पुलिस, नेता और गैंगस्टर को शहर से खदेड़ा

मेक्सिको में हर जगह संगठित अपराध करने वाले गैंग का बोलबाला है. छोटे से छोटा गांव भी इससे अछूता नहीं है.

पर सिर्फ़ 20,000 की आबादी वाले छोटे से कस्बे चेरन में उनके लिए कोई जगह नहीं है.

चेरन के लोग अपने जंगलों को बचाने के लिए एकजुट हो गए और ग़ैर क़ानूनी तरीके से लकड़ी काटने वालों और संगठित अपराधियों को खदेड़ दिया.

उन्होंने नेताओं और पुलिस वालों को भी नहीं बख़्शा, क्योंकि उन्हें शक था कि वे उन अपराधियों से मिले हुए हैं.

चेरन के झरने के पास साल 2011 में कुछ लोग लकड़ी काट रहे थे. मार्गरीटा एलवीरा रोमीरो उस दिन को याद कर कहती हैं, "हमें चिंता हुई. पेड़ कट जाएंगे तो पानी कम हो जाएगा. हमारे पति पशुपालन करते थे, फिर पशुओं को पानी कहां से मिलेगा?"

कुछ महिलाएं जंगल गईं और पेड़ काटने वालों को समझाने बुझाने की कोशिश की. पर उनके साथ गाली गलौच की गई और जंगल से खदेड़ दिया गया.

कस्बे की महिलाओं ने तय किया कि लकड़ी ले जा रहे ट्रकों को रोका जाए.

चेरन में 15 अप्रैल 2011 को बग़ावत हो गई. इन महिलाओं ने लकड़ी ले जा रहे ट्रकों को रोक दिया और लोगों को बंधक बना लिया.

थोड़ी ही देर में पुलिस के जवान, मेयर और हथियारबंद लोग बंधकों को छुड़ाने के लिए आ पंहुचे. पूरे कस्बे में तनाव फैल गया.

इलाक़े के लोगों ने पुलिस और नेताओं को खदेड़ दिया, क्योंकि उन्हें लगा कि ये सब लकड़ी काटने वाले गिरोह से मिले हुए हैं. लेकिन बात यहीं नहीं थमी.

चेरन के चार इलाकों से जन प्रतिनिधि चुने गए. उन्होंने फ़ैसला किया कि कस्बे का प्रशासन वे ख़ुद देखेंगे.

चेरन में आदिवासी समुदाय परपीचा के लोग रहते थे. उनकी परंपरा थी बाहरी लोगों के हस्तक्षेप के बग़ैर अपना काम खुद देखने की. यह तय किया गया कि अब चेरन कस्बे की देखभाल में बाहरी लोगों का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा.

पांच साल बाद आज भी उस समय के बने हुए चेक प्वाइंट बरक़रार हैं. स्थानीय महिलाओं और पुरुषों को लेकर बनाया गया मिलिशिया रोन्डा कम्युनिटेरिया के लोग इन चेक प्लवाइंट्स की देख भाल करते हैं.

यहां हर गाड़ी रोकी जाती है, उसमें सवार लोगों से पूछताछ की जाती है और उसके बाद ही उन्हें जाने दिया जाता है.

चेरन में छोटे मोटे अपराधों की सुनवाई भी होती है और उस हिसाब से लोगें को दंड भी दिया जाता है. पिछले महीने एक रविवार को सार्वजनिक रूप से शराब पीने की वजह से 18 युवकों को हिरासत में ले लिया गया था.

मिचोआकान मेक्सिको के उन प्रांतो में है, जहां सबसे अधिक ख़ून ख़राबा हुआ है. जुलाई में अलग अलग वारदातों में 180 लोग मारे गए थे. अपरहरण करने और फिरौती मांगने की बात तो आम है. यह सारा सब कुछ चेरन से सिर्फ़ 10 किलोमीटर की दूरी पर होता है, लेकिन चेरन में नहीं.

चेरन में अब एक बार फिर जंगल लगाए जा रहे हैं, जंगल का विस्तार हो रहा है. संगठित अपराधियों के गैंग ने 17,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र से जंगल का पूरी तरह सफाया कर दिया था. अब वहां 3,000 वर्ग किलोमीटर में जंगल लगाया जा चुका है.

ऐसा नहीं है कि चेरन देश से पूरी तरह आज़ाद हो चुका है. यह अभी भी राज्य और केंद्र सरकार के अधीन है और उनसे मिले पैसों से यहां स्कीमें चलती हैं.

लेकिन इस इलाक़े को स्वायत्तता मिल गई है. मेक्सिको सरकार ने परपीचा समुदाय को मान्यता दे दी है. अदालत ने यहां राजनीतिक दलों पर लगे प्रतिबंध को जायज़ ठहराया है.

मेक्सिको के लोग पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं. उनके मन में असुरक्षा की भावना है. लाखो लोग नशा की तस्करी में लगे संगठित गुटों और हत्यारे गैंग से डरे हुए हैं.

नियम क़ानून लागू कराने वाली एजेंसी भ्रष्ट है. ऐेसे में कई समुदायो के लोग अपने हाथ में क़ानून लेने लगे हैं.

ख़ुद चेरन के लोगों को डर लगता है कि उनकी आज़ादी छिन न जाए. पर दूसरी जगहों के लोग उसने प्रेरणा लेकर वैसा ही करने लगे हैं.

ग्वेरेरो प्रांत के लोगों ने साल 2013 में अपने हाथ में क़ानून ले लिया था. इस समूह से हज़ारों लोग जुड़ चुके हैं. पर इन लोगो को चेरन जैसी कामयाबी नहीं मिली.

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