'एलिस इन वंडरलैंड' में क्या राज़ छुपे हैं?

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बचपन में आपने भी शायद एलिस इन वंडरलैंड कहानी पढ़ी होगी. एक बच्ची के परीलोक में पहुंचने का ये क़िस्सा बेहद मशहूर है.

दुनिया के कई देशों में ये सिलेबस का हिस्सा है और बहुत से देशों में इसने दादा-दादी की कहानियों में जगह बना ली है.

मगर, सोने के वक़्त बच्चों को सुनाई जाने वाली इस कहानी में आज छुपे हुए राज़ तलाशे जा रहे हैं. इंटरनेट की दुनिया में 'एलिस इन वंडरलैंड' कहानी में छुपे कोड की ख़ूब चर्चा हो रही है.

कोई कहता है कि ये बच्चों का क़िस्सा नहीं, बल्कि सेक्स संबंधों की कहानी है. इस कहानी में जो जादुई दरवाज़े, मुस्कुराती बिल्लियां और शोर मचाते कछुए जो हैं वो असल में ख़ुफ़िया संदेश हैं.

ये कहानी क़रीब डेढ़ सौ साल पहले लिखी गई थी जो एक सच्ची घटना से प्रेरित थी, जब लंदन के ऑक्सफोर्ड कॉलेज के डीन की बेटी एलिस लिडेल अपनी सहेलियों के साथ टेम्स नदी की सैर पर गई.

वो कॉलेज में गणित पढ़ाने वाले चार्ल्स डॉजसन के साथ सैर पर गई थी. उसे ये तजुर्बा ख़ूब भाया था. इसके बाद एलिस ने डॉजसन से कहा कि वो इस सैर को क़िस्से की शक्ल में बयां करे.

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एलिस के कहने पर चार्ल्स डॉजसन ने लुईस कैरोल के उपनाम से 'एलिस इन वंडरलैंड' का क़िस्सा लिखा. तब से आज तक ये कहानी पूरी दुनिया में मशहूर हुई.

इस पर फ़िल्में बनीं, नाटक हुए, बैले खेले गए और यहां तक कि आज कंप्यूटर गेम्स भी हैं. इतनी चर्चित कहानी में भी आज ख़ुफ़िया संदेश तलाशे जा रहे हैं.

लेखकों, आलोचकों और रिसर्च करने वालों की इस कहानी के पीछे की कहानी में दिलचस्पी हमेशा बनी रही. किसी ने इसे ब्रितानी साम्राज्यवाद का संदेश बताया. तो कोई कहता है कि ये कहानी एक ऐसी हीरोइन की है जो मर्दों की सेक्स की ताक़त से जलती है.

कहते हैं कि कहानी के लेखक चार्ल्स डॉजसन का किरदार भी सवालों के घेरे में था. वो बच्चियों में बहुत दिलचस्पी लेते थे. उन्हें कम कपड़े पहनाकर उन्हें अपनी जांघ पर बिठाकर तस्वीरें खिंचवाते थे.

इससे ख़ुद लेखक के रवैये पर सवाल खड़े होते हैं. हालांकि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि बच्चियों से उनके संबंधों को कठघरे में खड़ा किया जा सके. लेकिन उनके बर्ताव तो सवाल खड़े करने वाले थे.

ब्रिटेन में विक्टोरिया युग ख़त्म होने के बाद से ही 'एलिस इन वंडरलैंड' की कहानी के पीछे छुपी कहानी तलाशने की शुरुआत हो गई थी. उसके किरदारों के भोलेपन पर लोगों का यक़ीन नहीं रह गया था.

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उसकी हीरोइन एलिस में लोगों को औरतों वाली बीमारियां दिखने लगी थीं. कहानी में जिस रैबिट होल का ज़िक्र है, उसे लोग एक औरत के यौन अंग से जोड़कर देखते हैं.

इसी तरह ताले-चाबी को लोग शारीरिक संबंध से जोड़कर देखने लगे. कहानी में जिस कैटरपिलर का ज़िक्र है उसे लोग मर्दों का यौन अंग बताने लगे.

इसी तरह एलिस के शरीर की बनावट, उसके छोटे-बड़े होने की घटनाओं के ज़िक्र को भी सेक्स का कोड मैसेज बताने से लोगों ने गुरेज नहीं किया. यहां तक कि उसे सेक्स को लेकर दिमाग़ी बीमारी का शिकार तक बता डाला.

वैसे, इससे इतर भी कुछ लोग, 'एलिस इन वंडरलैंड' के बच्चों के क़िस्से में बड़े राज़ तलाशते रहे हैं. वो मानते हैं कि ये एक लड़की के बच्ची से टीनएजर बनने और फिर जवां औरत बनने की कहानी है.

कहानी की हीरोइन अपने बदन को लेकर कॉन्फिडेंट नहीं है. बढ़ती उम्र के साथ उसमें जो बदलाव आ रहे हैं, वो उनसे परेशान हैं. उसे अपनी पहचान पर ही ऐतबार नहीं रह जाता.

बड़े होने के साथ-साथ वो ज़माने के चलन, समाज के नियमों को समझने और उन्हें चुनौती देने की कोशिश कर रही है. वो मौत को लेकर भी घबराई हुई है.

