'उस धर्म के कारोबारी ने रोज़े में ये सब किया'

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पाकिस्तान में एक इस्लामी राजनेता की सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हो रही है.

उन्होंने एक टीवी शो में नारीवादी कार्यकर्ता मार्वी सर्मद के लिए भद्दी भाषा का इस्तेमाल किया था.

शुक्रवार को एक निजी चैनल के कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग के दौरान जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फ़ज़ल) के नेता हाफ़िज़ हमीदुल्ला ने मार्वी सर्मद को गालियां दीं.

कार्यक्रम में एक अन्य मेहमान बेरिस्टर मसरूर की टिप्पणी पर जब मार्वी ने कहा कि 'मैं सहमत हूँ' तब हमीदुल्ला और मार्वी के बीच बहस शुरू हो गई जो धमकी और गाली-गलौच तक पहुँच गई.

मार्वी ने हमीदुल्ला की आलोचना अपने फ़ेसबुक पन्ने और ट्विटर पर की है.

उन्होंने लिखा, "जब धर्म का कारोबारी ये सब कर रहा था तब उसका रोज़ा था."

हमीदुल्ला पाकिस्तानी संसद के उच्च सदन सीनेट के सदस्य भी हैं.

ट्विटर पर बहुत से लोगों ने सांसद और इस्लामी नेता हमीदुल्ला के व्यवहार को शर्मनाक़ बताया है.

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मुनिज़ा-ए-जहांगीर (@MunizaeJahangir ) ने लिखा, "मैं मार्वी पर हमीदुल्ला के शारीरिक और ज़बानी हमले की निंदा करती हूँ. जमीयत और उनका समर्थन करने वाले नेताओं को शर्म आनी चाहिए."

एक अन्य यूज़र डॉक्टर राशिद अली ने लिखा, "मैं मार्वी सिर्मद का फ़ैन नहीं हूं लेकिन हमीदुल्ला का व्यवहार शर्मनाक है. एक तोता याद तो कर सकता है लेकिन समझ नहीं सकता."

शफ़ाक़त महमूद (‏@Shafqat_Mahmood ) ने लिखा, "ये महिलाओं के प्रति उनके नज़रिए का उदाहरण है."

वहीं कुछ लोगों ने मार्वी की आलोचना भी की है.

तलहा बिन हामिद (@talhamid ) ने लिखा, "मार्वी की आलोचना क्यों नहीं हो रही है? क्या महिला और उदारवादी होना का मतलब ये है कि वो धर्मगुरू के साथ बुरा बर्ताव करें और बच जाएं."

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काशिफ़ (@aSuaveJerk ) ने ट्वीट किया, "मुझे नहीं लगता कि हाफ़िज़ हमीदुल्ला ने सिर्मद को पीटने की कोशिश की, न ही हालात इतने ख़राब थे. सिर्मद के दावों पर शक होता है."

कुछ लोगों ने ये भी कहा कि इन दोनों को राष्ट्रीय टीवी की बहसों से प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए

सबीना सिद्दीक़ी (@sabena_siddiqi ) ने लिखा, "राष्ट्रीय टीवी पर भद्दी लड़ाई. मार्वी और मुल्ला दोनों को टीवी की बहसों से प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए."

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