ऑरलैंडो का हमला ट्रंप को जीत दिलाएगा?

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अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में हिलेरी क्लिंटन की जीत की भविष्यवाणी करने वालों की कमी नहीं है, लेकिन इन भविष्यवाणियों में एक 'लेकिन' हमेशा रहा है.

ये बात सही है कि क्लिंटन संभावित रिपब्लकिन उम्मीदवार डोनल्ड ट्रंप के मुक़ाबले चुनावी गणित और संगठन के स्तर पर 20 नज़र आती हैं. ट्रंप के विवादित बयानों को कई लोग इसकी वजह बताते हैं.

'लेकिन' क्या होगा अगर नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट ने अमरीकी धरती पर ऐसा कोई हमला कर दिया जो सब जगह सुर्खी बने.

क्या इससे अमरीका में राष्ट्रपति पद की रेस का समीकरण ही बदल जाएगा.

चलिए इसकी पड़ताल करते हैं.

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ऑरलैंडों के नाइट क्लब में गोलीबारी की ख़बर फैलते ही ट्रंप ने ट्विटर का सहारा लिया. उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट दाग़े.

ट्रंप ने कहा, "उन लोगों को सराहता हूं जिन्होंने कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद पर सही रुख़ अपनाने के लिए मुझे बधाई दी थी. मैं बधाई नहीं चाहता, मैं कड़ाई और सतर्कता चाहता हूं. हमें समझदार बनना होगा."

ट्रंप के ऐसे बयानों को जहां उनके समर्थकों ने हाथोंहाथ लिया, वहीं उनके विरोधियों ने इन्हें आड़े हाथ लिया जिनमें समलैंगिक कार्यकर्ता जॉर्ज ताकेई भी शामिल हैं.

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उन्होंने ट्वीट किया, "एक बार फिर, डोनल्ड आपने बता दिया कि आप क्यों हमारा नेतृत्व नहीं कर सकते हैं. 50 लोग मर गए हैं और आप बधाइयों का आनंद उठा रहे हैं."

ऑरलैंडों के हमले पर राष्ट्रपति ओबामा ने अपने भाषण में इसे 'एक आतंकवादी कार्रवाई' बताया और कहा कि एक बार फिर साफ हो गया है कि हथियार उठाकर लोगों को मारना किसी के लिए कितना आसान है.

इसके बाद ट्रंप ने फिर उसी अंदाज में बयान दिया जिसकी वजह से वो रिपबल्किन पार्टी में उम्मीदवार हासिल करने के करीब पहुंचे हैं.

उन्होंने राष्ट्रपति ओबामा का इस्तीफ़ा मांग लिया क्योंकि उन्होंने 'कट्टरपंथी इस्लाम का ज़िक्र तक नहीं किया.'

उन्होंने लिखा, "अगर हम सख़्त और समझदार नहीं बने, तो हमारा ये देश बचेगा नहीं. क्योंकि हमारे नेता कमजोर हैं, और मैं कह रहा हूं कि ऐसा होने जा रहा है. चीजें ख़राब ही होंगी. मैं लोगों को बचाने की कोशिश कर रहा हूं और आगे ऐसे हमले रोकने चाहता हूं. हम अब और राजनीतिक रूप से सही नहीं हो सकते हैं."

ट्रंप ने हिलेरी क्लिंटन पर भी निशाना साधा जो अमरीका में 'सीरिया के 65 हजार शरणार्थियों को बसाने का समर्थन करती हैं.'

ट्रंप ने कहा कि क्लिंटन अमरीका में मध्य पूर्व से आने वाले लोगों की तादाद को नाटकीय तौर पर बढ़ाना चाहती हैं और अमरीका उनकी जांच नहीं सकता है, उनका खर्चा नहीं उठा सकता है या फिर उनकी दूसरी पीढ़ी को कट्टरपंथी होने से नहीं रोक सकता है.

दूसरी तरफ क्लिंटन ने भी अपना बयान जारी किया है जिसमें ज्यादातर हिस्सा इस घटना पर राष्ट्रपति ओबामा के बयान पर ही केंद्रित है.

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उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, "हमें अपने देश को आंतरिक और बाहरी ख़तरों से बचाने के प्रयासों को दोगुना करना होगा."

उन्होंने कहा, "विदेशी आंतकवादी गुटों को हराना होगा, उन्हें पकड़ने के लिए सहयोगियों के साथ काम करना होगा, भले ही वो कहीं भी हों, लोगों को भर्ती करने की उनकी कोशिशों से निपटना होगा और घरेलू स्तर पर अपने बचाव तंत्र को मज़बूत करना होगा."

क्लिंटन ने अमरीका में आसानी से बंदूक मिल जाना यानी गन कल्चर पर नियंत्रण को अपनी मुहिम का एक ख़ास हिस्सा बनाया है. उनके हालिया बयान को राष्ट्रीय सुरक्षा पर अपना रुख़ तय करने की उनकी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

दोनों पार्टियों के संभावित उम्मीदवारों की तरफ़ से आए इन बयानों के बाद प्रवासियों का मुद्दा, चरमपंथी हमले और गन कल्चर चुनाव के बड़े मुद्दे बन गए हैं.

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ट्रंप अमरीका में मुसलमानों के आने पर रोक लगाने वाले अपने बयान से चुपचाप तरीक़े से पीछे हट गए हैं. हालांकि इस बात का ज़िक्र अब भी वो कर ही देते हैं.

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "ऑरलैंडो में जो कुछ हुआ, वो तो बस शुरुआत है. हमारा नेतृत्व कमज़ोर और बेअसर है. मैंने बैन लगाने की बात कही थी. सख़्त होना पड़ेगा."

पिछले मंगलवार को जब कैलिफोर्निया के प्राइमरी चुनाव में ट्रंप ने जीत हासिल की तो इस मौके पर अपने भाषण में उन्होंने ज़्यादार आर्थिक मुद्दे और हिलेरी क्लिंटन पर हमले करने पर ज़्यादा तवज्जो दी.

अब वो सोमवार को फिर भाषण देने वाले हैं. ये भाषण 'इस आंतकवादी हमले, प्रवासी मुद्दे और राष्ट्रीय सुरक्षा पर होगा.'

लगता है कि ट्रंप हिसाब लगाने में जुटे हैं कि ऑरलैंडों हमले के बाद अमरीकी जनता तय करेगी कि यथास्थिति उन्हें स्वीकार नहीं है. इसीलिए चुनाव में माहौल उनके लिए ज़्यादा साज़गार होगा जबकि क्लिंटन को लोग ओबामा की विदेश नीति को आगे बढ़ाने वाली उम्मीदवार ही मानेंगे.

कल ही बात है कि लोग अटकलें लगा रहे थे कि ऐसा हो गया तो क्या होगा, लेकिन आज ये बात हक़ीक़त का रूप लेती दिख रही है.

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