोक टर्नर (फ़ाइल फोटो) इमेज कॉपीरइट AP

अमरीका में स्टेनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के एक छात्र को यौन हमले का दोषी पाए जाने के बाद उसके पिता के एक बयान पर विवाद हो गया है.

दोषी छात्र के पिता ने कहा था कि ‘20 मिनट के काम के लिए’ उसके बेटे को जेल नहीं होनी चाहिए.

लोग इस बात पर सोशल मीडिया पर ग़ुस्सा ज़ाहिर कर रहे हैं.

20 वर्षीय ब्रोक टर्नर को पिछले साल एक बेहोश महिला पर यौन हमला करने का दोषी पाए जाने पर छह महीने की जेल की सज़ा हुई थी.

पुलिस को दिए गए टर्नर के बयान को भी कोर्ट में पढ़ा गया, जिसमें घटना के दिन से जुड़े उसके व्यवहार से जुड़े सवाल थे.

इन सवालों को भी सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है. मसलन, तुम्हारी उम्र कितनी है? तुमने कब शराब पी? कितनी शराब पी?.....

अभियोजकों ने कहा कि जनवरी 2015 में टर्नर को दो गवाहों ने महिला पर यौन हमला करते हुए देखा था. ये महिला स्टेनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी परिसर की ज़मीन पर पड़ी थी और बेहोश थी.

उन्होंने कहा कि जब गवाहों ने टर्नर को टोका तो उसने वहाँ से भागने की कोशिश की, लेकिन इन दोनों चश्मदीदों ने उसे धर दबोचा और पुलिस के आने तक पकड़े रखा.

मरकरी न्यूज़ की ख़बर के अनुसार यूनिवर्सिटी के अच्छे तैराक टर्नर को मार्च में यौन हमले का दोषी पाया गया. अभियोजकों ने छह साल की सज़ा की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने उसके लिए छह महीने की सज़ा मुकर्रर की.

सज़ा सुनाए जाने से पहले टर्नर के पिता ने कहा कि उनके बेटे की ज़िंदगी “हमेशा के लिए पूरी तरह बदल गई है.”

पिता ने लिखा, “उसकी ज़िंदगी वैसी नहीं रही जिसका उसने सपना देखा था और जिसे हासिल करने के लिए इतनी मेहनत की थी.”

उन्होंने लिखा, “20 से अधिक साल के जीवन में उसके उन 20 मिनटों के काम की ये बहुत बड़ी सज़ा है.”

इस मसले पर ट्विटर पर लोगों ने भारी नाराज़गी दिखाई, सज़ा पर भी और टर्नर के पिता के बयान पर भी.

लगभग 28,000 लोगों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर कर सज़ा सुनाने वाले जज एरोन पर्स्की को वापस बुलाने की मांग की.

एक ट्विटर यूजर फ़राह ख़ान ने लिखा, “बलात्कार संस्कृति उसे कहते हैं जब दोषी बलात्कारी ब्रोक टर्नर के पिता हमले को ’20 मिनट का काम’ बताते हैं.”

एमी जो रायन ने लिखा, “20 मिनट बिताने के अच्छे तरीके: अपने बेटे को सिखाओ कि महिलाएं भी इंसान हैं, अपने बेटे को सिखाओ कि बलात्कार बुरा है, अपने बेटे को शालीनता सिखाओ.”

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