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बीसवीं सदी के मशहूर ब्रितानी आलोचक विलियम एम्पसन तो रौ में बहकर एलिस को बहुत कुछ ऐसा कह गए, जो आम तौर पर कोई किसी बच्ची के बारे में नहीं कहता.

1960 के दशक में इस कहानी में नशेड़ियों ने भी दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी. उन्होंने अपने तरीक़े से इस कहानी में छुपे राज़ तलाशने की कोशिश की जो जादुई दवाएं खाकर एलिस में तमाम बदलाव आते हैं.

उसे ड्रग्स लेने वालों ने अपने तरीक़े से पेश किया है. ड्रग के असर से ही कहानी में होने वाले तमाम जादू होते बताए जाते हैं.

वैसे 'एलिस इन वंडरलैंड' कहानी लिखने वाले चार्ल्स डॉजसन के पसंदीदा लेखक थे थॉमस दे क्विंसी. थॉमस ने एक अंग्रेज़ अफ़ीमची की कहानी लिखी थी.

लेकिन, ख़ुद डॉजसन की ड्रग्स में दिलचस्पी थी, इसके कोई सबूत नहीं मिले. हां होम्योपैथी में उनकी कुछ-कुछ दिलचस्पी की बातें सामने आई हैं. फिर भी कहानी को ड्रग लेने का क़िस्सा बताने वालों की कमी नहीं.

वैसे ये कहानी सिर्फ़ सेक्स और ड्रग की कहानी नहीं. कुछ लोग इसे एक ख़ुफ़िया सियासी क़िस्सा भी बताते हैं. जब कहानी की हीरोइन एलिस, सफ़ेद खरगोश के पीछे भागती है तो वो एक ऐसी जगह पर पहुंच जाती है जहां एक सनकी महारानी का राज है.

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लोग कहते हैं कि डॉजसन ने ये किरदार इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया की तर्ज पर गढ़ा था. उन्हें महारानी विक्टोरिया पसंद नहीं थीं, जबकि ख़ुद महारानी विक्टोरिया को डॉगसन की क़िताब ख़ूब पसंद आई थी.

फिर, एकदम अजीबो-ग़रीब जगह पर पहुंचकर एलिस के बर्ताव में क्या बदलाव आते हैं? नई जगह के स्थानीय लोगों के रवैये से नाख़ुश होकर वो अपनी ज़िंदगी के नियम क़ायदे वहां लागू करती है. इनके भयानक नतीजे निकलते हैं.

तो क्या, ये ब्रितानी साम्राज्यवाद की कहानी थी?

फिर कहानी में ट्वीडेलेडम और ट्वीडेलेडी, जो, 'द वालरस ऐंड द कारपेंटर' नाम की कविता सुनाते हैं, उनमें भी राज़ तलाशने की कोशिश हुई है. लोग कहते हैं कि कविता में जो बढ़ई है, असल में वो ईसा हैं और जो वालरस है वो असल में पीटर है. ओएस्टर, इनके शागिर्द हैं.

कुछ लोग इसे ब्रितानी साम्राज्य से जुड़ी कहानी बताते हैं और कहते हैं कि जिन ओएस्टर्स का ज़िक्र है वो असल में ब्रिटेन के ग़ुलाम देश हैं.

बीसवीं सदी के मशहूर ब्रितानी लेखक जेबी प्रीस्टली ने कहा कि इस कविता में वालरस और कारपेंटर दो सियासी लीडर हैं.

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अलग-अलग दौर में 'एलिस इन वंडरलैंड' की कहानी का अलग मतलब निकाला जाना, समाज के बदले माहौल को दिखाते हैं. इससे ये भी साबित होता है कि ये क़िस्सा, वक़्त के दायरों से परे है. और इसके मायने हर दौर के हिसाब से बदलकर निकाले जा सकते हैं.

'एलिस इन वंडरलैंड' को लेकर बहस का ये सिलसिला जारी है. एलिस के किरदार में ख़ामियां तलाशना बंद नहीं हुआ है. आज हमारे अपने किरदारों की तरह ही एलिस भी बेहद उलझी हुई मालूम होती है.

कहानी लिखने वाले चार्ल्स डॉजसन गणित पढ़ाया करते थे. इसीलिए उनके क़िस्से में गणित के सवालों के उलझाव और रेखा गणित के पेंच ओ खम देखने को मिलते हैं.

कहानी की हीरोइन एलिस को भी अक्सर पहेलियों का सामना करना पड़ता है. और वो चाहे उन्हें जितनी मशक्कत से सुलझाए.

आख़िर में पता यही चलता है कि वो सब बेमक़सद पहेलियां हैं. ख़ुद डॉजसन भले ही तर्क वितर्क वाले इंसान रहे हों, पर उनकी कहानी बेसिर-पैर की मालूम होती है.

तो शायद वो ये बताना चाहते थे कि ये दुनिया एक पागलखाना है, जहां अक्सर उम्मीदें टूटती हैं. तो हमें इस कहानी में कोई मायने तलाशने के बजाय, इसे पढ़कर इसका लुत्फ़ उठाना चाहिए.

(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कल्चर पर उपलब्ध है.)

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