बग़ैर कुछ किए घट सकती है आपकी तनख़्वाह

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Image caption करेंसी बाज़ार की उठापटक का सीधा असर वेतन पर पड़ता है

आज बहुत से लोग दूसरे देशों में जाकर काम करते हैं. इनमें से कई लोगों को अलग-अलग देशों की करेंसी में पैसे मिलते हैं. करेंसी बाज़ार में उठा-पटक का सीधा असर इनकी तनख़्वाह पर पड़ता है. इनकी कंपनी की तरफ़ कोई फेरबदल हुए बग़ैर ही ऐसे बहुत से लोगों की आमदनी घट या बढ़ जाती है.

अमरीका की रेबेका सेल्फ़ को ही लीजिए, जो स्विटज़रलैंड में काम करती हैं. उन्हें कभी डॉलर में तो कभी किसी और देश की करेंसी में पैसे मिलते हैं.

अभी हाल में स्विस फ्रैंक के मज़बूत होने की वजह से रेबेका की आमदनी में तीस फ़ीसद तक की गिरावट आ गई. वजह यह कि जिन करेंसी में उन्हें पैसे मिल रहे थे वो स्विस फ्रैंक के मुक़ाबले कमज़ोर हो गए.

ऐसा ही तब भी देखने को मिला था जब ब्रेक्ज़िट वोट के बाद ब्रिटिश पाउंड की क़ीमत कम हुई थी. इस वजह से लोगों की आमदनी में दस फ़ीसद तक की गिरावट देखी गई थी. बहुत से ऐसे लोग हैं जिनकी आमदनी करेंसी में उतार-चढ़ाव के चलते घट-बढ़ जाती है.

वजह यह कि ऐसे लोगों की सैलरी काफ़ी पहले से ही हुई सौदेबाज़ी में तय हुई होती है. पर करेंसी मार्केट के उतार चढ़ाव के चलते उनकी मुद्रा कमज़ोर हुई तो आमदनी बढ़ती है और मज़बूत हुई तो घट जाती है.

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Image caption ब्रेग़्ज़िट वोट के नतीजे आने के बाद पौंड तीस साल के अपने न्यूनतम स्तर पर जा पंहुचा था.

इसीलिए अब विदेशी मुद्रा में पेमेंट पाने वाले लोग करेंसी के उतार-चढ़ाव को भी अपनी सैलरी की सौदेबाज़ी के दौरान जोड़ने लगे हैं. कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों को इस झटके से बचाने के लिए सालाना इन्क्रीमेंट के बजाय करेंसी के उतार-चढ़ाव के हिसाब से तनख़्वाह बढ़ाने लगी हैं.

विदेशी कर्मचारी रखने वाली कई कंपनियां करेंसी में सात से बारह फ़ीसद की गिरावट आने के बाद अपने कर्मचारियों को लगने वाले इस घाटे की भरपाई करती हैं.

जानकार सलाह देते हैं कि अगर आप काम करने के लिए विदेश जा रहे हैं तो इस बात का ख़ास ख़याल रखें कि आप विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव के शिकार हो सकते हैं.

इसीलिए जब आप अपनी सैलरी की सौदेबाज़ी कर रहे हों तो इस मुद्दे पर ज़रूर बात कर लें. ऐसे पैकेज की बात करना सबसे अच्छा होगा जिसमें कुछ पैसे विदेशी मुद्रा में तो कुछ आपकी अपनी करेंसी में मिलें.

दूसरी चीज़ जो ख़याल रखने वाली है वो है आपकी आमदनी में लगने वाला टैक्स. इस बारे में पहले से गुणा-भाग और हिसाब कर लेने से आपकी आमदनी में अचानक गिरावट नहीं आएगी.

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Image caption वेतन पर बात करते समय करेंसी में संभावित उतार चढ़ाव का भी ख्याल रखें

आज की तारीख़ में विदेश में काम करने वाले बहुत से लोग अपनी आमदनी को विदेशी करेंसी की गिरावट से बचाने के लिए कई नुस्खे आज़मा रहे हैं. जैसे कुछ लोग स्थानीय करेंसी में अपने बिल का भुगतान करते हैं. वहीं, कुछ लोग ऑनलाइन करेंसी ट्रांसफर की मदद से अपनी आमदनी को अपनी घरेलू मुद्रा में तब्दील कर लेते हैं.

दूसरा तरीक़ा अपनी आमदनी को सही जगह निवेश करने का है. कहने का मतलब यह कि अगर उस करेंसी में गिरावट आ गई है, जिसमें आपको भुगतान होता है तो आप अच्छे निवेश के विकल्प आज़माकर उस नुक़सान की भरपाई कर सकते हैं.

स्विटज़रलैंड में काम करने वाली अमरीकी नागरिक रेबेका सेल्फ़ ऐसा ही करती हैं. वे अपनी बचत का एक हिस्सा स्विटज़रलैंड में निवेश करती हैं.

उन्हें रिटायरमेंट स्कीम में निवेश करने पर टैक्स में छूट मिलती है. फिर वो कुछ पैसे अमरीका में निवेश करती हैं, जहां की मुद्रा डॉलर स्विस फ्रैंक के मुक़ाबले कमज़ोर हुई है. उस निवेश पर उन्हें ज़्यादा शेयर यूनिट मिल जाती हैं.

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Image caption ब्रेग्ज़िट वोट के बाद कुछ अप्रवासियों की तनख़्वाह कम हो गई

कुछ बैंक विदेशी मुद्रा में सैलरी पाने वाले लोगों के लिए वेल्थ मैनेजमेंट सेवाएं देते हैं. इसमें वो किसी ख़ास करेंसी में गिरावट से बचने के लिए निवेश को कई तरह की करेंसी में तब्दील करने की सलाह देते हैं. इससे किसी एक मुद्रा में गिरावट का ज़्यादा नुक़सान नहीं उठाना पड़ता.

पर इस उठा-पटक से बचने का सबसे ज़रूरी पाठ ये है कि आप अपनी सैलरी को लेकर अच्छे से सौदेबाज़ी करें.

इस बात का ध्यान रखते हुए कि अपने देश की करेंसी में अगर पेमेंट नहीं मिलेगी तो विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव को लेकर भुगतान के कुछ ज़रिए आपकी नौकरी के कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा हों.

इस बात को अच्छे से परख लें कि आप जिस बेहतर आमदनी की उम्मीद में विदेश जा रहे हैं, वो मक़सद पूरा होगा या नहीं.

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