नहाने के बाद चमड़ी के सिकुड़ने का राज़ !

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नहाने के बाद हमारे शरीर के कुछ हिस्सों की चमड़ी सिकुड़ जाती है. हमारे हाथों, हथेलियों, अंगुलियों और एड़ियों की त्वचा ज़्यादा देर पानी में रहने पर सिकुड़ जाती है. उसमें झुर्रियां पड़ जाती हैं.

आख़िर इसकी वजह क्या है?

कुछ लोग कहते हैं कि ये बायोकेमिकल रिएक्शन होता है. पानी में पड़ने पर हमारी चमड़ी से कुछ कण बाहर निकल जाते हैं. इससे त्वचा पर झुर्रियां सी पड़ जाती हैं.

हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि ये केवल परासरण या ऑस्मॉसिस नहीं. क्योंकि वैज्ञानिकों ने देखा कि चमड़ी के जो हिस्से सिकुड़ जाते हैं, अगर वहां की कुछ नसें काट दी जाएं तो फिर सिकुड़न नहीं आती.

इसका मतलब है कि सिकुड़ी हुई त्वचा ये दिखाती है कि हमारा नर्वस सिस्टम बिल्कुल ठीक काम कर रहा है.

मशहूर अमरीकी वैज्ञानिक मार्क चांगिज़ी कहते हैं कि हमारा शरीर, बदले हुए माहौल के मुताबिक़ ख़ुद को ढालता है. पानी में चमड़ी का सिकुड़ना भी वही है. ताकि हम किसी चीज़ को सही ढंग से पकड़ सकें.

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2011 में मार्क ने एक तजुर्बे में पाया था कि इंसानों के अलावा बंदरों और इस परिवार के दूसरे जानवरों में भी ये ख़ूबी देखने को मिलती है. इसका एक ही मक़सद नज़र आता है. वो ये कि पानी में भी हमारी पकड़ मज़बूत रह सके.

आप कुछ यूं समझिए कि हमारी चमड़ी में पड़ी झुर्रियां, छोटी-छोटी नालियां हैं. जो शरीर पर पड़ने वाले पानी को बहा देती हैं. क़ुदरती नदियां भी ऐसी ही होती हैं. छोटी छोटी धाराएं मिलकर एक नदी का रूप धरती हैं.

मार्क चांगिज़ी ने अपने तजुर्बे में पाया कि जैसे नदियों का ड्रेनेज सिस्टम होता है, हमारी चमड़ी का इसके ठीक उलट होता है. इसकी वजह भी है.

नदियां, जहां पानी जमा करती हैं, वहीं हमारी चमड़ी सिकुड़कर, शरीर पर पड़ने वाले पानी को बाहर करती है और ये काम काफ़ी तेज़ी से होता है.

ब्रिटेन में 2013 में हुए एक रिसर्च में ये भी देखा गया कि भीगे हुए हाथों की मदद से हम पानी के भीतर चीज़ों को तेज़ी से यहां-वहां कर सकते हैं. सूखे हाथों से यही काम करने में ज़्यादा वक़्त लगता है.

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हालांकि एक साल बाद जब जर्मनी में यही रिसर्च हुआ तो उसके नतीजे उल्टे आए. उसमें देखा गया कि गीले या सूखे हाथों से कोई काम करने में कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं होता.

वहीं ताईवान में हुए एक तजुर्बे में ये देखा गया कि गीले हाथों से सामान उठाने में दिक़्क़त होती है.

अगर हाथ गीले होने पर हमारी चमड़ी सिकुड़ती है तो इससे हमें अपने शरीर का वज़न उठाने में मदद मिलती है. किसी और चीज़ को उठाने-धरने में मदद मिलने की बात करना बेमानी है.

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