यूएस कांग्रेस में मोदी के भाषण पर गूंजी तालियां

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मंगलवार को अमरीकी संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और अमरीका के बीच रिश्ते के एक नए युग की शुरुआत करने का आह्वान किया.

अपने भाषण में उन्होंने जब जब भारत और अमरीका के बीच पुराने समय से चले आ रहे रिश्तों की बात की, अमरीकी संसद सदस्यों ने खड़े होकर तालियां बजाईं.

बीच बीच में मोदी ने माहौल को हल्का करने के लिए मज़ाक भी किया और पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा.

उन्होंने अमरीका में योग की लोकप्रियता हवाला देते हुए कहा कि भारत का इस पर कोई पेटेंट नहीं है.

पौन घंटे के भाषण में उन्होंने दोनों देशों की बीच मज़बूत रिश्ते, दुनिया में चुनौती, दोनों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी से लेकर व्यापार, परमाणु समझौते और चरमपंथ के ख़िलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस अपनाने की नीति पर बात की.

मोदी के भाषण की अहम बातें:

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1- मुझे यहां आमंत्रित कर सवा करोड़ लोगों वाले देश के लोकतंत्र को सम्मान दिया गया है. मैं इसके लिए स्पीकर का शुक्रिया अदा करता हूं. लोकतंत्र के इस मंदिर ने पूरी दुनिया में लोकतंत्र को प्रोत्साहित और मज़बूत करने में मदद की है.

2 - दो दिन पहले मैंने अपनी यात्रा की शुरुआत आर्लिंगटन से की, जहां इस देश के उन सैनिकों की क़ब्रें हैं जिन्होंने आज़ादी और अधिकार के लिए अपनी जान दी.

3 - भारत के सैनिकों ने भी अपने देश से दूर जाकर इन्हीं मूल्यों के लिए अपनी जान गंवाई. इस मामले में भारत और अमरीका एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. दोनों ही देशों में हज़ारों लोगों ने आज़ादी के लिए जान दी.

4 - अमरीका की तरह ही भारत में सभी को समान रूप से आज़ादी और अधिकार हासिल है. भारत के मशहूर संत स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में इन्हीं मानवीय मूल्यों का उपदेश दिया था.

5 - दोनों देशों के बीच रिश्ते बहुत पुराने और प्रगाढ़ रहे हैं. डॉ. अम्बेडकर ने यहीं से ज्ञान हासिल लिया.

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6 - अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि भारत और अमरीका स्वाभाविक साझेदार हैं. ताज्जुब की बात नहीं है कि ओबामा ने भी कहा है कि दोनों देशों के बीच की यह साझेदारी 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारी है.

7 - हमें अतीत के हिचकिचाहट से बाहर आना चाहिए. आज हमारा रिश्ता इस आतीत के हिचक से बाहर आ गया है. और जिस दिन इस कांग्रेस ने भारत-अमरीकी नागरिक परमाणु समझौते को हरी झंडी दिखाई उसी दिन रिश्ते ने एक नया मोड़ ले लिया.

8 - दुख के समय यूएस कांग्रेस ने हमेशा भारत का साथ दिया है. मुंबई नवंबर 2008 में जब आतंकी हमला हुआ था तो यूएस कांग्रेस ने हमारे साथ एकजुटता दिखाई थी.

9 - यूएस कांग्रेस के कामकाज में बहुत शांत और सामंजस्य दिखता है. दो दलीय व्यवस्था के लिए हम इसकी तारीफ़ करते हैं, लेकिन आप अकेले नहीं हैं. आजकल मैं भी भारतीय संसद में ऐसी ही स्पिरिट देख रहा हूँ, ख़ासकर ऊच्च सदन में.

10 - नार्मन बार्लाक ग्रीन रिवोल्यूशन और खाद्य सुरक्षा को मेरे देश में लेकर आए. अमरीका के यूनिवर्सिटीज़ में जो शोध के काम हुए हैं उसका फ़ायदा भारत को भी हुआ है. एक दशक में ही रक्षा ख़रीद शून्य से 10 अरब डॉलर पहुंच गई है.

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11 - अमरीका में 3 करोड़ लोग योग करते हैं और ऐसा लगता है कि भविष्य में और अमेरिकी योग से जुड़ेंगे. हम बताना चाहते हैं कि हम इस पर कोई बौद्धिक संपदा अधिकार का दावा नहीं करते हैं.

12 - एक और बात हमें जोड़ती है वो है 30 लाख भारतीय अमरीकी. इनमें सबसे बेहतरीन अंतरिक्ष यात्री, वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री, शिक्षक, डॉक्टर यहां तक कि स्पेलिंग चैंपियन्स भी शामिल हैं. ये दोनों देशों की मज़बूती का उदाहरण है.

13 - सन् 2022 में देश की आज़ादी का 75वां साल होगा, हमारी काम करने की सूची काफ़ी लंबी है. आप समझ सकते हैं कि कृषि क्षेत्र को मज़बूत करना होगा. सभी घरों में बिजली पहुंचानी होगी, लाखों युवाओं को कौशल से लैस करना होगा. डिजिटल इंडिया, 21सेंचुरी रेल और रोड बनाना होगा. यह केवल सपना भर नहीं है. हमें एक निश्चित समय सीमा में काम करना होगा.

14 - हर क्षेत्र जिसमें भारत आगे बढ़ रहा है उसमें अमरीका एक मज़बूत साझेदार है. एक मज़बूत और सम्पन्न भारत अमरीका के रणनीतिक हित में है.

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15 - भारत और अमरीका के बीच मज़बूत साझेदारी एशिया और अफ़्रीका से लेकर हिंद महासागर से लेकर प्रशांत महासागर तक शांति और सम्पन्नता के लिए ज़रूरी है.

16 - आज दुनिया में चरमपंथ एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है. तालिबान से लेकर आईएस तक की फ़िलासफ़ी है नफ़रत और हत्या. राजनीतिक लाभ के लिए आतंक को बढ़ावा देने के खिलाफ़ कांग्रेस ने स्पष्ट संदेश दिया है, उसकी हम सराहना करते हैं.

17 - चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ते हुए हम दोनों ने अपने नागरिक गंवाए हैं. बेहतर और बुरे चरमपंथ को हमें बांटना नहीं चाहिए जो इसे मदद कर रहे हैं उनके ख़िलाफ़ कड़ी नीति अपनानी होगी.

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